लाड़ली बहनों पर बरसी कृपा, रोजगार सहायकों की जेब में ‘सूखा’ तीन महीने से वेतन गायब
कटनी | मध्यप्रदेश में इन दिनों योजनाओं की बरसात हो रही है, खासकर लाड़ली बहनों के खातों में, सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ हर महीने पैसा पहुंचा रही है, ताकि बहनों के चेहरे पर मुस्कान बनी रहे। लेकिन इसी संवेदनशील व्यवस्था के दूसरे कोने में खड़े रोजगार सहायकों की हालत कुछ ऐसी है, जैसे शादी में बुलाए तो गए हों, पर खाना परोसने की बारी ही न आई हो, तीन महीने से वेतन का इंतजार कर रहे रोजगार सहायकों की जेब अब ‘आत्मनिर्भर’ हो चुकी है खाली रहने में पूरी तरह सक्षम । काम पूरे जोश से लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान के नाम पर ‘धैर्य रखिए’ का बोनस जरूर मिल रहा है । ग्रामीण स्तर पर योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले यही कर्मचारी अब खुद जमीन पर आ चुके हैं कभी कार्यालय के चक्कर, तो कभी अधिकारियों के दरवाजे। जवाब हर जगह लगभग एक जैसा फाइल चल रही है। लगता है फाइल इतनी दूर निकल गई है कि वापस आने का रास्ता ही भूल गई। रोजगार सहायकों में अब आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि अगर यही हाल रहा तो वे भी किसी योजना का हिस्सा बनने की सोच सकते हैं शायद “लाड़ले कर्मचारी योजना” शुरू हो जाए, जिसमें कम से कम समय पर वेतन मिलने की गारंटी तो हो । फिलहाल हालात यह हैं कि सरकार की प्राथमिकता सूची में कर्मचारी शायद ‘वेटिंग लिस्ट’ में हैं, जबकि योजनाएं ‘वीआईपी पास’ लेकर आगे बढ़ रही हैं। अब देखना यह है कि रोजगार सहायकों की यह नाराजगी कब तक ‘धैर्य’ में बदलती है या फिर किसी बड़े विरोध का रूप लेती है।

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