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भाजपा शासन में लाड़ली बहना परेशान, नेताओं का गढ़ सिलौड़ी अपनी समस्या पर बहा रहा आंसू बस स्टैंड पर प्रसाधन न होने से महिलाएं और छात्राएं रोज हो रहीं शर्मिंदा

 भाजपा शासन में लाड़ली बहना परेशान, नेताओं का गढ़ सिलौड़ी अपनी समस्या पर बहा रहा आंसू बस स्टैंड पर प्रसाधन न होने से महिलाएं और छात्राएं रोज हो रहीं शर्मिंदा



कटनी ।  एक ओर सरकार महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए बड़े-बड़े अभियान चला रही है, “लाड़ली बहना” जैसी योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है और हर साल 8 मार्च को विश्व महिला दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। क्षेत्र के नेताओं का गढ़ कहे जाने वाले ग्राम सिलौड़ी में मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने महिलाओं और बालिकाओं को भारी परेशानी में डाल दिया है। ग्राम सिलौड़ी का सबसे बड़ा बस स्टैंड आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, छात्राएं और यात्री बसों का इंतजार करते हैं, लेकिन बस स्टैंड पर प्रसाधन (शौचालय) की व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं और बालिकाओं को बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें सड़क किनारे या आसपास खुले में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रही महिलाओं और कॉलेज की छात्राओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिला सम्मान की बातें तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब सबसे बड़े बस स्टैंड पर ही महिलाओं के लिए प्रसाधन की व्यवस्था नहीं है तो फिर महिला दिवस मनाने का क्या मतलब रह जाता है। स्थानीय यात्रियों ने बताया कि वर्ष 2016 में सिलौड़ी में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बस स्टैंड सहित कई विकास कार्यों की घोषणा की थी।ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित होंगी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सिलौड़ी क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों का प्रभाव रहा है। इसके बावजूद गांव में विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। विडंबना यह भी है कि क्षेत्र में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या भी अधिक है और प्रशासन में भी प्रमुख पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं, फिर भी महिलाओं की इस मूलभूत समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव में विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जब वास्तविक समस्याओं के समाधान की बात आती है तो वही नेता मौन साध लेते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि सिलौड़ी बस स्टैंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण यातायात केंद्र है, जहां आसपास के कई गांवों के लोग आते-जाते हैं। ऐसे में यहां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को उजागर करता है। महिलाओं और छात्राओं ने मांग की है कि बस स्टैंड में जल्द से जल्द प्रसाधन की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें रोजाना होने वाली परेशानी और शर्मिंदगी से राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले ऐसी मूलभूत समस्याओं का समाधान होना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि गांव और क्षेत्र के विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों को पहले अपने ही क्षेत्र की समस्याओं की ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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