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ग्राम पंचायत छोटा कछारगांव में पीएचई विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों की मुसीबतें

 ग्राम पंचायत छोटा कछारगांव में पीएचई विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों की मुसीबतें




ढीमरखेड़ा |  भारत के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों के तहत विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जाता है, जिनमें से एक प्रमुख योजना है जल जीवन मिशन, जिसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले विभागों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। किंतु कई बार कार्य की गुणवत्ता, कार्यान्वयन की प्रक्रिया और उसकी निगरानी में लापरवाही के कारण ग्रामीणों को लाभ की बजाय परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसा ही एक उदाहरण है ग्राम पंचायत छोटा कछारगांव, जहाँ पर पीएचई विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने हेतु सड़कों की खुदाई तो कर दी गई, किंतु उनकी मरम्मत का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। ग्राम पंचायत छोटा कछारगांव एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अधिकतर आबादी खेती-बाड़ी, पशुपालन तथा श्रम कार्यों पर निर्भर है। यहाँ की सड़कें ही ग्रामीण जीवन की धुरी हैं, जो गांव को मुख्य बाज़ारों, स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य संसाधनों से जोड़ती हैं। ग्रामीणों का दैनिक आवागमन, बच्चों का स्कूल जाना, मरीज़ों का अस्पताल जाना और खेतों तक पहुंच सब कुछ इन्हीं सड़कों पर निर्भर करता है। ऐसे में सड़कों की स्थिति का सीधा असर ग्रामीणों के जीवन पर पड़ता है।

*पीएचई विभाग का कार्य और लापरवाही*

जब जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में नल जल योजना प्रारंभ की गई, तो ग्रामीणों में काफी उत्साह था। उन्हें विश्वास था कि अब उनके घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा और जल संकट की समस्या से राहत मिलेगी। इस योजना के तहत पीएचई विभाग ने गाँव की सड़कों को खोदकर पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ किया। परंतु पाइपलाइन बिछा देने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। यह लापरवाही अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई है। जो सड़कें पहले समतल और चलने योग्य थीं, वे अब गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। कुछ स्थानों पर खुदी हुई सड़कें जलभराव का कारण बन चुकी हैं, जिससे कीचड़ हो गया है और पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

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