आदिवासी जमीन स्कैम': राज्य प्रशासनिक सेवा के 3 अफसरों का 'महापाप', रसूखदार डोडानी के लिए सरकारी फाइलों का हुआ 'कत्ल'
आदिवासी जमीन स्कैम': राज्य प्रशासनिक सेवा के 3 अफसरों का 'महापाप', रसूखदार डोडानी के लिए सरकारी फाइलों का हुआ 'कत्ल'
कटनी । पिपरौध की बेशकीमती आदिवासी जमीन को निगलने के लिए बुना गया जाल इतना गहरा है कि इसमें तीन राज्य प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों ने खेल किया।एसडीएम स्तर के अधिकारी, तहसीलदार, बाबू और पटवारी तक एक 'सिंडिकेट' की तरह काम कर रहे थे। दैनिक ताजा खबर के प्रधान संपादक राहुल पाण्डेय के पास मौजूद पुख्ता दस्तावेज और जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में रसूखदारों डोडानी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी दफ्तरों को 'सेल डीड' के दफ्तर में बदल दिया गया। जिससे रसूखदार डोडानी भी मालामाल हुआ और बाबू और अफसर की जेब भी गर्म हुई।
*एसडीएम ने 'गायब' की फाइलें, तहसीलदार ने 'मूंदी' आंखें*
इस घोटाले की पटकथा राज्य प्रशासनिक सेवा के उन तीन अधिकारियों ने लिखी, जिन पर कानून की रक्षा का जिम्मा था एसडीएम का 'कांड जब इस जमीन को लेकर शिकायतें प्रशासन तक पहुँचीं, तो एसडीएम स्तर के एक अधिकारी ने बड़ी चतुराई से शिकायतों की मूल फाइलों को ही रिकॉर्ड से गायब करवा दिया, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी जांच का आधार ही खत्म हो जाए।
*तहसीलदार की 'जुगाड़'* इसके बाद कमान संभाली तहसीलदार स्तर के अधिकारी ने। नामांतरण के समय नियमों का हवाला देने के बजाय, तहसीलदार ने उन गंभीर आपत्तियों का जिक्र तक नहीं किया जो रिकॉर्ड में दर्ज थीं। लेकिन गायब हो चुकी थी। बिना किसी हिचकिचाहट के करोड़ों की जमीन रसूखदारों के नाम चढ़ा दी गई।
*बंटवारे का पुराना खेल:* शुरुआती दौर में भी एक अन्य तहसीलदार ने भी निजी हित के लिए 'पारिवारिक बंटवारे' को मंजूरी दी थी, जो इस पूरी साजिश की पहली सीढ़ी थी।
*सिंडिकेट के 'ग्राउंड वर्कर': सोनी बाबू और कोरी पटवारी*
सरकारी दफ्तरों के भीतर इस भ्रष्टाचार की गाड़ी को धक्का देने का काम सरकारी कर्मचारी ने किया। जैसे वे रसूखदार डोडानी के प्रमुख प्यादें हो सोनी (बाबू) सरकारी कार्यालय का यह 'धुरंधर' बाबू डोडानी परिवार का सीधा संपर्क सूत्र था।सरकारी फाइलों को इधर से उधर करने और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साठगांठ बैठाने में सोनी की मुख्य भूमिका रही। कोरी आरआई जमीन की जमीनी हकीकत को बदलने और नामांतरण की प्रक्रिया में होने वाले 'लेन-देन' के प्रबंधन का जिम्मा कोरी आरआई के कंधों पर था। ऐसे ही खेलों में एक दो बार निलंबित भी हो चुका है यह आरआई।
*दलाल मोटवानी: 'दागी' अतीत और 'मास्टरमाइंड' वर्तमान*
इस पूरे सौदे की नींव रखने वाला मुख्य दलाल मोटवानी है। मोटवानी कोई नया नाम नहीं है; बल्कि बदनाम चेहरा है। इस पर पहले भी अवैध प्लाटिंग और जमीनों की धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज है। अपनी पुरानी आदतों के अनुसार, मोटवानी ने ही आदिवासी महिला को 'मोहरा' बनाया और डोडानी परिवार के निवेश को सुरक्षित रास्ता दिया।
*जनहित की मांग: 'जेल या क्लीन चिट?'*
यह मामला अब केवल राजस्व का नहीं, बल्कि आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) का है। जिस तरह से सरकारी फाइलें गायब की गईं और आदिवासी कानूनों का मजाक उड़ाया गया, वह उच्च स्तरीय लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू (EOW) जांच का विषय है।

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