सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आपसी रंजिश की भेंट चढ़ते रोजगार सहायक

 आपसी रंजिश की भेंट चढ़ते रोजगार सहायक



संपादक राहुल पाण्डेय  |  ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले रोजगार सहायक आज प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक स्वार्थों के बीच पिसते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि यदि किसी रोजगार सहायक के परिवार का कोई सदस्य सरपंच के खिलाफ चुनाव लड़ ले, या पंचायत की राजनीति में अलग विचारधारा रखता हो, तो उसका सीधा खामियाजा रोजगार सहायक को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कई पंचायतों में बिना पंचों की अनुमति और बिना किसी ठोस कारण के सरपंच रोजगार सहायकों का स्थानांतरण दूसरी पंचायतों में करवाने का प्रयास कर रहे हैं।इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है भ्रष्टाचार पर लगाम। जहां रोजगार सहायक नियमों के तहत काम करते हुए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं, वहीं कुछ सरपंच इसे अपने “अधिकारों में दखल” मानते हैं।

आरोप यह भी है कि कुछ सरपंच रोजगार सहायकों को अपना “नौकर” समझकर उनसे मनमाना काम कराना चाहते हैं। जब रोजगार सहायक नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करते हैं, तो आपसी रंजिश को आधार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। स्थानांतरण को दंड के रूप में इस्तेमाल करना न केवल प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना पर भी सवाल खड़ा करता है। यह चिंताजनक है कि प्रशासन कई बार इन मामलों में आंख मूंदे रहता है। सरपंच और प्रशासन के बीच आपसी तालमेल के चलते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे रोजगार सहायक खुद को असहाय महसूस करते हैं।परिणामस्वरूप, ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल टूटता है और भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि पंचायत स्तर पर शक्ति संतुलन बिगड़ रहा है। रोजगार सहायकों को कानूनी सुरक्षा, स्पष्ट स्थानांतरण नीति और पंचों की अनिवार्य सहमति जैसे प्रावधानों को सख्ती से लागू करना समय की मांग है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ग्रामीण विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी और ईमानदार कर्मी यूं ही आपसी रंजिश की बलि चढ़ते रहेंगे।

टिप्पणियाँ

popular post

कल तक जो बच्चों को सपने सजाना सिखाती थीं, आज खुद खामोश होकर सबको रुला गईं उनकी मुस्कान, उनकी बातें रहेंगी सदा याद, ऐसे ही नहीं मिलता जीवन में उनका साथ अचानक हृदयगति रुकने से शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

 कल तक जो बच्चों को सपने सजाना सिखाती थीं, आज खुद खामोश होकर सबको रुला गईं उनकी मुस्कान, उनकी बातें रहेंगी सदा याद, ऐसे ही नहीं मिलता जीवन में उनका साथ अचानक हृदयगति रुकने से शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर कटनी | कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम सिमरिया की निवासी शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का बीती रात्रि अचानक हृदयगति रुक जाने से दुखद निधन हो गया।उनके असामयिक निधन की खबर से पूरे क्षेत्र सहित शिक्षक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। विजय लक्ष्मी ज्योतिषी, देवेंद्र ज्योतिषी (गुड्डू मालगुजार) की धर्मपत्नी थीं। वे अपने सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनके निधन से शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार उनके निज ग्राम सिमरिया में संपन्न किया जाएगा। ढीमरखेड़ा एवं कटनी के शिक्षक समुदाय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति शांति शा...

सगौना डैम में दर्दनाक हादसा, 15 वर्षीय बालक की डूबने से मौत, एक की हालत गंभीर थी अब सुरक्षित

 सगौना डैम में दर्दनाक हादसा, 15 वर्षीय बालक की डूबने से मौत, एक की हालत गंभीर थी अब सुरक्षित ढीमरखेड़ा ।  ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सगौना डैम में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां मछली पकड़ने गए एक 15 वर्षीय बालक की पानी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक मोहित बैगा पिता कैलाश बैगा उम्र लगभग 15 वर्ष, निवासी ग्राम कोठी, थाना ढीमरखेड़ा, दिनांक 30 मार्च 2026 को दोपहर करीब 1 बजे अपने साथियों अजीत बैगा एवं अन्य गांव के लड़कों के साथ सगौना डैम के पुल पर मछली पकड़ने गया था। इसी दौरान पुल के भीतर तेज बहाव वाले पानी में वह फंसकर डूब गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद अजय बैगा और सुन्नू बैगा ने प्रयास कर मोहित को पानी से बाहर निकाला।परिजन भी मौके पर पहुंच गए। उस समय मोहित के कपड़े पूरी तरह भीगे हुए थे और वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। घायल अवस्था में तत्काल 108 एम्बुलेंस की सहायता से उसे शासकीय अस्पताल उमरियापान ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषि...

बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब सरपंच पुत्र चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग

 बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब  सरपंच पुत्र  चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग कटनी । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकल पिपरिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहां की निर्वाचित सरपंच पान बाई के नाम पर पंचायत का संचालन होने के बजाय उनके पुत्र राजेश पटेल उर्फ पिल्लू द्वारा कथित रूप से सभी निर्णय लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कामकाज में नियमों को दरकिनार कर प्रॉक्सी सिस्टम चलाया जा रहा है, जो न केवल पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है बल्कि कानून का भी उल्लंघन है। *सरपंच के अधिकारों का कथित दुरुपयोग* ग्रामीणों के अनुसार पंचायत बैठकों से लेकर निर्माण कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और योजनाओं के क्रियान्वयन तक अधिकांश फैसले सरपंच के बजाय उनके पुत्र द्वारा किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति “सरपंच पति” मॉडल से भी आगे बढ़कर अब “सरपंच पुत्र” मॉडल में बदल गई है, जहां वास्तविक जनप्रतिनिधि की भूमिका सीमित कर दी गई है। *कानून क्या कहता है* पंचायती राज व्यवस्था में स्पष्...