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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार को दैनिक ताजा खबर के प्रधान संपादक राहुल पाण्डेय की अदालत छुटभैया नेता को सजाए मौत का ऐलान करती हैं , सत्ता का घमंड बनाम ईमानदारी की आवाज़

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कटनी   |    महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों एक वीडियो से गरमाई हुई है। डिप्टी सीएम अजीत पवार और युवा महिला आईपीएस अधिकारी अंजना कृष्णा के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने न केवल कानून-व्यवस्था और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब-जब कोई अधिकारी ईमानदारी से काम करेगा, तब-तब उसे सत्ता के दबाव का सामना करना पड़ेगा। यह घटना सोलापुर की है, जहाँ 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी अंजना कृष्णा अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही थीं। यह वही अवैध खनन है, जिससे राजनीतिक दलों और नेताओं की करोड़ों की कमाई होती है। ठीक उसी समय किसी कार्यकर्ता ने सीधे डिप्टी सीएम अजीत पवार को फोन मिला दिया और वह कॉल अंजना कृष्णा तक पहुँच गई। चूंकि वे अपने कर्तव्य पथ पर थीं, उन्होंने कॉलर से कहा कि वे उनके व्यक्तिगत नंबर पर कॉल करें। लेकिन पवार का अहंकार यह कैसे सहन कर सकता था? उन्होंने तुरंत धमकाने वाले अंदाज़ में कहा – “क्या मुझे तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए? तुममें इतनी हिम्मत है? अपना नंबर दो, मैं वीडियो कॉल कर रहा हूँ, तब पहचान लोगी।” सोचिए, यह संवाद सिर्फ एक अधिकारी से नहीं था, यह संवाद दरअसल पूरे प्रशासन और जनता के आत्मसम्मान से था। अंजना कृष्णा कोई साधारण अधिकारी नहीं। केरल के साधारण परिवार से निकलकर, माँ लोकल कोर्ट में टाइपिस्ट और पिता एक छोटे व्यापारी इन हालातों से संघर्ष करते हुए उन्होंने यूपीएससी में 355वीं रैंक पाई। उनकी मेहनत, ईमानदारी और संवेदनशीलता उन्हें आज उस स्थान पर लाई है जहाँ वे जनता के हक के लिए अवैध खनन के खिलाफ डटकर खड़ी थीं। लेकिन क्या हमारी राजनीति इतनी गिर चुकी है कि ईमानदार अधिकारी को उसके कर्तव्य पालन पर डांटा जाए? क्या यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रशासन की डोर अब नेताओं के फोन कॉल से खिंचेगी? सवाल सिर्फ अजीत पवार या अंजना कृष्णा का नहीं है, सवाल इस पूरे तंत्र का है। जनता यह देख रही है कि किस तरह भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार को संरक्षण मिलता है। सत्ता पर बैठे लोग जनता की गाढ़ी कमाई से बने खनिज संसाधनों को लूटते हैं और जब कोई अधिकारी रोकने की कोशिश करता है तो उस पर धौंस जमाते हैं। आज अंजना कृष्णा ने जो साहस दिखाया, वही प्रशासनिक सेवा की आत्मा है। अगर देश के सभी अधिकारी इसी तरह से राजनीतिक दबावों को नकार दें और केवल कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह रहें, तो भ्रष्टाचार आधा खत्म हो जाएगा। दैनिक ताजा खबर का संपादकीय मंडल इस घटना को लोकतंत्र के लिए एक चेतावनी मानता है। यह सिर्फ अंजना कृष्णा की लड़ाई नहीं, यह हर उस नागरिक की लड़ाई है जो चाहता है कि प्रशासन निष्पक्ष और न्यायपूर्ण रहे। अगर एक ईमानदार अधिकारी को इस तरह धमकाना “सामान्य राजनीतिक हस्तक्षेप” माना जाएगा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतंत्र एक खोखला खोल भर रह जाएगा। यह न्यायपालिका और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में कठोरतम कदम उठाएँ। भ्रष्ट नेताओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए। ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया जाए। अवैध खनन जैसे काले कारोबार में शामिल माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।

*प्रधान संपादक राहुल पाण्डेय दैनिक ताजा खबर*

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