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पूर्व कर्मचारी वरिष्ठ नेता पंडित सुरेश त्रिपाठी ने उठाया मुद्दा, झिन्ना पिपरिया में अलग फीडर की मांग तेज, पेयजल संकट के बीच उठी आवाज

 पूर्व कर्मचारी वरिष्ठ नेता पंडित सुरेश त्रिपाठी ने उठाया मुद्दा, झिन्ना पिपरिया में अलग फीडर की मांग तेज, पेयजल संकट के बीच उठी आवाज



कटनी । जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम झिन्ना पिपरिया एक बार फिर मूलभूत सुविधाओं को लेकर चर्चा में है।गांव में विद्युत सब स्टेशन होने के बावजूद यहां के उपभोक्ताओं को अपेक्षित बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे नियमित रूप से विद्युत बिलों का भुगतान करते हैं, बल्कि कई मामलों में ढीमरखेड़ा क्षेत्र से अधिक राजस्व भी देते हैं, इसके बावजूद झिन्ना पिपरिया का फीडर आज तक अलग से संधारित नहीं किया गया है। इस मुद्दे को लेकर अब आवाज तेज हो गई है और पूर्व कर्मचारी एवं वरिष्ठ नेता पंडित सुरेश त्रिपाठी ने प्रशासन से ग्राम के लिए अलग फीडर की मांग उठाई है।ग्रामीणों के अनुसार, झिन्ना पिपरिया में विद्युत सब स्टेशन स्थापित है, जिससे आसपास के कई गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है। लेकिन विडंबना यह है कि स्वयं झिन्ना पिपरिया के उपभोक्ताओं को ही पर्याप्त और स्थिर बिजली नहीं मिलती। एक ही फीडर पर कई गांव जुड़े होने के कारण लोड बढ़ जाता है, जिससे बार-बार ट्रिपिंग, वोल्टेज की समस्या और लंबे समय तक बिजली कटौती जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। इसका सीधा असर ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। पंडित सुरेश त्रिपाठी ने इस विषय में कहा कि “जब गांव में सब स्टेशन मौजूद है और यहां के लोग नियमित रूप से बिलों का भुगतान कर रहे हैं, तो फिर झिन्ना पिपरिया को अलग फीडर देने में आखिर समस्या क्या है? यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का मामला है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने आगे कहा कि झिन्ना पिपरिया पहले से ही पेयजल संकट के लिए जिले में जाना जाता है। गर्मी के मौसम में यहां के हैंडपंप और कुएं सूखने लगते हैं, ऐसे में लोगों की निर्भरता मोटर पंप और ट्यूबवेल पर बढ़ जाती है। लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। कई बार तो ग्रामीणों को रात-रात भर जागकर पानी भरना पड़ता है, क्योंकि बिजली का कोई निश्चित समय नहीं होता। ग्रामीणों ने बताया कि फसल सिंचाई के लिए भी बिजली का स्थिर और पर्याप्त होना बेहद जरूरी है। वर्तमान स्थिति में किसान समय पर सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है। इससे आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि झिन्ना पिपरिया के लिए अलग फीडर बनाया जाता है, तो इससे बिजली आपूर्ति सुचारू होगी और किसानों को राहत मिलेगी।

गांव के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पंडित सुरेश त्रिपाठी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही झिन्ना पिपरिया के लिए अलग फीडर की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान मांगने का प्रयास है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जब तक बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली और पानी सही तरीके से उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक विकास अधूरा ही रहेगा। झिन्ना पिपरिया का मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है।

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