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ढीमरखेड़ा में तहसीलदार रहते हुए जमकर बटोरी सुर्खियां अब पहुंच गई रीठी, रीठी तहसील में प्रभारी तहसीलदार की पुनर्नियुक्ति पर विवाद, ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च अधिकारियों तक पहुंच हैं लगता हैं मैडम की, जहां लगी थी शिकायत की झड़ी वही पहुंच गई मैडम, चाई - माई घुमा रहा प्रशासन

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कटनी  |  कटनी जिले की रीठी तहसील एक बार फिर प्रशासनिक फैसले को लेकर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। लंबे समय तक यहां पदस्थ रहीं तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया को पूर्व में ग्रामीणों की शिकायतों के बाद हटाया गया था, लेकिन अब जिला प्रशासन द्वारा उन्हें पुनः रीठी का प्रभारी तहसीलदार बनाए जाने के आदेश ने क्षेत्र में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। शनिवार को आशीष तिवारी, कलेक्टर, कटनी द्वारा जारी आदेश में प्रशासकीय एवं कार्यालयीन कार्य सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान में ढीमरखेड़ा की प्रभारी तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया को रीठी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। आदेश के सार्वजनिक होते ही क्षेत्र में चर्चाओं और विरोध का दौर शुरू हो गया।

*पहले शिकायतें, फिर तबादला, अब दोबारा जिम्मेदारी*

ग्रामीणों का कहना है कि जब आकांक्षा चौरसिया पहले रीठी में पदस्थ थीं, तब राजस्व संबंधी कार्यों को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामलों में अनावश्यक देरी, आम लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की मजबूरी और कथित तौर पर बिचौलियों की सक्रियता को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए थे। लगातार विरोध और शिकायतों के बाद प्रशासन ने उनका तबादला अन्यत्र कर दिया था। उस समय क्षेत्र के लोगों ने राहत महसूस की थी और उम्मीद जताई थी कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। लेकिन अब उन्हें पुनः रीठी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी फिर उभर आई है।

*अवैध गतिविधियों को लेकर आशंका*

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान रीठी क्षेत्र में फर्जी कॉलोनियों, अवैध पत्थर खदानों और शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों की गतिविधियां बढ़ी थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूर्व जैसी स्थिति दोबारा बनी तो अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के कार्यों में बिचौलियों की भूमिका बढ़ गई थी, जिससे आम जनता को सीधे राहत नहीं मिल पा रही थी। लोगों का कहना है कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में पारदर्शिता और समयबद्धता की कमी से आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होता है।

*प्रशासन का पक्ष*

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय केवल प्रशासकीय और कार्यालयीन कार्य सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, तहसील स्तर पर अधिकारियों की कमी और लंबित प्रकरणों के निपटारे को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। प्रशासन का मानना है कि अनुभवी अधिकारी होने के कारण आकांक्षा चौरसिया लंबित मामलों के त्वरित निराकरण में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। प्रशासनिक सूत्रों का यह भी कहना है कि अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था अस्थायी हो सकती है और स्थिति की समीक्षा के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

*ज्ञापन और आंदोलन की तैयारी*

रीठी क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और ग्राम प्रतिनिधियों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जल्द ही जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे और आदेश पर पुनर्विचार की मांग करेंगे। कुछ ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे शांतिपूर्ण धरना या आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

*राजस्व व्यवस्था पर फिर उठे सवाल*

रीठी तहसील क्षेत्र लंबे समय से राजस्व विवादों और अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा स्वाभाविक है। जानकारों का मानना है कि यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल को लेकर पहले से असंतोष रहा हो, तो उसी स्थान पर पुनः पदस्थापना से प्रशासन की छवि पर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।हालांकि अंतिम निर्णय जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभावनाओं को भी महत्व दिया जाता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों को किस प्रकार लेता है क्या आदेश में संशोधन होगा या वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी।फिलहाल रीठी तहसील में इस प्रशासनिक निर्णय को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और ग्रामीणों में रोष बना हुआ है।आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है।

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