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अग्नि की तरह ज्वाला रखने वाली समाज, जिनके मंत्रों से भगवान भी बंध जाते हैं ऐसी समाज की निकली शोभायात्रा, उमरियापान में भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर भव्य आयोजन, शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

 अग्नि की तरह ज्वाला रखने वाली समाज, जिनके मंत्रों से भगवान भी बंध जाते हैं ऐसी समाज की निकली शोभायात्रा, उमरियापान में भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर भव्य आयोजन, शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब



ढीमरखेड़ा ।  ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर उमरियापान स्थित बड़ी माई परिसर में एक भव्य एवं धार्मिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज की एकजुटता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत बड़ी माई मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जहां भगवान परशुराम जी का स्मरण करते हुए समाज के वरिष्ठजनों और संतों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आयोजन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो बड़ी माई से प्रारंभ होकर उमरियापान के कटराबाजार सहित प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः बड़ी माई में आकर सम्पन्न हुई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरे मार्ग में भगवान परशुराम जी के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जिससे आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ गई। इस दौरान विभिन्न आकर्षक झांकियां भी शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रहीं ।  राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी ने लोगों का मन मोह लिया, वहीं भगवान परशुराम जी की झांकी ने श्रद्धालुओं को धर्म और पराक्रम की प्रेरणा दी।संत ब्रम्हानंद जी महाराज की झांकी भी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें आध्यात्मिकता और संत परंपरा का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में परम पूज्य जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक दिव्यता प्रदान की।उन्होंने अपने उद्बोधन में भगवान परशुराम जी के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परशुराम जी केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रतीक भी हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि हम सभी को उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए समाज में सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना के लिए कार्य करना चाहिए। शोभायात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह ब्राह्मण समाज के लोगों के लिए जलपान की विशेष व्यवस्था की गई थी ।  विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्प वर्षा और शीतल पेय पदार्थों से किया गया ।  गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने विशेष रूप से पेयजल और ठंडाई की व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े । कार्यक्रम के समापन पर बड़ी माई परिसर में सामूहिक भोजन (भंडारा) का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया ।  यह भंडारा सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक बना, जहां सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया । आयोजन समिति द्वारा भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया था। इस आयोजन में समाज के कई प्रमुख व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रमुख रूप से विजय दुबे, पद्मेश गौतम, प्रमोद गौतम, मनोज मिश्रा, उमेश पाण्डेय, गंगा मिश्रा (स्लीमनाबाद), सुनीता संतोष दुबे, दिलीप बाजपेई, अजीत पाण्डेय, संजय पाण्डेय, सतीश गौतम, अश्वनी शुक्ला, विवेक गौतम, रोशन दीक्षित, शैलेन्द्र पौराणिक, रमन शुक्ला, दीनदयाल त्रिपाठी, बसंत गर्ग सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। इन सभी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज के युवाओं ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने शोभायात्रा की व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, जलपान वितरण और मंच संचालन जैसी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। महिलाओं की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और झांकियों की सजावट में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया था।स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों के सहयोग से पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए गए।भगवान परशुराम जन्मोत्सव के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी कार्य किया । इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों, श्रद्धालुओं और समाज के लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजनों को और अधिक भव्य रूप में आयोजित करने का संकल्प लिया। उमरियापान में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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