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ग्रामीणों का बड़ा खुलासा, तालाब, नाले, निर्माण सब फर्जी, करोड़ों की राशि नौकरशाही ने हड़पी बहोरीबंद जनपद सीईओ 'बिहार बाबू' दीमक की तरह चाट रहे बरही ग्राम पंचायत को, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग विकास के नाम पर कागजी बाजीगरी

 ग्रामीणों का बड़ा खुलासा, तालाब, नाले, निर्माण सब फर्जी, करोड़ों की राशि नौकरशाही ने हड़पी बहोरीबंद जनपद सीईओ 'बिहार बाबू' दीमक की तरह चाट रहे बरही ग्राम पंचायत को, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग विकास के नाम पर कागजी बाजीगरी



कटनी  |  सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट जारी करती हैं। मनरेगा, पंचायती राज निधि, और 15 वें वित्त आयोग जैसी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में पानी, सड़क, और रोजगार की व्यवस्था करना है। लेकिन जब व्यवस्था को सुधारने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही भक्षक बन जाएं, तो विकास सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह जाता है। ऐसा ही एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला कटनी जिले के बहोरीबंद जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरही से सामने आया है। यहाँ के ग्रामीणों ने एक सुर में स्थानीय नौकरशाही के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बरही ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये का महाघोटाला हुआ है। धरातल पर जहां धूल उड़ रही है, वहीं सरकारी दस्तावेजों में तालाब खोदे जा चुके हैं, नालियां बन चुकी हैं और निर्माण कार्य भी पूरे दिखाए जा चुके हैं। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड किसी और को नहीं, बल्कि बहोरीबंद जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को बताया जा रहा है, जिन्हें ग्रामीण तंजिया लहजे में 'बिहार बाबू' कहकर पुकारते हैं।

*'बिहार बाबू' और तकनीकी टीम की त्रिमूर्ति दीमक की तरह खोखला होता तंत्र*

ग्रामीणों का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि बहोरीबंद जनपद सीईओ 'बिहार बाबू' बरही ग्राम पंचायत को दीमक की तरह चाट रहे हैं। उनके इस भ्रष्टाचार के साम्राज्य को मजबूती देने का काम क्षेत्र के उपयंत्री (सब-इंजीनियर) और सहायक यंत्री (असिस्टेंट इंजीनियर) कर रहे हैं। जब तक तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक फूटी कौड़ी भी जारी नहीं हो सकती। उपयंत्री और सहायक यंत्री बिना साइट पर जाए, कमरों में बैठकर फर्जी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करते हैं और सीईओ साहब उस पर अपनी अंतिम मुहर लगाकर राशि आहरित कर लेते हैं।आक्रोशित ग्रामीण, बरही

यह एक ऐसा संगठित भ्रष्टाचार है जिसमें ऊपर से लेकर नीचे तक की पूरी कतरन शामिल है।ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे किसी निर्माण कार्य की शिकायत लेकर जनपद कार्यालय जाते हैं, तो उन्हें डरा-धमका कर भगा दिया जाता है या फिर जांच का ऐसा खोखला आश्वासन दिया जाता है जो कभी धरातल पर नहीं उतरता। बरही ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का जो ढर्रा अपनाया गया है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

 *कलेक्टर खुद ग्राम पंचायत बरही से का करे दौरा और देखे काम*

 जांच टीम में बहोरीबंद जनपद का कोई भी अधिकारी शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि 'बिहार बाबू' और उनके अधीनस्थ इंजीनियर खुद इस घोटाले में संलिप्त हैं। जांच किसी अन्य विकासखंड या जिला स्तर के निष्पक्ष अधिकारियों से कराई जाए। अधिकारी खुद बरही गांव के खेतों और रास्तों पर आएं, और कागजों में दर्ज तालाबों व नालों का भौतिक सत्यापन करें।

*रिकवरी और एफआईआर*

 दोषी जनपद सीईओ, उपयंत्री, सहायक यंत्री और संबंधित सरपंच-सचिव के खिलाफ गबन का मामला दर्ज कर उनकी व्यक्तिगत संपत्ति से सरकारी पैसे की रिकवरी की जाए। यदि इसकी निष्पक्षता से परत-दर-परत जांच की जाए, तो पूरे जनपद में भ्रष्टाचार का एक ऐसा गठजोड़ सामने आ सकता है जो सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।अब पूरी नजरें जिला कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या बरही के ग्रामीणों को न्याय मिलेगा? क्या 'बिहार बाबू' और भ्रष्ट इंजीनियरों की तिकड़ी सलाखों के पीछे जाएगी? या फिर हमेशा की तरह फाइलें ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएंगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

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