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कलेक्टर की नियमित समीक्षा से कटनी जिले में मातृ मृत्यु दर में आई भारी कमी संस्थागत प्रसव में हुई वृद्धि : घर में होने वाले प्रसव में आई कमी कलेक्टर का नवाचार जोखिम वाली गर्भवती महिलाओ का घर-घर जाकर किया गया चिन्हांकन दिया गया परामर्श,की गई नियमित जांचें, दीं गईं दवाइयां

 कलेक्टर की नियमित समीक्षा से कटनी जिले में मातृ मृत्यु दर में आई भारी कमी संस्थागत प्रसव में हुई वृद्धि : घर में होने वाले प्रसव में आई कमी कलेक्टर का नवाचार जोखिम वाली गर्भवती महिलाओ का घर-घर जाकर किया गया चिन्हांकन दिया गया परामर्श,की गई नियमित जांचें, दीं गईं दवाइयां



कटनी ।  ज़िले में बेहतर हुई स्वास्थ्य सुविधाओं की  वजह से मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और जीवन प्रत्याशा बढ़ी है। जिले के मातृ मृत्यु दर में कमी लाने सुनियोजित कार्ययोजना के तहत कलेक्टर श्री अवि प्रसाद द्वारा प्रसव पूर्व रेफ़रल प्रकरणों की निरंतर समीक्षा की जाती रही है और मातृ सुरक्षा के लिए नवाचार के तहत  गर्भवती महिलाओ के घर-घर  जाकर चिन्हित कर उन्हें परामर्श और उपचार दिया गया। इससे वर्ष 2023के प्रथम 4माहों के दौरान जो मातृमृत्यु दर 250 प्रति लाख थी,वह अब घटकर चालू साल के पहले 4 माहों में 116 प्रति लाख हो गई ।जो राज्य के औसत मातृमृत्यु दर  173 प्रति लाख के आंकड़े से कम है।

*संस्थागत प्रसव में वृद्धि: घर के प्रसव में कमी*

कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा किए गए  नवाचारों के परिणामस्वरूप जिले में संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है और घर में करायें जाने वाले प्रसव में काफी कमी आई है।पिछले 3 वर्षों के आकड़ों की तुलना की जाए तो घर में होने वाला प्रसव जो वर्ष 2021-22 में 743 था वह अब वर्ष 2023-24 में घटकर मात्र 111 ही रह गया है। वर्ष 2021-22 में जिले में कुल प्रसव की संख्या 20 हजार 639 थी जिसमें संस्थागत प्रसव की संख्या 18 हजार 740  निजी अस्पतालों में प्रसव की संख्या 1 हजार 156 तथा घर पर प्रसव की संख्या 743 थी। इसी तरह वर्ष 2022-23 में जिले में कुल प्रसव की संख्या 24 हजार 39 थी ,जिसमें संस्थागत प्रसव की संख्या 21 हजार 386 और निजी अस्पतालों में प्रसव की संख्या 2 हजार 267 तथा घर पर प्रसव की संख्या 386 थी। वहीं वर्ष 2023- 24 में कुल प्रसव की संख्या 22 हजार 845 में संस्थागत प्रसव की संख्या 21 हजार 736  निजी अस्पतालों में प्रसव की संख्या 998 तथा घर पर प्रसव की संख्या 111 ही रही है।

*4 माह में 56 शिविर आयोजित*

जिले में प्रति माह की 9 व 15 तारीख को शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओ की शासकीय और निजी चिकित्सकों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर जांच की जाती है। इसके लिए 4 माह की अवधि में ही  कुल  56 शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 2 हजार 454 महिलाओं का परीक्षण करते हुए 550 जोखिम वाले रोगियों का उचित उपचार हेतु चिन्हांकन किया गया। जिसमे से 118 रोगी उच्चतम जाँच हेतु रिफर किए गए। साथ ही  387 हाई रिस्क चिन्हित की गई गर्भवती महिलाओ को संभावित प्रसव तिथि से एक सप्ताह पूर्व जिला चिकित्सालय में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में रखा जाएगा।

*बोलते आंकड़े: गर्भवती माताओं को परामर्श देने में 529 प्रतिशत की वृद्धि*

जिले में इसी साल के जनवरी माह से  मातृत्व सुरक्षा अभियान शुरू किया गया । जिससे कई स्वास्थ्य मानकों के आंकड़ों में बीते साल की तुलना में   5सौ फीसदी से ज्यादा तक का सुधार दर्ज किया गया है।वर्ष 2023के प्रथम 4 माह में स्त्री रोग विशेषज्ञों का परामर्श जहां केवल मात्र 258 गर्भवतियों को मिला था ,वहीं वर्ष 2024 के पहले 4 माहों में ही रिकॉर्ड 1623 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य परामर्श दिया गया।इस प्रकार परामर्श प्राप्त करने वाली महिलाओं के आंकड़े में इस साल  529 प्रतिशत की वृद्धि हुई । इसी प्रकार वर्ष 2023 में जहां पुराने ऑपरेशन प्रसव जोखिम का परीक्षण केवल 52 महिलाओं का हुआ था, वहीं वर्ष 2024 में यह बढकर 173 हो गया है। इस प्रकार प्रसव जोखिम परीक्षण के मामले मे 232 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2023  के प्रथम चार माहों में जहां परीक्षित गर्भवती महिलाओं की संख्या महज 1111 थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 2241  हो गई और इसमें 102 प्रतिशत की वृद्वि हुई है। वहीं वर्ष 2023 की आलोच्य अवधि में प्रथम बार आई महिलाओं की संख्या जहां 808 थी, वहीं 2024 में यह संख्या 1290 हो गई।इस प्रकार इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार हिमोग्लोबिन जांच करानें वाली महिलाओं की संख्या जहां वर्ष 2023 में मात्र 1084 थी , जो वर्ष 2024 में 2214 हो गई और इस जांच में तुलनात्मक तौर पर 104 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार वर्ष 2023 में उच्च जोखिम का चिन्हांकन करने वाली महिलाओं की संख्या 170 से वर्ष 2024 में 387 हो जाने के कारण 128 प्रतिशत , वर्ष 2023 में खून की कमी का चिन्हांकन करनें वाली महिलाओं की संख्या में 41 से वर्ष 2024 में 86 हो जाने से  110 प्रतिशत, कुल उच्च रक्तचाप का चिन्हांकन जहां वर्ष 2023 में 21 महिलाओं द्वारा कराया गया था वहीं 2024 में इसकी  संख्या 99 हो गई और इसमें  371 प्रतिशत की वृद्धि हुई ।गर्भ के साथ मधुमेह का चिन्हांकन वर्ष 2023 में मात्र 7 महिलाओं द्वारा कराया गया , वहीं वर्ष 2024 के प्रथम 4 माह में ही  25 महिलाओं का मधुमेह परीक्षण किया गया।इस प्रकार इसमें क 257 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। शासकीय चिकित्सकों एवं मैदानी स्वास्थ्य अमले की मेहनत और निजी चिकित्सकों की समन्वित भागीदारी  से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के क्षेत्र  में अभूतपूर्व सुधार हुआ है और जिले के मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आई है।

*इन पर ध्यान देने से सुधरा आंकड़ा*

 कलेक्टर द्वारा जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों  के नियमित पर्यवेक्षण और अनुश्रवण से गर्भवतियों और शिशुवतियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए संचालित सुपोषण अभियान से काफी मदद मिली। वहीं  मातृत्व स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल और गर्भवतियों और शिशुवतियों को हर तरह का इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार सुदृढ़ीकरण किया गया। ज्यादा जोखिम वाली गर्भवतियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर स्वास्थ्य महकमे की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई।

 *कलेक्टर की नियमित समीक्षा*

 बताते चलें कि कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा नियमित तौर पर  गर्भवती महिलाओं की  जानकारी के साथ हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले केसों का चिन्हीकरण कर नियमित फोलोअप किया जाता रहा है। इससे प्रसव के समय जिले में गर्भवती माताओं की अकाल मृत्यु दर कम हुई। साथ ही नियमित जागरूकता, टीकाकरण और समय पर उपचार के समन्वित प्रयासों से मातृ मृत्यु दर के साथ -साथ शिशु मृत्यु दर में भी गिरावट दर्ज की गई।कटनी जिले की मातृ मृत्यु दर में आई  बड़ी गिरावट की यह  उपलब्धि जिले ने स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास और जोखिम वाली गर्भवती महिलाओ के घर-घर जाकर चिन्हित कर उनके जांच एवं उपचार पर विशेष ध्यान देकर हासिल किया है।कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा  अपनायें गये नवाचारों की वजह से गुणवत्तापूर्ण मातृ और प्रजनन देखभाल सुनिश्चित हुईं ।इससे जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं ,गर्भावस्था और प्रसव या फिर गर्भपात के दौरान होने वाले कॉम्प्लीकेशंस  में कमी आई  और विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल पहलुओं में सुधार से मातृ मृत्यु दर को नीचे लाने में मदद मिली ।

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