खौफ में कैद लोकतंत्र, जनता चुप तो तानाशाह मजबूत
कटनी | जब तक जनता के दिलों में डर जिंदा है, तब तक सत्ता का सिंहासन भी सुरक्षित है। इतिहास गवाह है कि हुकूमतें हमेशा जनता को खौफ में रखकर राज करना चाहती हैं, क्योंकि डर ही उनकी सबसे बड़ी ढाल होता है। लेकिन जिस दिन आम आदमी डर का चश्मा उतारकर सच देखने लगता है, उसी दिन बदलाव की आंधी उठती है। आज हालात यह हैं कि अन्याय, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद लोग चुप्पी साधे बैठे हैं। यही चुप्पी ताकतवरों को और बेलगाम बना रही है। सवाल यह है कि क्या जनता हमेशा खामोश रहेगी या अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएगी? इतिहास ने हमेशा साबित किया है कि परिवर्तन डरपोक लोगों ने नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले बागियों ने लिखा है। अगर आज भी लोग डर के कारण अन्याय के सामने घुटने टेकते रहे, तो आने वाली पीढ़ियां जरूर सवाल करेंगी कि जब अन्याय हो रहा था तब आवाज क्यों नहीं उठी। समय आ गया है कि जनता अपने अधिकार पहचाने और खौफ की जंजीरों को तोड़े। क्योंकि जिस दिन डर खत्म होगा, उसी दिन बदलाव की शुरुआत भी तय हो सकती हैं।

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