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प्रेमानंद महाराज और रामभद्राचार्य विवाद पर बोले बागेश्वर धाम महाराज, कहा दोनों संत वंदनीय, ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं

 प्रेमानंद महाराज और रामभद्राचार्य विवाद पर बोले बागेश्वर धाम महाराज, कहा  दोनों संत वंदनीय, ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं 




ढीमरखेड़ा ।  हाल ही में चर्चा का केंद्र बने दो प्रख्यात संतों जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज और बाबा प्रेमानंद महाराज के बीच चल रहे कथित विवाद पर अब बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। महाराष्ट्र प्रवास पर निकले धीरेंद्र शास्त्री ने मंगलवार को भिवंडी स्थित बागेश्वर सनातन मठ में गुरु दीक्षा कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में इस विषय पर अपनी राय स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य महाराज और प्रेमानंद महाराज दोनों ही संत समाज और सनातन परंपरा के वंदनीय महापुरुष हैं। इनके बीच किसी प्रकार की ईर्ष्या या वैर-भावना नहीं है। कुछ लोग अनावश्यक रूप से विवाद को हवा देने का प्रयास कर रहे हैं, जो धर्म और समाज के हित में नहीं है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि रामभद्राचार्य महाराज और प्रेमानंद महाराज के बीच प्रतिस्पर्धा और मतभेद की स्थिति बनी हुई है। कई वीडियो क्लिप्स और पोस्ट्स वायरल हुईं, जिनमें यह दावा किया गया कि दोनों संतों के अनुयायियों में भी असहमति का माहौल है। यही नहीं, विभिन्न मंचों पर यह प्रश्न उठने लगे कि क्या संत समाज में भी आपसी ईर्ष्या या प्रतिस्पर्धा का भाव मौजूद है। इस पृष्ठभूमि में मीडिया और सोशल मीडिया पर यह विवाद लगातार चर्चा का विषय बना रहा।

*धीरेंद्र शास्त्री का बयान*

भिवंडी में आयोजित गुरु दीक्षा समारोह के दौरान जब बागेश्वर धाम महाराज से इस विवाद पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद साफ शब्दों में कहा “हमारे गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के मन में प्रेमानंद जी के लिए कोई ईर्ष्या नहीं है। प्रेमानंद महाराज ने युवाओं को भक्ति और भजन से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है, यह सराहनीय है। “दोनों संत समाज और सनातन के लिए पूजनीय हैं। उनके बीच मतभेद का प्रचार करना उचित नहीं है।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि “जब भी प्रेमानंद महाराज हमारे गुरु रामभद्राचार्य जी से मिलेंगे, उन्हें गले लगाया जाएगा। दो महापुरुषों के बीच लड़ाई दिखाने वाले लोगों को समझना चाहिए कि यह सनातन धर्म के हित में नहीं है।”

*सोशल मीडिया की भूमिका*

धीरेंद्र शास्त्री ने विशेष तौर पर मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग साधु-संतों के कथनों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर देते हैं और विवाद की स्थिति बना देते हैं। जबकि संतों का काम समाज में एकता, भक्ति और धर्म का संदेश फैलाना है। इस तरह के प्रयास सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। उन्होंने अपील की कि लोगों को संत समाज की बातों को विवाद का रूप देने के बजाय आदर और सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए।

*प्रेमानंद महाराज का योगदान*

धीरेंद्र शास्त्री ने प्रेमानंद महाराज के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं को भक्ति, भजन और संत परंपरा से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। देशभर में उनके प्रवचन और भजन कार्यक्रमों ने लाखों युवाओं को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।

*रामभद्राचार्य महाराज की छवि*

रामभद्राचार्य महाराज को शास्त्रों और धर्मग्रंथों के गहन ज्ञान के लिए जाना जाता है। वे समाज सेवा, शिक्षा और धार्मिक जागरण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके मन में किसी भी साधु-संत के लिए नकारात्मक भाव होना संभव ही नहीं है।

*विवाद को न बढ़ाने की अपील*

बागेश्वर धाम महाराज ने दोहराया कि दो संतों के बीच लड़ाई या मतभेद दिखाना सनातन के लिए घातक है।आमजन और श्रद्धालुओं को भी इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। धर्म का सार आपसी सम्मान और एकता है, न कि विवाद । भिवंडी में दिए गए इस बयान से बागेश्वर धाम महाराज ने स्पष्ट कर दिया है कि रामभद्राचार्य महाराज और प्रेमानंद महाराज के बीच किसी भी तरह की ईर्ष्या या विवाद की बात केवल अफवाह और प्रचार है। उन्होंने दोहराया कि दोनों संत पूजनीय हैं और उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।

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