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*नाम किसी और का काम बाबू केशव प्रसाद परौहा का* *बिना चढ़ोत्तरी के नहीं होता काम, जनपद ऑफिस ढीमरखेड़ा का मामला* *बाबू केशव प्रसाद परौहा अंगद के पैर की तरह जमे नहीं हों रहा स्थानांतरण*

 *नाम किसी और का काम बाबू केशव प्रसाद परौहा का*

*बिना चढ़ोत्तरी के नहीं होता काम, जनपद ऑफिस ढीमरखेड़ा का मामला*

*बाबू केशव प्रसाद परौहा अंगद के पैर की तरह जमे नहीं हों रहा स्थानांतरण*



उमरियापान ।  लंबे समय से पदस्थ ढीमरखेड़ा जनपद में बाबू केशव प्रसाद परौहा होने के कारण विभाग की गोपनीय बातों को जानकर विभाग के अंदर जमकर मलाई काट रहे हैं ऐसा सूत्रों के द्वारा बताया गया। शासन के नियमानुसार 3 वर्ष से अधिक समय होने के बाद स्थानांतरण का प्रावधान हैं लेकिन ऐसा जान पड़ता हैं जैसे बाबूओं के लिए कोई नियम ही नहीं हैं। एक बार पदस्थ होने के बाद अपनी कुर्सी छोड़ी ही नहीं जाती। स्मरण रहे इनका स्थानांतरण भी नहीं हुआ,स्थानांतरण ना होने का खामियाजा चुनाव आयोग को भुगतना पड़ सकता हैं। विदित हों कि विभागीय कामों में बाबूओं का अहम रोल होता हैं। फाइल भी इन्ही की मेहरबानी से उच्च - अधिकारियों तक पहुंचती हैं और अगर उसमें लक्ष्मी का वजन ना हो तो फाइल भी साहब की मेहरबानी से अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं। अगर इसी तरह का कार्य जनपद मे चलता रहा तो शांत और सीधे - साधे लोग शिकार होते रहेंगे।

*जनपद में बिना लक्ष्मी के नहीं बढ़ती फाइल*

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद ढीमरखेड़ा में पदस्थ बाबू केशव प्रसाद परौहा द्वारा बिना रिश्वत के काम नहीं किया जाता। कुछ कर्मचारियों के द्वारा बताया गया कि बाबू केशव प्रसाद परौहा द्वारा बिना रिश्वत के कोई भी काम नहीं किया जाता हैं और जनपद में विभिन्न मदो से शासन से राशि प्राप्त होती हैं जिसका आहरण करने के लिए पहले बाबू को पैसा देना पड़ता हैं। आगे सूत्रों ने यह भी बताया कि बाबू केशव प्रसाद परौहा के द्वारा विभिन्न प्रकरणों में जमकर लेन - देन किया जाता हैं और जो कर्मचारी बाबू केशव प्रसाद परौहा को रिश्वत नहीं देता तो उनके प्रकरणों का निपटारा नहीं किया जाता हैं और बाबू केशव प्रसाद परौहा के द्वारा नियमों की झड़ी लगा दी जाती हैं जिससे परेशान होकर संबंधित कर्मचारी रिश्वत देने के लिए मजबूर हों जाता हैं।

*लोकसभा चुनाव हों सकता हैं प्रभावित नहीं हों रहा स्थानांतरण*

सूत्रों ने बताया कि बाबू केशव प्रसाद परौहा की पदस्थापना जनपद ऑफिस ढीमरखेड़ा में हुई थीं तब से यहां लम्बे अरसे से बाबू केशव प्रसाद परौहा यही पदस्थ हैं। इस बीच चुनाव आयोग द्वारा कई चुनाव संपन्न करवाये गए और हर चुनाव के पहले इस संबंध में संबंधित विभाग प्रमुख से यह जानकारी मांगी जाती हैं कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी तीन वर्ष से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हों तो इस संबंध में अवगत कराकर उसे अन्यंत्र पदस्थ किया जावे स्मरण रहे कि बाबू केशव प्रसाद परौहा लंबे समय से एक स्थान पर पदस्थ बाबू केशव प्रसाद परौहा को अन्यंत्र पदस्थ क्यों नहीं किया जाता हैं क्या इस संबंध में विभाग प्रमुख द्वारा यह जानकारी छिपाई जाती हैं कि लंबे समय से यहां पर पदस्थ हैं या फिर चुनाव आयोग को भी अंधेरे में रखा जाता हैं।

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