शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द
शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द
ढीमरखेड़ा | ग्राम झिन्ना पिपरिया के प्रतिष्ठित कोपारिहा परिवार में जन्मे, जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री अवनीश कांत मिश्रा का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे श्री सीताराम जी मिश्रा के बड़े सुपुत्र थे और अपने सरल स्वभाव, कर्मठता व सेवा भावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। श्री मिश्रा बचपन से ही मेधावी रहे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रिपल एम.ए. तक की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिचय वर्ष 1994-95 में देखने को मिला, जब उन्होंने संकुल केंद्र शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झिन्ना पिपरिया अंतर्गत मड़ैयन टोला में शिक्षा गारंटी शाला की स्थापना स्वयं की और गुरुजी के रूप में बच्चों को शिक्षित किया। बाद में वही शाला प्राथमिक विद्यालय में परिवर्तित हुई, जहां वे प्राथमिक शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे।श्री मिश्रा अपने सेवाकाल के अंतिम चरण में थे और मात्र नौ माह बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। इसी बीच एक माह पूर्व उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। परिजनों द्वारा जबलपुर और नागपुर में उपचार कराया गया, किंतु लीवर पूरी तरह खराब हो जाने के कारण चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अपने जीवन में सदैव जरूरतमंदों के साथ खड़े रहने वाले श्री मिश्रा अपने पीछे वृद्ध पिता, पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियों से भरा-पूरा परिवार छोड़कर देव लोक गमन कर गए। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। आज उनके अंतिम संस्कार के दौरान ग्राम झिन्ना पिपरिया सहित आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग उपस्थित हुए।उमड़ा जनसैलाब उनकी लोकप्रियता, सामाजिक सरोकार और शिक्षा के प्रति उनके अमूल्य योगदान का प्रत्यक्ष प्रमाण था। नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके कार्यों को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लिया।

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