सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

म.प्र. पुलिस में कार्यवाहक पदोन्नति पर 'ब्रेक', सिपाही से इंस्पेक्टर तक हजारों कर्मचारी कतार में

 म.प्र. पुलिस में कार्यवाहक पदोन्नति पर 'ब्रेक', सिपाही से इंस्पेक्टर तक हजारों कर्मचारी कतार में



भोपाल |  मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पिछले एक साल से कार्यवाहक पदोन्नति की प्रक्रिया ठप होने के कारण एक बड़ा प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के हजारों पुलिसकर्मी पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं, जिससे न केवल उनका मनोबल गिर रहा है, बल्कि फील्ड मैनेजमेंट पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

*2015 बैच का बढ़ा इंतजार*

सबसे अधिक प्रभावित 2015 बैच के सूबेदार और उपनिरीक्षक (SI) संवर्ग के अधिकारी हैं। इस बैच के अधिकारियों ने अपनी सेवा के 11 साल पूरे कर लिए हैं और वे नियमानुसार पदोन्नति के पात्र हैं। बताया जा रहा है कि इन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही 'कार्यवाहक इंस्पेक्टर' बनाया जाना था, लेकिन प्रक्रिया रुकने से मामला अधर में लटका है। इस संबंध में अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में डीजीपी कैलाश मकवाणा से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई है।

*क्यों बढ़ रही है परेशानी?*

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पदोन्नति रुकने के चार मुख्य कारण और प्रभाव सामने आए हैं:

* *अतिरिक्त काम का बोझ:* रिक्त पदों के कारण मौजूदा अफसरों पर जिम्मेदारी का दबाव बढ़ गया है।

* *करियर ग्रोथ में बाधा*: साल भर से पदोन्नति न मिलने से कर्मचारियों की करियर श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।

* *मनोबल पर असर:* विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे इंतजार से स्टाफ में असंतोष पनप रहा है, जो कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।

* *ऑपरेशनल चुनौतियां:* अधिकारियों की कमी से फील्ड मैनेजमेंट और कानून व्यवस्था के प्रबंधन में दिक्कतें आ रही हैं।

*क्या है विवाद की जड़?*

पदोन्नति नियमों को लेकर वर्ष 2005 से 2025 तक का मामला फिलहाल माननीय हाईकोर्ट में लंबित है। इसी कानूनी पेच के कारण पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने कार्यवाहक पदोन्नति पर रोक लगा दी है। गौर करने वाली बात यह है कि राजस्व, आबकारी और प्रशासनिक जैसे अन्य विभागों में कार्यवाहक पदोन्नति की प्रक्रिया वर्तमान में भी जारी है।

*एक नजर में: कार्यवाहक पदोन्नति के नियम*

* *उद्देश्य*: किसी पद के खाली होने पर अस्थाई रूप से उच्च पद का प्रभार देना ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

* *चयन का आधार:* वरिष्ठता और विभागीय पात्रता।

* *शर्तें:* तय सेवाकाल पूरा होना अनिवार्य है और कोई गंभीर विभागीय जांच लंबित नहीं होनी चाहिए।


*इन पदों पर मिलती है पदोन्नति:*

* सिपाही से प्रधान आरक्षक (Head Constable)

* प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (ASI)

* सहायक उपनिरीक्षक से उपनिरीक्षक (SI)

* उपनिरीक्षक से निरीक्षक (Inspector)


अब सबकी नजरें शासन के फैसले या हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं। यदि जल्द ही कोई रास्ता नहीं निकाला गया, तो रिक्त पदों का बोझ पुलिस व्यवस्था की कमर तोड़ सकता है।

टिप्पणियाँ

popular post

जनपद पंचायत भवन निर्माण का औचक निरीक्षण, कार्य की गुणवत्ता पर दिया जोर, संतोष दुबे, राहुल दुबे, अनिल बागरी तीनों शेर ने पहुंचकर देखा निर्माण कार्य

 जनपद पंचायत भवन निर्माण का औचक निरीक्षण, कार्य की गुणवत्ता पर दिया जोर, संतोष दुबे, राहुल दुबे, अनिल बागरी तीनों शेर ने पहुंचकर देखा निर्माण कार्य  ढीमरखेड़ा ।  जनपद पंचायत क्षेत्र में निर्माणाधीन जनपद पंचायत भवन का औचक निरीक्षण जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया। यह भवन जनपद अध्यक्ष सुनीता संतोष दुबे की पहल और सतत प्रयासों से तैयार किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। निरीक्षण के दौरान संतोष दुबे, राहुल दुबे एवं अनिल बागरी ने निर्माण कार्य का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की गति और तकनीकी मानकों की जानकारी ली। साथ ही संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को निर्देश दिए कि कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हो तथा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह भवन क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा और आमजन को एक ही स्थान पर विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य में लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।स्...

पाँच माह से बिना वेतन काम कर रहे रोजगार सहायक व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल

 पाँच माह से बिना वेतन काम कर रहे रोजगार सहायक व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल कटनी  |  ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले रोजगार सहायकों की स्थिति एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायकों द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ज्ञापन के अनुसार, दिनांक 29 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय रोजगार सहायकों ने मजबूरी में लिया है। कारण स्पष्ट है पिछले लगभग पाँच महीनों से उन्हें वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। विडंबना यह है कि ये वही कर्मचारी हैं जो निरंतर शासन की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करते हैं, लेकिन उनकी अपनी आजीविका ही संकट में है।रोजगार सहायकों का कहना है कि वे लगातार काम करते हुए भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कई बार बैठकों में मुद्दा उठाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सामूहिक अवकाश ही उनका अंतिम विकल्प बचा है, ताकि प्रशासन उनकी पीड़ा को गंभीरता से ले। यह मामल...

ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश

 ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांव पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोलेते हुए परखी गुणवत्ता, सुश्री कौर ने अच्छे साइट सिलेक्शन की सराहना कर पीठ थपथपाई तो कहीं नाराजगी भी जताई, निर्धारित समयावधि में कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने अधिकारियों को दिए निर्देश कटनी | भीषण गर्मी, तपती दोपहरी का वक्त,सकरी मेढ़ें, कटीली झाड़ियों और खेतों के बीच पगडंडी मार्ग से ऊबड़ खाबड़ पथरीली राहों में पसीने से तरबतर जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने ढाई से तीन किलोमीटर पैदल चलकर विकासखंड ढीमरखेड़ा के दूरस्थ आधा दर्जन से अधिक गांवों में निर्माण एवं विकास कार्यों की नब्ज़ टटोली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा, कोठी, झिन्ना पिपरिया, भमका, खमतरा पहरुआ एवं अन्य गांव पहुंचकर, नवीन स्वीकृत जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य स्थल,गेहूं खरीदी केंद्र, जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खेत तालाब, डगवेल, आंगनवाड़ी भवन एवं शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में लैब एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता को परखा और प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ढीमरखेड़ा म...