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क्या यूपीएससी और पीएससी अधिकारियों के अवैध धन से भारत कर्ज़मुक्त हो सकता है?

 क्या यूपीएससी और पीएससी अधिकारियों के अवैध धन से भारत कर्ज़मुक्त हो सकता है?



कटनी  |  भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी प्रशासनिक रीढ़ माने जाने वाले अधिकारी यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) और पीएससी (राज्य लोक सेवा आयोग) से चयनित देश की नीतियों, योजनाओं और शासन व्यवस्था को लागू करने का कार्य करते हैं।इन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे ईमानदारी, निष्पक्षता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करेंगे।लेकिन दुर्भाग्यवश, समय-समय पर सामने आने वाले भ्रष्टाचार के मामले इस विश्वास को गहरा आघात पहुँचाते हैं।

*भारत पर कर्ज़ की स्थिति*

वर्तमान समय में भारत पर आंतरिक और बाहरी कर्ज़ मिलाकर कई लाख करोड़ रुपये का बोझ है। यह कर्ज़ विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और आपात स्थितियों के लिए लिया जाता है। कर्ज़ अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन जब देश की बड़ी आबादी गरीबी, बेरोज़गारी और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रही हो, तब यह बोझ गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

*भ्रष्टाचार की जड़ें और प्रशासन*

यूपीएससी और पीएससी से चयनित अधिकारी अत्यंत कठिन परीक्षा प्रक्रिया से गुजरकर सेवा में आते हैं। उन्हें समाज का सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क माना जाता है। बावजूद इसके, कुछ अधिकारी सत्ता, पैसे और प्रभाव के लालच में अपने कर्तव्यों से भटक जाते हैं। भूमि घोटाले, खनन घोटाले, ठेकेदारी में कमीशन, तबादलों में रिश्वत, और योजनाओं में भ्रष्टाचार जैसे मामलों में कई अधिकारी पकड़े गए हैं।

यह भी सच है कि सभी अधिकारी भ्रष्ट नहीं होते, लेकिन चंद प्रतिशत भ्रष्ट अधिकारी भी व्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचा देते हैं।

*अवैध धन का अनुमान*

भ्रष्टाचार का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसका कोई सटीक आंकड़ा नहीं होता। काले धन का बड़ा हिस्सा बेनामी संपत्तियों, विदेशों में जमा खातों, सोने, रियल एस्टेट और फर्जी कंपनियों में छिपा होता है। विभिन्न आर्थिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का अनुमान है कि भारत में काला धन लाखों करोड़ रुपये में है। यदि इसमें प्रशासनिक भ्रष्टाचार से अर्जित धन को जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा और भी भयावह हो जाता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि देश के उच्च और मध्यम स्तर के सभी भ्रष्ट अधिकारियों की अवैध संपत्ति जब्त कर ली जाए, तो इससे न केवल भारत का कर्ज़ काफी हद तक कम हो सकता है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।

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