कर्म नहीं, ज्ञान तय करता है सफलता का वास्तविक फल
कटनी | आज की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में यह तथ्य तेजी से उभरकर सामने आ रहा है कि केवल कठोर परिश्रम ही सफलता की गारंटी नहीं है।वास्तविक सफलता उस ज्ञान और समझ से तय होती है, जो व्यक्ति अपने कर्म को सही दिशा देने में उपयोग करता है। यदि केवल कर्म का ही फल मिलता, तो सबसे अधिक मेहनत करने वाला मजदूर, किसान या रिक्शेवाला सबसे संपन्न होता, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। समाज में श्रमिक वर्ग दिन-रात कठिन परिश्रम करता है, फिर भी उसकी आर्थिक स्थिति वर्षों तक नहीं बदलती।इसके विपरीत, ज्ञान, तकनीक, नियमों और अवसरों की समझ रखने वाला वर्ग कम श्रम में अधिक लाभ कमा लेता है। इससे स्पष्ट होता है कि आज के युग में ज्ञान ही कर्म को फलदायी बनाता है। बिना ज्ञान के किया गया श्रम केवल थकान देता है, जबकि ज्ञान से जुड़ा कर्म समृद्धि का मार्ग खोलता है। ज्ञान का अर्थ केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यवहारिक समझ, कौशल, बाजार और व्यवस्था की जानकारी है। यही कारण है कि आज पढ़े-लिखे युवाओं को भी रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि शिक्षा में व्यवहारिक ज्ञान और कौशल की कमी है। भारतीय दर्शन भी यही सिखाता है कि ज्ञान से युक्त कर्म ही श्रेष्ठ होता है। समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता का मूल कारण भी ज्ञान तक असमान पहुंच है। यदि ज्ञान, शिक्षा और जानकारी सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे, तो श्रमिक वर्ग भी अपनी मेहनत का उचित मूल्य पा सकता है। कर्म और ज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन आज के समय में सफलता की कुंजी ज्ञान बन चुका है। केवल मेहनत नहीं, बल्कि समझदारी से की गई मेहनत ही वास्तविक लक्ष्मी दिलाती है।

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