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दैंगवां महगवां में बचन सिंह परस्ते की मनमानी चरम पर स्व - सहायता समूह के द्वारा भोजन ख़राब बनवाकर बच्चों को दिलवा रहे ख़राब भोजन बचन सिंह परस्ते अपना खाता नंबर लगवाकर समूह के पैसों का कर रहे गबन अनुदान राशि 3 लाख रूपए का पता नहीं, कलेक्टर दिलीप कुमार यादव करवाएंगे जांच, शिक्षक भी विद्यालय में पाए जाते हैं सोते

 दैंगवां महगवां में बचन सिंह परस्ते की मनमानी चरम पर स्व - सहायता समूह के द्वारा भोजन ख़राब बनवाकर बच्चों को दिलवा रहे ख़राब भोजन बचन सिंह परस्ते अपना खाता नंबर लगवाकर समूह के पैसों का कर रहे गबन अनुदान राशि 3 लाख रूपए का पता नहीं, कलेक्टर दिलीप कुमार यादव करवाएंगे जांच, शिक्षक भी विद्यालय में पाए जाते हैं सोते



ढीमरखेड़ा | दैंगवां महगवां में स्व-सहायता समूहों द्वारा चलाए जा रहे भोजन कार्यक्रमों में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की समस्या गंभीर हो गई है। इस मामले में बचन सिंह परस्ते की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन पर आरोप है कि उन्होंने स्व-सहायता समूहों द्वारा बच्चों के लिए बनवाए जा रहे भोजन को जानबूझकर खराब तरीके से तैयार करवाया, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, बचन सिंह परस्ते पर यह भी आरोप है कि उन्होंने स्व-सहायता समूह के पैसों का गबन किया और अपने खाते का नंबर लगवाकर अनुदान राशि का दुरुपयोग किया है।

*स्व-सहायता समूहों में अनियमितताएँ*

स्व-सहायता समूहों का मुख्य उद्देश्य होता है ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना। ये समूह विभिन्न प्रकार की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जिनमें से एक प्रमुख गतिविधि है स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करना। लेकिन दैंगवां महगवां में चल रहे इस कार्यक्रम में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। बचन सिंह परस्ते, जो इस कार्यक्रम की देखरेख कर रहे थे, पर आरोप है कि उन्होंने स्व-सहायता समूह के कामकाज में हस्तक्षेप करते हुए भोजन की गुणवत्ता को प्रभावित किया। बच्चों को जो भोजन दिया जा रहा था, उसकी गुणवत्ता में कमी थी, और यह भोजन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता था। भोजन में इस्तेमाल की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता खराब थी, और उसे बनाने की प्रक्रिया में भी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया। इससे बच्चों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कई बच्चों ने इस भोजन को खाने के बाद पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की।

*बचन सिंह परस्ते पर लगे आरोप*

बचन सिंह परस्ते पर यह आरोप है कि उन्होंने स्व-सहायता समूहों के पैसों का गबन किया है। यह गबन सीधे तौर पर समूह के खाते में अपना निजी खाता नंबर लगवाकर किया गया है। स्व-सहायता समूहों को सरकारी योजनाओं के तहत अनुदान मिलता है, जिसका उद्देश्य बच्चों के भोजन और अन्य गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना होता है। लेकिन बचन सिंह परस्ते पर आरोप है कि उन्होंने इस अनुदान राशि का गलत इस्तेमाल किया और 3 लाख रुपए की अनुदान राशि का कोई हिसाब नहीं है। यह रकम स्व-सहायता समूहों को दी गई थी ताकि बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन और अन्य आवश्यक सामग्रियाँ उपलब्ध करवाई जा सकें, लेकिन इस रकम का इस्तेमाल अन्यत्र किया गया।यह आरोप भी सामने आए हैं कि बचन सिंह परस्ते ने समूह के सदस्यों को दबाव में रखा और किसी भी प्रकार की शिकायत करने से रोका। उन्होंने समूह की महिलाओं को धमकाया कि अगर उन्होंने उनके खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें समूह से बाहर कर दिया जाएगा। इस प्रकार, उन्होंने स्व-सहायता समूहों के कार्यों में अपनी मनमानी चलाई और किसी भी प्रकार की पारदर्शिता का पालन नहीं किया।

*कलेक्टर दिलीप कुमार यादव करवाएंगे जांच*

खराब भोजन की वजह से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्कूलों में दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है ताकि उनकी शारीरिक और मानसिक विकास में सहायता हो। लेकिन दैंगवां महगवां में यह कार्यक्रम अपने उद्देश्य से भटक गया है। भोजन में इस्तेमाल की जा रही सामग्रियाँ सस्ती और खराब गुणवत्ता की हैं, जिसके कारण बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। कई बच्चों को इस भोजन को खाने के बाद उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएँ हो रही हैं। कुछ मामलों में बच्चों को अस्पताल में भर्ती तक करवाना पड़ा है। यह स्थिति गंभीर है क्योंकि इससे न केवल बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल में उचित आहार नहीं मिल रहा है, जिसके कारण उनकी एकाग्रता और पढ़ाई में रुचि भी घट रही है।

*सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार*

यह मामला स्व-सहायता समूहों में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य है कि समाज के कमजोर वर्गों को मदद पहुंचाई जाए, लेकिन जब इन योजनाओं में शामिल अधिकारी और जिम्मेदार लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। दैंगवां महगवां में भी यही हो रहा है। सरकारी अनुदान राशि का सही उपयोग न होने के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल पा रहा है, और जो पैसा उनके भोजन और स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए था, वह निजी स्वार्थों के चलते दुरुपयोग हो रहा है।

*प्रशासन बहुत जल्द करेगा कार्यवाही*

स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी इस मामले में सवालों के घेरे में है। कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी प्रशासन ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बचन सिंह परस्ते के खिलाफ कोई जांच नहीं हुई, और वे अपनी मनमानी जारी रखे हुए हैं। यह प्रशासन की विफलता को दर्शाता है कि वे इन अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं कर पाए। अगर प्रशासन समय पर इस मुद्दे का संज्ञान लेता और बचन सिंह परस्ते के खिलाफ उचित कार्रवाई करता, तो शायद बच्चों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।

*विभागीय जांच होगी जल्द तलब*

इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब सरकार और प्रशासन मिलकर इस मामले की जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। बचन सिंह परस्ते पर लगे आरोपों की विस्तृत जांच होनी चाहिए और अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए सुधार किए जाने चाहिए। स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए जरूरी है कि उन्हें सही दिशा-निर्देश दिए जाएं और उनका प्रशिक्षण किया जाए ताकि वे भ्रष्टाचार से दूर रहकर ईमानदारी से काम कर सकें। बच्चों के भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए, और अगर किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा, सरकारी अनुदान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। हर अनुदान राशि का हिसाब रखा जाना चाहिए, और इसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी समय - समय पर जांच होनी चाहिए। अगर कहीं भी पैसों का दुरुपयोग हो रहा है, तो तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

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