दिखावटी बनता “ऑपरेशन शिकंजा”? अवैध शराब के खिलाफ गांव–गांव उबाल, महिलाएं सड़कों पर, बरही थाना क्षेत्र के कुंदरेही सहित कई गांवों में महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, पुलिस और आबकारी के डबल एंजिन पर चलाई जा रही मुहिम पर उठे गंभीर सवाल
दिखावटी बनता “ऑपरेशन शिकंजा”? अवैध शराब के खिलाफ गांव–गांव उबाल, महिलाएं सड़कों पर, बरही थाना क्षेत्र के कुंदरेही सहित कई गांवों में महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, पुलिस और आबकारी के डबल एंजिन पर चलाई जा रही मुहिम पर उठे गंभीर सवाल
कटनी । अपराध और अवैध शराब पर नियंत्रण के दावों के बीच जिला आबकारी विभाग और पुलिस का बहुचर्चित ऑपरेशन शिकंजा अब ज़मीनी हकीकत से दूर, दिखावटी अभियान साबित होता नजर आ रहा है , डबल शासकीय विभाग के एंजिन के ड्राइवर्स (कर्मचारी ) शिकंजा का सिग्नल ग्रीन होने के बाद भी बीमार गति से गाड़ी को धकिया रहे हैं । जिले के कई ग्रामीण अंचलों में भड़कते जनआंदोलन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कार्रवाई काग़ज़ों, फोटो-सेशन और प्रेस नोट तक सिमट कर रह गई है। यदि वास्तव में शिकंजा कस रहा होता, तो अपने घर–परिवार बचाने के लिए महिलाओं को सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आती ? बरही थाना क्षेत्र के कुंदरेही सहित आसपास के गांवों में महिलाओं के नेतृत्व में हुए उग्र विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के दौरान “गांव में शराब नहीं बिकेगी”, “नशा नहीं, विकास चाहिए” जैसे नारों की गूंज यह बताने के लिए काफी थी कि दावों और हकीकत के बीच खाई लगातार गहरी हो रही है।महिलाओं का आरोप है कि अवैध शराब के कारण घर-घर की शांति भंग हो चुकी है, घरेलू हिंसा बढ़ी है, मेहनत की कमाई नशे में उड़ रही है और बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि असली शराब माफिया खुलेआम अपना कारोबार कर रहे हैं, जबकि पुलिसिया कार्रवाई खानापूर्ति और चुनिंदा मामलों तक सीमित है। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कदम न उठाए जाने से माफियाओं के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में जनता सवाल उठा रही है क्या ऑपरेशन शिकंजा अपराध पर लगाम कसने की सच्ची मुहिम है, या जनता को गुमराह करने का एक औपचारिक अभियान प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब पर तत्काल रोक, दोषियों की गिरफ्तारी और नशामुक्ति की ठोस योजना लागू नहीं की गई, तो थाना घेराव, सड़क जाम और अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि अपने गांव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की निर्णायक लड़ाई है। जनता का अल्टीमेटम साफ है दिखावटी शिकंजा नहीं, माफिया की कमर तोड़ने वाली ईमानदार कार्रवाई चाहिए।

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