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आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा में पूरा बागरी समाज सिलौड़ी क्षेत्र के मैदान मे, जिसको मानते हैं दिल से आपके लिए तो जान न्यौछावर कर डालेंगे, सिलौड़ी में बागरी समाज ने किया विरोध प्रदर्शन, प्रदीप अहिरवार का किया पुतला दहन, बागरी समाज की गौरव हैं मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी

 आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा में पूरा बागरी समाज सिलौड़ी क्षेत्र के मैदान मे, जिसको मानते हैं दिल से आपके लिए तो जान न्यौछावर कर डालेंगे, सिलौड़ी में बागरी समाज ने किया विरोध प्रदर्शन, प्रदीप अहिरवार का किया पुतला दहन, बागरी समाज की गौरव हैं मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी



ढीमरखेड़ा |  सिलौड़ी में बागरी समाज ने 26 मार्च को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार का पुतला जलाकर अपना रोष व्यक्त किया। यह प्रदर्शन 25 मार्च को प्रदीप अहिरवार द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ था, जिसमें उन्होंने मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी और बागरी समाज के खिलाफ अपशब्दों का उपयोग किया था। इस घटना से पूरे समाज में आक्रोश फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप समाज के नेताओं और गणमान्य नागरिकों ने एकजुट होकर नायब तहसीलदार दिनेश असाटी को ज्ञापन सौंपा और सख्त कार्यवाही की मांग की। बागरी समाज एक सम्मानित और प्रभावशाली समुदाय है, जो मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में फैला हुआ है। समाज के लोग मेहनतकश, ईमानदार और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहते हैं। जब कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग किया गया, तो इससे बागरी समाज में गहरी नाराजगी उत्पन्न हुई। बागरी समाज के लोगों का मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता को किसी समुदाय विशेष के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी, जो समाज की एक सम्मानित नेता हैं, उनके खिलाफ की गई टिप्पणी केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं, बल्कि पूरे बागरी समाज का अपमान है। इसी कारण से समाज के लोगों ने एकत्रित होकर सिलौड़ी में विरोध प्रदर्शन किया और नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

*विरोध प्रदर्शन का आयोजन और प्रमुख सहभागी*

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बागरी समाज के प्रमुख नेताओं ने किया, जिनमें शामिल थे अनिल सिंह बागरी (सरपंच) मनीष बागरी (मंडल अध्यक्ष) राजेंद्र सिंह बागरी (अध्यक्ष, बागरी कल्याण समिति) गोविंद सिंह बागरी (उपाध्यक्ष, बागरी कल्याण समिति) इनके साथ-साथ अन्य समाज के युवा और वरिष्ठ नागरिक भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। उपस्थित लोगों में शामिल थे कपिल बागरी, हेमंत बागरी, अनूप बागरी, पीयूष बागरी, रजनीश बागरी, शिवांशु बागरी,अंकित बागरी, रूद्र बागरी, विकास बागरी साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस स्टाफ भी इस प्रदर्शन के दौरान उपस्थित रहा।

*पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन*

सिलौड़ी के प्रमुख चौक पर प्रदर्शनकारियों ने एकत्रित होकर नारेबाजी की और कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। समाज के लोगों ने कहा कि ऐसे नेताओं को अपने शब्दों पर संयम रखना चाहिए और यदि वे किसी समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। पुतला दहन का उद्देश्य केवल विरोध प्रकट करना नहीं था, बल्कि यह सरकार और प्रशासन तक समाज की आवाज़ पहुंचाने का भी एक तरीका था। विरोध प्रदर्शन के दौरान समाज के नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज आने वाले दिनों में और बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। विरोध प्रदर्शन के बाद, समाज के नेताओं ने नायब तहसीलदार दिनेश असाटी को ज्ञापन सौंपा।

*प्रदीप अहिरवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए*

 समाज का कहना है कि उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी से पूरे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

*मंत्री प्रतिमा सिंह बागरी का सम्मान बनाए रखा जाए*

 समाज की मांग है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में शालीनता होनी चाहिए और किसी भी नेता को अपशब्द कहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। समाज की गरिमा और सम्मान की रक्षा की जाए बागरी समाज का कहना है कि यदि इस तरह के अपमानजनक बयानबाजी को रोका नहीं गया, तो इससे समाज के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचेगी। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं समाज की मांग है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी समुदाय के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी को रोका जा सके।

*समाज की एकजुटता से मचा सिलौड़ी और क्षेत्र मे तहलका*

इस विरोध प्रदर्शन ने बागरी समाज की एकता को प्रदर्शित किया। समाज के नेताओं का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि यदि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करेगा, तो समाज उसे बर्दाश्त नहीं करेगा।बागरी समाज के युवा और वरिष्ठ नागरिक इस घटना के बाद और अधिक संगठित होने की योजना बना रहे हैं। इसके तहत समाज के लोगों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएंगे।सामाजिक एकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सरकार और प्रशासन से यह अनुरोध किया जाएगा कि समाज की गरिमा को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

*प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई*

नायब तहसीलदार दिनेश असाटी ने समाज के नेताओं को आश्वासन दिया कि इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि प्रशासन इस मामले में उचित कदम उठाता है, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। अन्यथा, यदि सरकार और प्रशासन इसे नजरअंदाज करते हैं, तो यह समाज के आक्रोश को और बढ़ा सकता है, जिससे आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन देखने को मिल सकता है।बागरी समाज का यह विरोध प्रदर्शन केवल प्रदीप अहिरवार की टिप्पणी के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह समाज की एकता और गरिमा की रक्षा के लिए था। यह घटना इस बात का संकेत है कि समाज अपने सम्मान के प्रति कितना सजग है और किसी भी तरह के अपमान को सहन करने के लिए तैयार नहीं है। यदि इस प्रकार की बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे समाज में असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए, सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और उचित कार्रवाई करें ताकि भविष्य में कोई भी नेता किसी भी समुदाय के सम्मान को ठेस न पहुंचा सके। यह प्रदर्शन बागरी समाज की शक्ति और एकता का प्रतीक था, जिसने यह संदेश दिया कि उनका आत्मसम्मान सर्वोपरि है और वे इसके लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

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