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स्लॉट बुकिंग की समस्या से किसान परेशान, पोर्टल की खराब व्यवस्था बनी चिंता का विषय

 स्लॉट बुकिंग की समस्या से किसान परेशान, पोर्टल की खराब व्यवस्था बनी चिंता का विषय कटनी  |  ढीमरखेड़ा में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान स्लॉट बुकिंग की समस्या किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। पोर्टल की तकनीकी खामियों और लगातार सर्वर डाउन रहने से किसान घंटों तक परेशान हो रहे हैं। कई किसानों का आरोप है कि स्लॉट बुकिंग समय पर नहीं हो पा रही, जिसके कारण उन्हें खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों का कहना है कि पोर्टल कभी खुलता नहीं, तो कभी ओटीपी की समस्या सामने आ जाती है। कई बार स्लॉट बुक होने के बाद भी जानकारी अपडेट नहीं होती, जिससे किसानों को वापस लौटना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि तकनीकी अव्यवस्था का खामियाजा सीधे उन्हें भुगतना पड़ रहा है। खरीदी केंद्रों पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी नजर आ रही हैं। किसान कई दिनों से अपनी उपज लेकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन स्लॉट नहीं मिलने के कारण खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर स्लॉट बुकि...

ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश

 ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश कटनी | भीषण गर्मी, तपती दोपहरी का वक्त,सकरी मेढ़ें, कटीली झाड़ियों और खेतों के बीच पगडंडी मार्ग से ऊबड़ खाबड़ पथरीली राहों में पसीने से तरबतर जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने ढाई से तीन किलोमीटर पैदल चलकर विकासखंड ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांवों में निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा, कोठी, झिन्ना पिपरिया, भमका, खमतरा पहरुआ एवं अन्य गांव पहुंचकर, नवीन स्वीकृत जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य स्थल,गेहूं खरीदी केंद्र, जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खेत तालाब, डगवेल, आंगनवाड़ी भवन एवं शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में लैब एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता को परखा और प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा म...

विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार

 विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार कटनी  |  किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की न्याय व्यवस्था केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक ताकत उस विवेचना व्यवस्था में छिपी होती है जो अपराध के पीछे का सच सामने लाने का काम करती है।अदालत वही निर्णय देती है जो तथ्य और सबूत उसके सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। यदि विवेचना निष्पक्ष, ईमानदार और सत्य आधारित हो तो न्याय व्यवस्था मजबूत होती है, लेकिन यदि जांच भ्रष्टाचार, दबाव और चापलूसी की भेंट चढ़ जाए तो न्याय केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। आज देश में आम जनता के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हुई है कि कई मामलों में विवेचना सत्य की खोज के लिए नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों को बचाने और कमजोर वर्ग को दबाने के लिए की जाती है। पैसों के बल पर जांच की दिशा बदल देना, राजनीतिक दबाव में केस कमजोर करना, सबूत गायब करना और अपराधियों को बचाने के लिए कागजों में कहानी बदल देना यह सब न्याय व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब विवेचक सत्ता के सामने झुकने लगे और सत्य की जगह जी-हजूरी को प्राथमिकता देने लगे, ...

विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार

 विवेचना व्यवस्था, न्याय की रीढ़ या भ्रष्ट तंत्र का हथियार कटनी  |  किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की न्याय व्यवस्था केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक ताकत उस विवेचना व्यवस्था में छिपी होती है जो अपराध के पीछे का सच सामने लाने का काम करती है।अदालत वही निर्णय देती है जो तथ्य और सबूत उसके सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। यदि विवेचना निष्पक्ष, ईमानदार और सत्य आधारित हो तो न्याय व्यवस्था मजबूत होती है, लेकिन यदि जांच भ्रष्टाचार, दबाव और चापलूसी की भेंट चढ़ जाए तो न्याय केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। आज देश में आम जनता के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हुई है कि कई मामलों में विवेचना सत्य की खोज के लिए नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों को बचाने और कमजोर वर्ग को दबाने के लिए की जाती है। पैसों के बल पर जांच की दिशा बदल देना, राजनीतिक दबाव में केस कमजोर करना, सबूत गायब करना और अपराधियों को बचाने के लिए कागजों में कहानी बदल देना यह सब न्याय व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब विवेचक सत्ता के सामने झुकने लगे और सत्य की जगह जी-हजूरी को प्राथमिकता देने लगे, ...

आखिर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति की जांच कब

 आखिर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति की जांच कब कटनी  |  सरकारी कुर्सी जनता की सेवा के लिए होती है, लेकिन जब वही कुर्सी सवालों के घेरे में आ जाए तो फिर जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। इन दिनों क्षेत्र में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की संपत्ति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आमजन के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर नौकरी में आने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति क्या थी और अब कितनी संपत्ति अर्जित हो चुकी है? यदि सब कुछ नियम और कानून के दायरे में है तो फिर पारदर्शिता से जांच कराने में हिचक कैसी? जनता का कहना है कि शासन की योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचाने वाले विभाग में बैठे अधिकारियों की जीवनशैली और बढ़ती संपत्ति पर समय-समय पर निगरानी होना बेहद जरूरी है। राशन व्यवस्था, खाद्यान्न वितरण और सार्वजनिक आपूर्ति प्रणाली सीधे गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी की संपत्ति अचानक चर्चा का विषय बन जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। क्षेत्र में लोग खुलकर कह रहे हैं कि नौकरी से पहले आखिर पीयूष शुक्ला के पास कितनी जमीन, मकान, वाहन और बै...

पोड़ी कला बी केंद्र में गेहूं का अंबार, परिवहन न होने से किसान परेशान

 पोड़ी कला बी केंद्र में गेहूं का अंबार, परिवहन न होने से किसान परेशान कटनी  |  तहसील ढीमरखेड़ा के पोड़ी कला बी उपार्जन केंद्र में इन दिनों गेहूं की बंपर आवक तो हो रही है, लेकिन परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। केंद्र परिसर में गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है और समय पर उठाव नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी कर “अन्नदाता सम्मान” की बातें कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि खरीदी केंद्रों में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। पोड़ी कला बी केंद्र की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यवस्था खुद ही अपने बोझ तले दब गई हो। केंद्र में जगह-जगह गेहूं की बोरियों के पहाड़ खड़े हैं, लेकिन परिवहन के लिए न पर्याप्त ट्रक उपलब्ध हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि कई दिनों से उनका गेहूं केंद्र में रखा हुआ है, लेकिन उठाव न होने के कारण उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मौसम में हल्के बदलाव और आंधी-पानी की आशंका ने किसा...

कहीं भाजपा की सरकार को उठाना ना पड़ें इसका खामियाजा सरकार गिरने में नहीं लगेगी देर, अन्नदाता परेशान, कटनी में गोदामों का संकट, जबलपुर भेजा जा रहा गेहूं किसान हो रहे बेहाल कटनी का गेहूं जबलपुर में फेल, किसानों की मेहनत पर प्रशासनिक चोट, कहीं मिट्टी तो कहीं नमी का बहाना, कटनी के किसानों का गेहूं लगातार फेल, गोदाम नहीं, व्यवस्था नहीं ट्रकों में भरकर भटक रहा किसानों का गेहूं, कटनी के अन्नदाता परेशान, हर ट्रक में निकाली जा रही कमी, जबलपुर पहुंचते ही ‘फेल’ हो रहा कटनी का गेहूं, किसानों में भारी आक्रोश,कटनी का गेहूं जबलपुर रवाना, किसान बेहाल अन्नदाता लाइन में, व्यवस्था फाइल में

 कहीं भाजपा की सरकार को उठाना ना पड़ें इसका खामियाजा सरकार गिरने में नहीं लगेगी देर, अन्नदाता परेशान, कटनी में गोदामों का संकट, जबलपुर भेजा जा रहा गेहूं किसान हो रहे बेहाल कटनी का गेहूं जबलपुर में फेल, किसानों की मेहनत पर प्रशासनिक चोट, कहीं मिट्टी तो कहीं नमी का बहाना, कटनी के किसानों का गेहूं लगातार फेल, गोदाम नहीं, व्यवस्था नहीं ट्रकों में भरकर भटक रहा किसानों का गेहूं, कटनी के अन्नदाता परेशान, हर ट्रक में निकाली जा रही कमी, जबलपुर पहुंचते ही ‘फेल’ हो रहा कटनी का गेहूं, किसानों में भारी आक्रोश,कटनी का गेहूं जबलपुर रवाना, किसान बेहाल अन्नदाता लाइन में, व्यवस्था फाइल में कटनी  |  कटनी जिले में इस समय गेहूं खरीदी को लेकर जो हालात बने हुए हैं, उसने किसानों की मेहनत, उम्मीद और व्यवस्था तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों में पसीना बहाकर सुनहरा गेहूं उगाने वाले अन्नदाता आज खरीदी केंद्रों के बाहर धूल फांकने को मजबूर हैं। वजह सिर्फ एक कटनी जिले में पर्याप्त भंडारण व्यवस्था और गोदामों की कमी। आलम यह है कि जिले से गेहूं के ट्रक अब जबलपुर भेजे जा रहे हैं। किसान उम्मीद लेकर ट्रको...