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कृषक क्लब की राशि हड़पने की फिराक में आई.डी.बी.आई बैंक और लक्ष्य एनजीओ आई.डी.बी.आई. शाखा घंटाघर कटनी की सांठगांठ के कारण किसानों को नहीं मिल रही राशि खाता बंद होने का बहाना बनाकर एनजीओ को राशि देने की तैयारी

 कृषक क्लब की राशि हड़पने की फिराक में आई.डी.बी.आई बैंक और लक्ष्य एनजीओ आई.डी.बी.आई. शाखा घंटाघर कटनी की सांठगांठ के कारण किसानों को नहीं मिल रही राशि खाता बंद होने का बहाना बनाकर एनजीओ को राशि देने की तैयारी 



ढीमरखेड़ा | राष्ट्रीय कृषि ग्रामीण विकास नाबार्ड के द्वारा हर विकासखडों में कृषक दल का गठन किया गया था। गठन का उद्देश्य किसानों को जागरूक करना एवं अन्य किसानों को नाबार्ड के माध्यम से योजनाओं का लाभ प्रदान करना था। जिसमें शासन के द्वारा कृषक दल में शामिल सदस्यों को भी राशि दी जाती थी। इसी बीच काफी समय से लेन-देन नहीं होने के कारण आई.डी.आई.बी. बैंक के द्वारा सदस्यों के खाते निष्क्रिय कर दिये गये और उन्हें पैसा देने से मना कर दिया गया है। इसी बीच बैंक के द्वारा लक्ष्य एनजीओ से सांठगांठ करके उनसे भुगतान के लिये लेटर मांगा गया है। लक्ष्य एनजीओ के द्वारा भुगतान के लिये अपना लेटर बैंक को सौंपा जा चुका है। ऐसी स्थिति में यदि एनजीओ के खाते में भुगतान कर दिया जाता है तो किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ेगा । मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में किसानों के द्वारा इस संबंध में अपनी पीड़ा सुनाई गई। सदस्यों ने बताया कि नाबार्ड के द्वारा वर्ष 2011 - 12 में जिले के सभी विकास खण्डों में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास नावार्ड ने लक्ष्य के द्वारा जिले के सभी विकास खण्डों में कृषक क्लब गठित कर कई बैंक में खाते खुलवाए गए थे जिसमें नाबार्ड द्वारा 2015 से कृषक क्लब के बचत खाते में कृषि विकास हेतु समूह के माध्यम से किसानों को 5000 रु. की राशि बचत खाते में दी गई है तभी से कृषक क्लब बैंक से राशि आहरण कर खाद्य बीज एवं क्लब की मीटिंग करने में राशि का उपयोग कर रही है। अभी हाल ही में जुलाई 2024 से कई बैंक कृषक के क्लब को बचत खाते से राशि आहरण करने के लिए बैंक ड्राफ्ट जारी किया है। कई ब्रांच मैनेजर एवं लक्ष्य के द्वारा बैंक में क्लब के मुख्य संयोजक से ड्राफ्ट में हस्ताक्षर कराकर राशि का भुगतान नहीं करते है इस संबंध में जब किसानों के द्वारा बैंक में संपर्क किया गया तो कई ब्रांच मैनेजर कहते हैं कि क्लव की राशि लक्ष्य के खाते में ट्रांसफर होना है। इस संबंध में लक्ष्य एनजीओ के द्वारा स्वयं के खाता नंबर में राशि ट्रांसफर करने का पत्र शाखा में भेजा है। 

*एनजीओ पहले भी हड़प चुका है किसानों की राशि* 

पीड़ित किसानों के द्वारा जनसुनवाई में कलेक्टर को बताया गया कि लक्ष्य के द्वारा पूर्व में भी कृषक क्लब से आधी राशि वसूली गई थी जो नियम विरूद्ध है। नाबार्ड के द्वारा जिस मंशा के साथ इसकी स्थापना की गई थी वह विफल होती नजर आ रही है। ऐसा नहीं है कि इस काले कारनामें सिर्फ एनजीओ ही शामिल हो बल्कि आईडीबीआई बैंक शाखा घंटाघर कटनी प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जनसुनवाई में बैंक और एनजीओ के विरूद्ध शिकायत सौंपकर सदस्यों के द्वारा कलेक्टर से मांग की गई है कि नियमानुसार जांच कर दोनों के विरूद्ध कार्यवाही करने की कृपा करें। कृषक क्लब की राशि हड़पने की साजिश में आईडीबीआई बैंक और लक्ष्य एनजीओ की संलिप्तता का मामला गंभीर चिंता का विषय है। यह प्रकरण किसानों की कठिनाइयों और बैंकिंग प्रणाली की अनियमितताओं को उजागर करता है, जिसमें राष्ट्रीय कृषि ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के द्वारा स्थापित कृषक क्लब का उद्देश्य किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना था, लेकिन बैंक और एनजीओ की मिलीभगत से किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा है। 

*नाबार्ड द्वारा कृषक क्लब की स्थापना*

नाबार्ड का गठन भारत के ग्रामीण इलाकों में कृषि और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किया गया था। इसके तहत कृषक क्लब जैसी योजनाएं बनाई गईं, जिनका उद्देश्य किसानों को जागरूक करना, नई कृषि तकनीकों से परिचित कराना, और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना था। इसके अंतर्गत प्रत्येक विकास खंड में कृषक क्लब का गठन किया गया, और इन क्लबों के माध्यम से किसानों के लिए विशेष बचत खाते खोले गए थे, जिनमें नाबार्ड द्वारा सहायता राशि जमा की जाती थी। इस योजना का मूल उद्देश्य यह था कि कृषक क्लब के सदस्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इस राशि का उपयोग बीज, खाद्य, और कृषि संबंधी अन्य वस्तुओं की खरीद में कर सकें। इसके साथ ही, क्लब की मीटिंग्स और अन्य आवश्यकताओं के लिए भी राशि का उपयोग किया जाता था। कुल मिलाकर, यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें खेती के आधुनिक तरीकों से जोड़ने के लिए बनाई गई थी। आईडीबीआई बैंक, जो नाबार्ड की इस योजना के तहत किसानों के लिए बचत खाते संचालित करता है, की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदेहास्पद नजर आती है। बैंक के द्वारा यह दावा किया गया कि लंबे समय तक लेन-देन न होने के कारण कृषक क्लब के खातों को निष्क्रिय कर दिया गया है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब बैंक ने सदस्यों को पैसे देने से मना कर दिया, और एनजीओ से सांठगांठ करके भुगतान की प्रक्रिया को एनजीओ के खातों में ट्रांसफर करने का प्रयास किया जा रहा है। यह साफ है कि बैंक प्रबंधन की इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं, क्योंकि क्लब के खातों को बिना उचित जानकारी या सहमति के निष्क्रिय करना और फिर एनजीओ के माध्यम से राशि का हस्तांतरण करना, किसानों के अधिकारों का हनन है। इसके अलावा, बैंक द्वारा किसानों के बचत खातों से ड्राफ्ट जारी करने के बावजूद भुगतान में देरी और हेरफेर करना, बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है। लक्ष्य एनजीओ, जो इस पूरे मामले में प्रमुख भूमिका निभा रहा है, पहले से ही विवादों में रहा है। जनसुनवाई में किसानों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि इस एनजीओ ने पहले भी कृषक क्लब से आधी राशि हड़प ली थी। यह गतिविधि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है और एनजीओ के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।लक्ष्य एनजीओ ने हाल ही में बैंक को पत्र भेजकर यह अनुरोध किया है कि कृषक क्लब की राशि उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाए। यह कदम स्पष्ट रूप से किसानों की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाने वाला है, क्योंकि यह राशि उनके बचत खातों में आनी चाहिए थी, जिससे वे इसे अपने कृषि कार्यों में उपयोग कर सकें। एनजीओ की इस साजिश में बैंक की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि बैंक ने बिना किसी जांच के इस पत्र को स्वीकार कर लिया और भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

*जनसुनवाई में किसानों की पीड़ा*

किसानों ने अपनी इस समस्या को लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड द्वारा वर्ष 2011-12 में जिले के सभी विकासखंडों में कृषक क्लब का गठन किया गया था, जिसमें किसानों को 5000 रुपए की राशि दी गई थी। इस राशि का उपयोग किसानों ने बीज, खाद, और अन्य कृषि सामग्री खरीदने में किया। हालांकि, जुलाई 2024 में बैंक द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट पर अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है, और बैंक तथा एनजीओ के बीच की साजिश के कारण किसानों को उनकी मेहनत की कमाई से वंचित किया जा रहा है। जनसुनवाई में किसानों ने कलेक्टर से इस मामले की गहन जांच कराने और दोषी बैंक एवं एनजीओ के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।

*किसानों की आर्थिक हानि*

अगर बैंक और एनजीओ की साजिश सफल हो जाती है और किसानों की राशि एनजीओ के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, तो इससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। यह राशि, जो उनके कृषि कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है, अगर हड़प ली जाती है, तो इसका सीधा असर उनकी फसल उत्पादन पर पड़ेगा। इसके अलावा, भविष्य में किसानों का बैंकिंग प्रणाली और सरकारी योजनाओं पर भरोसा कम हो जाएगा, जो ग्रामीण विकास के लक्ष्यों के विपरीत है।

*नाबार्ड की मंशा का विफल होना*

नाबार्ड द्वारा कृषक क्लब की स्थापना एक सकारात्मक कदम था, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें कृषि कार्यों में सहायता प्रदान करना था। हालांकि, बैंक और एनजीओ की अनियमितताओं के कारण यह योजना अब विफल होती दिख रही है। नाबार्ड की मंशा थी कि किसान सीधे बैंकिंग प्रणाली से जुड़ें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें, लेकिन बैंक और एनजीओ की साजिश ने इस मंशा को कमजोर कर दिया है।

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