43 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद सहायक अध्यापक जीवन लाल बागरी सेवानिवृत्त, विदाई समारोह में उमड़ा सम्मान और स्नेह
43 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद सहायक अध्यापक जीवन लाल बागरी सेवानिवृत्त, विदाई समारोह में उमड़ा सम्मान और स्नेह
कटनी | कटनी जिले के सिलौंडी स्थित शासकीय कन्या हाई स्कूल में उस समय भावुक और गरिमामय माहौल देखने को मिला, जब विद्यालय के वरिष्ठ सहायक अध्यापक जीवन लाल बागरी ने शिक्षा विभाग में 43 वर्षों की लंबी, समर्पित और प्रेरणादायी सेवा पूर्ण कर औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति ग्रहण की। विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य विदाई समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और क्षेत्रीय नागरिकों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। सभी ने एक स्वर में उनके कार्यकाल को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।
जीवन लाल बागरी ने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत ऐसे समय में की थी, जब ग्रामीण अंचलों में संसाधनों की कमी के बावजूद शिक्षा के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा आधार था। उन्होंने न केवल शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन किया, बल्कि छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा और सामाजिक चेतना के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय की कई पीढ़ियों ने उनके मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में सफलता अर्जित की है। उनके छात्र आज प्रशासन, शिक्षा, पुलिस, सेना और निजी क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, जो उनके शिक्षण की गुणवत्ता और व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है।
विदाई समारोह के मुख्य अतिथि बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन लाल बागरी जैसे शिक्षक किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि वह समाज के भविष्य को गढ़ता है। विधायक ने बागरी के 43 वर्षों के योगदान को ‘एक युग की सेवा’ बताते हुए उन्हें स्वस्थ और सुखद सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं दीं। अपने जन्मदिन के अवसर पर विधायक ने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे शाला को दान देकर शाला विकास में योगदान दें, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा में किया गया दान सबसे पवित्र और स्थायी निवेश होता है।
मंडल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी ने कहा कि जीवन लाल बागरी ने सदैव अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दी और विद्यालय को परिवार की तरह समझा। उन्होंने छात्राओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और संस्कारों का संचार किया। पूर्व सरपंच डॉ. मनमोहन राय ने अपने वक्तव्य में कहा कि बागरी की पहचान केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी रही है। वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक आयोजनों, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे।
वर्तमान सरपंच अनिल सिंह बागरी ने कहा कि सिलौंडी क्षेत्र को जीवन लाल बागरी जैसे शिक्षक पर गर्व है। उन्होंने विद्यालय के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समय-समय पर प्रशासन से संवाद कर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का प्रयास किया। शिक्षक संघ के सदस्यों ने भी उन्हें एक आदर्श सहयोगी बताते हुए कहा कि उन्होंने सदैव टीम भावना के साथ कार्य किया और नए शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान किया।
संकुल प्राचार्य चंद्रकुमार परमार ने कहा कि बागरी का कार्यकाल अनुशासन, समयपालन और ईमानदारी का उदाहरण रहा है। उन्होंने छात्राओं को केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए प्रेरित नहीं किया, बल्कि उन्हें जीवन मूल्यों से भी परिचित कराया। विद्यालय के प्राचार्य विशाल वरकड़े ने कहा कि जीवन लाल बागरी ने बदलते समय के साथ स्वयं को भी अद्यतन रखा और नई शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाकर छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी। जनशिक्षक संतोष बर्मन ने कहा कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यालय परिवार को सदैव लाभ मिला है।
समारोह के दौरान चौकी प्रभारी अनिल पांडे, रजनीकांत राय, अन्नू पाल, सचिव कुंज बिहारी, तुलसी नामदेव, प्रह्लाद राय, श्याम नारायण राय और आरक्षक राम सेवक विश्वकर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्राएं भी समारोह में शामिल हुईं। छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर अपने प्रिय शिक्षक को सम्मान अर्पित किया। कई छात्राओं की आंखें नम दिखीं, जो इस बात का प्रमाण थीं कि जीवन लाल बागरी ने केवल कक्षा में पढ़ाया ही नहीं, बल्कि छात्राओं के हृदय में विशेष स्थान भी बनाया।
अपने विदाई भाषण में जीवन लाल बागरी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि विद्यालय उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार रहा है। उन्होंने अपने सहकर्मियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी उसके विद्यार्थी होते हैं और जब विद्यार्थी जीवन में सफल होते हैं, तो वही शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। उन्होंने युवा शिक्षकों से आग्रह किया कि वे शिक्षा को केवल नौकरी न समझें, बल्कि इसे समाज निर्माण का माध्यम मानकर कार्य करें।
समारोह में उन्हें शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से उनके दीर्घ, स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
जीवन लाल बागरी की सेवानिवृत्ति केवल एक व्यक्ति का सेवा अवसान नहीं, बल्कि एक युग का समापन प्रतीत हुआ। 43 वर्षों की यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और आदर्शों से भरी रही। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सीमित संसाधनों में भी यदि निष्ठा और लगन हो, तो शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
आज जब शिक्षा व्यवस्था अनेक चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे में जीवन लाल बागरी जैसे शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार और जीवन दृष्टि भी प्रदान करे। सिलौंडी शासकीय कन्या हाई स्कूल की दीवारें, कक्षाएं और परिसर आने वाले वर्षों तक उनके योगदान की गवाही देते रहेंगे।
उनकी विदाई के साथ ही विद्यालय परिवार ने यह संकल्प भी लिया कि उनके आदर्शों पर चलते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाएगा। जीवन लाल बागरी का नाम क्षेत्र के शिक्षा इतिहास में सदैव सम्मान के साथ लिया जाता हैं।

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