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जनसुनवाई में अधिकारियों ने सुनी 102 आवेदकों की समस्यायें, दिए निराकरण के निर्देश

 जनसुनवाई में अधिकारियों ने सुनी 102 आवेदकों की समस्यायें, दिए निराकरण के निर्देश



ढीमरखेड़ा |  कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने 102 आवेदकों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं एवं निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव के निर्देश पर अधिकारियों ने रू-ब-रू संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना। यह जनसुनवाई समस्त उपखंड, तहसील एवं जनपद स्तर पर भी आयोजित की गई। जनसुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर साधना परस्ते, संयुक्त कलेक्टर निधि सिंह, संस्कृति शर्मा, डिप्टी कलेक्टर प्रमोद चतुर्वेदी, विवेक गुप्ता एवं ज्योति लिल्हारे मौजूद रहे।

*पेंशन तथा पीएफ की राशि दिलायें*

 ग्राम पुरैनी निवासी लीला बाई यादव ने जनसुनवाई के दौरान आवेदन देते हुये कहा कि मेरे पति स्व. मोहन लाल यादव म.प्र. राज्य सहकारी संघ विपणन में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। पुरैनी से उनका ट्रांसफर मुरैना हो गया था। 2019-20 में उनकी मृत्यु हो गई। 4 साल से भाग दौड़ करने के बाद भी पेंशन एवं पीएफ की राशि प्राप्त नहीं हो सकी है। जिस पर जिला विपणन संघ को निश्चित समयावधि में शिकायत का निराकरण के निर्देश दिए गए।

*पट्टा दिलायें*

अहमद नगर निवासी राजकुमार कोल पिता मथुरा ने आवेदन देते हुये कहा कि मैं भूमिहीन हूँ एवं रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मेरा परिवार पानी की टंकी के पास पिछले पांच वर्षों से काबिज है। इसलिए मुझे भूमि का पट्टा दिलाया जाये। इस पर अधिकारियों ने तहसीलदार कटनी नगर को नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

*दिलायें अनुग्रह राशि*

जनसुनवाई के दौरान सोनी चौरसिया ने आवेदन देते हुये कहा कि मेरे पति स्व. आशीष चौरसिया की मृत्यु ब्रेन हेमरेज से हो गई थी। मृत्यु के उपरांत मैंने संबल योजनांतर्गत अनुग्रह सहायता राशि हेतु आवेदन दिया था। मेरा आवेदन पोर्टल पर स्वीकृत कर लिया गया था। मुझे अभी तक कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। जबकि पोर्टल पर मुझे राशि का भुगतान होना दिखाया जा रहा है। इस पर जिला श्रम अधिकारी को शिकायत का निराकरण करने के निर्देश दिए गए। विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम कटरिया निवासी फेरन सिंह ने आवेदन के माध्यम से बताया कि मौजा बनगवा पटवारी हल्का नं. 70 स्थित भूमि जिसका खसरा नं. 62/2 रकबा 0.60 हेक्टेयर भूमि है। यह भूमि मैंने रामसुजाल जायसवाल से क्रय की थी एवं इस पर मैं वर्ष 2001 से काबिज हूँ। परंतु ऑनलाइन दस्तावेजों में यह भूमि हीरा लाल झारिया के नाम पर दिख रही है। इस पर तहसीलदार ढीमरखेड़ा को जांच कर नाम सुधार करने हेतु निर्देश दिया गया।

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