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वर्दी ही नहीं हमदर्दी भी, ढीमरखेड़ा पुलिस का मानवीय चेहरा, विजेंद्र तिवारी बने बुजुर्ग का सहारा

 वर्दी ही नहीं हमदर्दी भी, ढीमरखेड़ा पुलिस का मानवीय चेहरा, विजेंद्र तिवारी बने बुजुर्ग का सहारा



ढीमरखेड़ा  |  कटनी जिले के ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो पुलिस की पारंपरिक छवि को पीछे छोड़ते हुए संवेदनशीलता और इंसानियत की नई मिसाल पेश करती है । अक्सर सख्ती और कानून के पालन के लिए पहचानी जाने वाली वर्दी, इस बार ममता और सहारे का प्रतीक बन गई । मामला एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला का है, जो थाना ढीमरखेड़ा के बाहर अपने घर रामपुर जाने के लिए बेबस खड़ी थी। न साधन, न सहारा उम्र और मजबूरी ने उन्हें सड़क किनारे रोक दिया था।तभी वहां तैनात पुलिसकर्मी विजेंद्र तिवारी की नजर उन पर पड़ी। हालात समझते देर नहीं लगी, और फिर जो हुआ, उसने “पुलिस” शब्द के मायने ही बदल दिए । विजेंद्र तिवारी ने केवल ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि इंसानियत का फर्ज निभाया।उन्होंने उस बुजुर्ग महिला को अपना समझते हुए, बेटे की तरह जिम्मेदारी उठाई और सुरक्षित उनके घर रामपुर तक पहुंचाया । यह सिर्फ एक मदद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश है वर्दी में भी दिल धड़कता है, गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब विजेंद्र तिवारी ने ऐसा मानवीय चेहरा दिखाया हो ।  इससे पहले भी वे कई लोगों की जान बचाने और संकट में सहयोग करने के लिए जाने जाते रहे हैं ।  उनका यह निरंतर व्यवहार बताता है कि सेवा उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जुनून है । इस पूरी घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं । लोग खुले दिल से पुलिसकर्मी की सराहना कर रहे हैं और ढीमरखेड़ा पुलिस की इस पहल को सलाम कर रहे हैं, उल्लेखनीय हैं कि आज के दौर में जब पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठते रहते हैं, ऐसे उदाहरण उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं।यह घटना बताती है कि सिस्टम के भीतर संवेदनशील लोग मौजूद हैं, जो न केवल कानून के रक्षक हैं बल्कि समाज के सच्चे सेवक भी हैं। जरूरत है ऐसे कर्मियों को पहचानने और प्रोत्साहित करने की, ताकि खाकी का मान और बढ़े क्योंकि वर्दी की असली ताकत उसकी सख्ती में नहीं, उसकी इंसानियत में होती है ।

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