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मध्यप्रदेश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया सिमरिया के ओम ज्योतिषी ने, तानसेन संगीत शताब्दी समारोह की अद्वितीय समवेत प्रस्तुति ने लोगों का जीता दिल, ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ओम ज्योतिषी की उपलब्धि से खुशी की लहर

 मध्यप्रदेश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया सिमरिया के ओम ज्योतिषी ने, तानसेन संगीत शताब्दी समारोह की अद्वितीय समवेत प्रस्तुति ने लोगों का जीता दिल, ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ओम ज्योतिषी की उपलब्धि से खुशी की लहर 



ढीमरखेड़ा |  ग्वालियर में आयोजित तानसेन संगीत शताब्दी समारोह, मध्यप्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ, जब 546 साधकों ने एक साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश का नाम दर्ज कराया, लिहाज़ा न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक अद्वितीय अवसर था, बल्कि इसने राज्य के सांस्कृतिक और संगीत प्रेमियों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार भी किया। इस आयोजन ने भारतीय संगीत की विविधता और गहराई को प्रदर्शित किया और दर्शकों को भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और गर्व का अहसास कराया। इस भव्य समवेत वाद्ययंत्र प्रस्तुति में, बांसुरी, सितार, सरोद, संतूर, शहनाई, वायलिन, सारंगी और हार्मोनियम जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की स्वर लहरियों ने ग्वालियर के कर्ण महल में एक समृद्ध ध्वनि का आलंबन किया। 546 साधकों ने इन वाद्ययंत्रों पर एक साथ न केवल संगीत की प्रस्तुति दी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की धारा में एक नई कड़ी जोड़ने का कार्य किया। इस काव्यात्मक और कलात्मक समवेत प्रस्तुति ने न केवल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश का नाम दर्ज कराया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी मजबूत किया।

*ओम ज्योतिषी की ऐतिहासिक उपस्थिति*

इस विश्व रिकॉर्ड के आयोजन में मध्यप्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा सिमरिया से ओम ज्योतिषी ने भी भाग लिया। ओम ज्योतिषी, जो कि धर्मेंद्र ज्योतिषी के बेटे हैं, इस आयोजन में गायन के साथ-साथ तबला वाद्य पर भी प्रस्तुति देने के लिए ग्वालियर के कर्ण महल पहुंचे थे। इस समवेत वाद्ययंत्र प्रस्तुति का हिस्सा बनकर ओम ज्योतिषी ने न केवल अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति अपनी श्रद्धा और निष्ठा को भी प्रदर्शित किया। ओम ज्योतिषी का यह योगदान इस क्षेत्र के लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया है। ओम ज्योतिषी के पिता, धर्मेंद्र ज्योतिषी, किसान हैं, अपने बेटे के संगीत में रुचि और क्षमता को हमेशा प्रोत्साहित करते रहे हैं। ओम ज्योतिषी की माता जी पेशे से एक शिक्षक हैं और उन्होंने हमेशा अपने बेटे को शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी प्रगति करने की प्रेरणा दी। यह परिवार, जो भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति अपनी निष्ठा से जाना जाता है, ओम ज्योतिषी के इस अद्वितीय प्रयास से क्षेत्र के लोगों के बीच प्रेरणा का स्रोत बना है।

*ओम ज्योतिषी की मेहनत ने परिवार के लोगों का बढ़ाया मान*

ग्वालियर के कर्ण महल में आयोजित इस समवेत वाद्ययंत्र प्रस्तुति में 546 कलाकारों ने एक साथ अपने-अपने वाद्ययंत्रों पर संगीत की प्रस्तुति दी। इस अद्वितीय प्रयास के दौरान, संगीत के विभिन्न रूपों को एक साथ प्रस्तुत किया गया, जिसमें बांसुरी की मधुर ध्वनियाँ, सितार और सरोद के तारों की सौम्यता, शहनाई और वायलिन की सुरमयी लहरियाँ और तबला वाद्य का लयात्मक संगम शामिल था। इन सभी वाद्ययंत्रों की ध्वनियों ने एक साथ मिलकर ग्वालियर के कर्ण महल को संगीत से भर दिया और यह आयोजन दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। इस समवेत प्रस्तुति के दौरान, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी उपस्थित थी, जिन्होंने इस प्रयास को सफल मानते हुए ग्वालियर में इस आयोजन को मान्यता दी और इसके परिणामस्वरूप गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट और वर्ल्ड रिकॉर्ड का बैंड प्रदान किया गया। इस आयोजन में मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया, जो इस विश्व रिकॉर्ड के महत्व को और बढ़ाता है।

*ओम ज्योतिषी की उपलब्धि से चारों तरफ खुशी की लहर*

ओम ज्योतिषी की इस सफलता ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से एक गौरव प्रदान किया, बल्कि उनके गांव सिमरिया और उनके क्षेत्र के लोगों को भी गर्व महसूस कराया। ओम ज्योतिषी की उपलब्धि ने यह साबित किया कि जब व्यक्ति अपनी मेहनत, समर्पण और अपने परिवार से प्राप्त प्रेरणा के साथ किसी क्षेत्र में कदम रखता है, तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करता है, बल्कि अपने समाज और क्षेत्र को भी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। सिमरिया के लोग इस सफलता को अपनी सफलता मानते हैं और ओम ज्योतिषी को एक आदर्श के रूप में देखते हैं। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। ओम ज्योतिषी की माँ, जो पेशे से शिक्षक हैं, ने अपने बेटे को हमेशा आगे बढ़ने की शिक्षा दी है। उनका यह मार्गदर्शन ओम ज्योतिषी के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

*सामूहिक संगीत की शक्ति*

तानसेन संगीत शताब्दी समारोह में 546 कलाकारों का एक साथ संगीत बजाना न केवल संगीत की एक अद्वितीय प्रस्तुति थी, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और एकता की शक्ति का प्रतीक भी था। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत न केवल भारत के भीतर, बल्कि वैश्विक मंच पर भी सम्मानित किया जाता है। इस संगीत प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय संगीत के विभिन्न रूपों का सम्मान किया गया और भारतीय कला के प्रति सम्मान और प्रशंसा का एक नया अध्याय जोड़ा गया। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आयोजित तानसेन संगीत शताब्दी समारोह में 546 साधकों की समवेत वाद्ययंत्र प्रस्तुति ने न केवल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश का नाम दर्ज कराया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति वैश्विक सम्मान को भी प्रदर्शित किया। ओम ज्योतिषी जैसे कलाकारों के प्रयासों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया और यह साबित कर दिया कि कला, संगीत और संस्कृति के माध्यम से व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है और समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है। ओम ज्योतिषी की सफलता ने इस क्षेत्र के लोगों को प्रेरित किया है और भारतीय संगीत की महिमा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक नया अध्याय लिखा है।

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