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मंदिर नहीं, भारत बने महान विरासत बचाने और राष्ट्र गढ़ने की पुकार, कुपुत्र बेचता है विरासत, सुपुत्र बनाता है भारत मंदिर नहीं, देश बने महान ईंट-पत्थर के मंदिर नहीं, भारत को मंदिर बनाने की जरूरत संपत्ति लुटाने वाले नहीं, राष्ट्र सजाने वाले सुपुत्र चाहिए मंदिर बनाना आसान, भारत को महान बनाना असली तपस्या जो बेच दे विरासत वो कुपुत्र, जो गढ़ दे भारत वो सच्चा सुपुत्र धर्मस्थल से पहले राष्ट्रस्थल भारत ही बने सबसे बड़ा मंदिर विरासत बचाओ, भारत सजाओ यही है असली राष्ट्रभक्ति सुपुत्र वही जो देश को ऊँचा उठाए, केवल पत्थर नहीं भविष्य गढ़ जाए

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कटनी |  कुपुत्र बेचता है विरासत, सुपुत्र बनाता है भारत” इन पंक्तियों के साथ क्षेत्र में एक विचारधारा तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का कहना है कि केवल ईंट-पत्थर के मंदिरों का निर्माण ही विकास नहीं है, बल्कि पूरे भारत को एक सशक्त, समृद्ध और संस्कारित राष्ट्र के रूप में गढ़ना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। 

*विरासत बचाने की जरूरत*

देश की ऐतिहासिक धरोहरें, सांस्कृतिक मूल्य और सामाजिक एकता हमारी असली संपत्ति हैं। जानकारों का मानना है कि जब विरासत को बचाने के बजाय उसे नष्ट या बेचने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तब समाज कमजोर होता है। जो बेच दे विरासत वो कुपुत्र, जो गढ़ दे भारत वो सच्चा सुपुत्र यह संदेश युवाओं के बीच तेजी से फैल रहा है। इतिहासकारों का कहना है कि भारत की पहचान केवल धार्मिक स्थलों से नहीं, बल्कि उसकी विविधता, शिक्षा, विज्ञान, कृषि, उद्योग और नैतिक मूल्यों से भी बनती है।

*राष्ट्र निर्माण ही असली तपस्या*

सामाजिक चिंतकों के अनुसार मंदिर बनाना आसान है, लेकिन भारत को महान बनाना असली तपस्या है। राष्ट्र निर्माण का अर्थ है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा रोजगार के अवसर भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था मजबूत पंचायत से संसद तक पारदर्शिता।

*महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना*

जब देश का हर नागरिक अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देता है, तभी भारत सच्चे अर्थों में सबसे बड़ा मंदिर” बन सकता है।धर्मस्थल से पहले राष्ट्रस्थल विशेषज्ञों का कहना है कि धर्मस्थल समाज को आध्यात्मिक शक्ति देते हैं, लेकिन राष्ट्रस्थल समाज को अस्तित्व और सम्मान देता है।यदि देश सुरक्षित, समृद्ध और शिक्षित होगा, तो धर्म भी सुरक्षित रहेगा। युवाओं से अपील की जा रही है कि वे केवल नारों तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा, सेवा और नवाचार के माध्यम से देश को ऊँचा उठाने में योगदान दें। पत्थर नहीं, भविष्य गढ़ने की सोच सुपुत्र वही जो देश को ऊँचा उठाए, केवल पत्थर नहीं भविष्य गढ़ जाए यह विचार अब एक अभियान का रूप लेता दिख रहा है। समाजसेवियों का कहना है कि अगर हर नागरिक ईमानदारी से अपना कार्य करे, तो भारत को महान बनने से कोई नहीं रोक सकता। विरासत बचाओ, भारत सजाओ यही है असली राष्ट्रभक्ति। आज जरूरत है ऐसे सुपुत्रों की, जो संपत्ति लुटाने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र सजाने वाले बनें। मंदिरों के साथ-साथ भारत को भी एक आदर्श राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

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