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निपुण लक्ष्य की दिशा में कटनी जिले की शालाओं में प्रभावी पहल, बच्चों का शैक्षणिक स्तर संतोषजनक

 निपुण लक्ष्य की दिशा में कटनी जिले की शालाओं में प्रभावी पहल, बच्चों का शैक्षणिक स्तर संतोषजनक



कटनी । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप “हर बच्चा निपुण बने” के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में कटनी जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कलेक्टर कटनी के निर्देशन में जिले की निपुण प्रस्तावित 153 शालाओं के कक्षा दूसरी एवं तीसरी में अध्यापन कराने वाले शिक्षकों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन डाइट कटनी में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों, शिक्षण विधियों एवं बच्चों की बुनियादी समझ को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक रणनीतियों से अवगत कराना रहा। कार्यशाला के उपरांत बच्चों में सीखने की वास्तविक स्थिति का आकलन करने हेतु डाइट कटनी के व्याख्याता राकेश सिन्नरकर द्वारा जनपद शिक्षा केंद्र ढीमरखेड़ा अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र दशरमन की निपुण प्रस्तावित शासकीय प्राथमिक शाला बरहटा, शासकीय प्राथमिक शाला बसहरा, शासकीय प्राथमिक शाला डाला तथा जन शिक्षा केंद्र सिलौड़ी की शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला अतरसूमा का अनुवीक्षण किया गया। अनुवीक्षण के दौरान इन विद्यालयों में बच्चों का शैक्षणिक स्तर निपुण लक्ष्य के काफी करीब पाया गया। गणित विषय में बच्चों से जोड़, घटाव, भाग तथा इबारती सवाल पूछे गए, जिनका उत्तर बच्चों ने आत्मविश्वास और तत्परता के साथ दिया। वहीं हिंदी भाषा के अंतर्गत बच्चों से कहानी पठन कराया गया, जिसमें उनकी पढ़ने की क्षमता और समझ संतोषजनक पाई गई। विद्यालयों में पुस्तकालयों का सक्रिय होना, बच्चों के लेन-देन कार्ड का संधारण तथा टीएलएम (शिक्षण सहायक सामग्री) का प्रभावी उपयोग भी देखने को मिला। इसके साथ ही बच्चों के लिए फ्लोर गेम जैसी गतिविधियों के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिससे सीखने की प्रक्रिया रोचक और प्रभावी बन सके। अनुवीक्षण के दौरान बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों से भी संवाद किया गया तथा आवश्यक सुझाव दिए गए, ताकि निपुण लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सके। इस अवसर पर जन शिक्षक सत्यदेव महोबिया एवं संतोष बर्मन भी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, यह पहल जिले में निपुण भारत मिशन को धरातल पर सशक्त रूप से लागू करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रही है, जिससे आने वाले समय में सभी बच्चे अपेक्षित दक्षता प्राप्त कर सकेंगे।

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