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भूला और टिकरिया में 10 माह से जारी अवैध खनन, राजस्व लूट पर प्रशासन मौन, पटवारी से लेकर पुलिस तक की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

 भूला और टिकरिया में 10 माह से जारी अवैध खनन, राजस्व लूट पर प्रशासन मौन, पटवारी से लेकर पुलिस तक की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल



कटनी ।  स्लीमनाबाद तहसील के ग्राम भूला और टिकरिया में करीब 10 माह से बॉक्साइट का अवैध खनन खुलेआम चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि हल्का पटवारी से लेकर नायब तहसीलदार, तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी (SDM), खनिज अधिकारी और पुलिस सभी ने चुप्पी साध रखी है। इतना लंबा समय गुजर जाने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों के अनुसार शासकीय भूमि पर भारी मशीनों और हाईवा वाहनों से दिन-रात खनन किया गया। यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि महीनों से चल रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या स्थानीय अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?

*10 माह में हजारों ट्रक, फिर भी रिकॉर्ड में सब साफ?*

ग्राम भूला के खसरा नंबर 54 और टिकरिया के खसरा नंबर 92 व 219 की शासकीय जमीन से हजारों ट्रक बॉक्साइट निकाले जाने का आरोप है। अगर यह खनन 10 माह से चल रहा है, तो फिर आज तक हल्का पटवारी ने अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को क्यों नहीं भेजी ? नायब तहसीलदार,  तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी को खनिज एक्ट के तहत शक्ति प्रदान है। फिर शिकायत पर कार्यवाही क्यों नहीं होती? खनिज अधिकारी ने अब तक क्या कार्रवाई की है? पुलिस की नाक के नीचे से हाईवा कैसे निकलते रहे हैं? इन सवालों का जवाब आज तक प्रशासन नहीं दे पाया है।

*शासन को करोड़ों का नुकसान, माफिया को खुली छूट*

अवैध खनन से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। न रॉयल्टी जमा, न परमिट फिर भी खनन बदस्तूर जारी रहा। यह स्थिति तब है, जब खनिज विभाग और राजस्व अमले का पूरा तंत्र मौजूद है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं।

*किसान बर्बाद, सड़कें तबाह*

खनन का दुष्प्रभाव किसानों पर साफ दिख रहा है। उपजाऊ भूमि नष्ट हो रही है, खेतों में मिट्टी भर दी गई है और ओवरलोड वाहनों से गांवों की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। ग्रामीण परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बेखबर बने हुए हैं।

*अब मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला*

प्रशासनिक उदासीनता से नाराज़ ग्रामीणों ने अब तय कर लिया है कि वे इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद वीडी शर्मा और वरिष्ठ अधिकारियों तक सीधे पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री के कटनी आगमन पर मुद्दा उठाने की भी तैयारी है।

*बड़ा सवाल: लापरवाही या मिलीभगत?*

करीब 10 माह तक अवैध खनन चलना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है। अब देखना यह है कि शासन इस मामले में केवल माफियाओं पर कार्रवाई करता है या फिर चुप बैठे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

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