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रेताचोर बने नेता, रेता चोरी के लिए कर रहे नेतागिरी, पुलिसिया वर्दी भी हो रही दाग़दार नए थाना प्रभारी आते ही बढ़ जाती है ‘महीने’ की रफ्तार, नए थाना प्रभारी आते हैं तो होती हैं कार्यवाही ताकि महीने का रेट थोड़ी तेज हो जाए पुराने रेट को बढ़ाने का चलता हैं कार्य, अतिक्रमण और कब्जों के खेल में नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल

 रेताचोर बने नेता, रेता चोरी के लिए कर रहे नेतागिरी, पुलिसिया वर्दी भी हो रही दाग़दार नए थाना प्रभारी आते ही बढ़ जाती है ‘महीने’ की रफ्तार, नए थाना प्रभारी आते हैं तो होती हैं कार्यवाही ताकि महीने का रेट थोड़ी तेज हो जाए पुराने रेट को बढ़ाने का चलता हैं कार्य, अतिक्रमण और कब्जों के खेल में नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल



कटनी  |  क्षेत्र में इन दिनों रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो लोग कभी रेत की चोरी के आरोपों में घिरे रहते थे, वही अब खुद को नेता बताकर पूरे अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं। हालात यह हैं कि अवैध रेत उत्खनन के इस खेल में कुछ कथित नेताओं की भूमिका इतनी मजबूत हो गई है कि प्रशासनिक कार्रवाई भी अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र की नदियों और घाटों से रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों के जरिए रेत को बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी रोकथाम देखने को नहीं मिल रही। आरोप यह भी है कि इस पूरे खेल में कुछ नेताओं और उनके समर्थकों की सीधी भूमिका है, जो अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।

*रेत चोरी से नेतागिरी तक का सफर*

क्षेत्र में चर्चा है कि कई ऐसे लोग, जो पहले रेत चोरी के मामलों में चर्चित रहे, आज खुद को जनता का प्रतिनिधि या नेता बताकर खुलेआम प्रभाव दिखा रहे हैं।बताया जाता है कि इन लोगों ने अवैध खनन के जरिए आर्थिक ताकत हासिल की और अब उसी ताकत के बल पर स्थानीय राजनीति में दखल दे रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे लोग प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने का भी प्रयास करते हैं। कई बार शिकायतें होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती या फिर कुछ दिनों के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि अवैध खनन के पीछे मजबूत संरक्षण मौजूद है।

*नए थाना प्रभारी और ‘महीने’ की चर्चा*

क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब भी किसी थाने में नया थाना प्रभारी पदस्थ होता है, तो शुरुआती दिनों में कुछ सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है। अवैध रेत परिवहन करने वाले वाहनों को पकड़ा जाता है और कुछ दिनों तक सख्ती दिखाई जाती है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि धीरे-धीरे यह सख्ती कम हो जाती है और फिर सब कुछ पहले जैसा ही चलने लगता है।लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल कथित तौर पर ‘महीने’ की व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। यानी अवैध कारोबार से जुड़े लोग तय रकम देकर बिना रोक-टोक अपना काम जारी रखते हैं।

*अतिक्रमण और कब्जों का भी बढ़ रहा खेल*

रेत के अवैध कारोबार के साथ-साथ क्षेत्र में अतिक्रमण और कब्जों का मुद्दा भी तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ नेता और उनके समर्थक सरकारी जमीनों या खाली पड़ी जमीनों पर कब्जा करवाने में भी आगे रहते हैं। कई जगहों पर सड़क किनारे, नालों के आसपास और सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण देखे जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति ऐसा करता है तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन जब प्रभावशाली लोगों की बात आती है तो कार्रवाई धीमी पड़ जाती है।

*जनता के सेवक या मालिक*

लोकतंत्र में नेताओं को जनता का सेवक माना जाता है, लेकिन क्षेत्र में कुछ मामलों को देखकर लोगों में यह भावना बन रही है कि कई नेता खुद को जनता का मालिक समझने लगे हैं।शिकायत करने वाले लोगों को कभी-कभी दबाव या धमकी का भी सामना करना पड़ता है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अवैध खनन या अतिक्रमण की शिकायत करता है तो उसे अलग-अलग तरीकों से चुप कराने की कोशिश की जाती है।इससे लोगों में भय का माहौल बन रहा है और कई लोग खुलकर शिकायत करने से भी बचते हैं।

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