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विचार -द्वन्द के पात्रों में अभी मथा जा रहा है कटनी विजयराघवगढ़ और बहोरीबंद के मक्खन -प्रत्याशी का मठ्ठा जल्द निकलेंगी बटर -टिक्कियां और तह में जाने वाले नामों से उफ़नाएगा असंतोष का फेन

 विचार -द्वन्द के पात्रों में अभी मथा जा रहा है कटनी विजयराघवगढ़ और बहोरीबंद के मक्खन -प्रत्याशी  का मठ्ठा


जल्द निकलेंगी बटर -टिक्कियां और तह में जाने वाले नामों से उफ़नाएगा असंतोष का फेन


ढीमरखेड़ा l प्रत्याशी के नामों से मुंह तक भरी हुई एक - एक हांडी को मथने की मशक्क़त कर रहे दिल्ली में बैठे राष्ट्रीय स्तर के मथानेबाजों ने अपनी पहली मथानी में 144 हंडियों को मथने के बाद ऊपर आए मक्खन नामों की घोषणा कर दी है , इसमें कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा  ( हांडी ) से पुराना मक्खन नाम बसंत सिंह का ही रखा गया है ,  लेकिन तीन बड़ी हांडियां कटनी विजयराघवगढ़ और बहोरीबंद में अंतिम मथानी पूरी होने तक मक्खन नाम सामने आएँगे।144 हंडियों के मंथन से निकले नामों की सूची में बड़वारा से राघवेंद्र प्रताप सिंह ' बसंत सिंह ' पर कांग्रेस ने दोबारा यकीन किया है जिले की शेष तीन हंडिओं को मथा जा रहा है l 

कांग्रेस के अंदर खाने से कभी खबर आती है कि कटनी की हांडी में आज विजेंद्र मिश्रा राजा भैया या अगले दिन प्रेम बत्रा का नाम है तो अगले घंटे में अप्रत्याशित रूप से निशीथ पटैल का नाम उतराने लगता है l  जो भी हो यह पार्टी की नीतिगत बात है कि वह किसे वरियता देती है कटनी में युवा दावेदार भी हैं जो विपक्ष की भूमिका निभाने में सड़क पर हमेशा दिखाई दिए l  एन एस यू आई के अंशु मिश्रा नगर निगम में सत्ता पक्ष को चुनौती देने वाले मौसूफ़ अहमद बिट्टू जिलाध्यक्ष विक्रम खम्परिया के नाम इस मंथन में तल पर गए तो कांग्रेस में भी टिकट घोषित होने के बाद असंतोष का फेन पार्टी की विजयी चमक को धूमिल कर सकता है l शायद यही वजह है की किसी एक नाम पर सहमति बन पाना आसान नहीं रह गया है l बहोरीबंद में पूर्व विधायक सौरभ सिंह सिसोदिया का नाम कभी ऊपर तो कभी हांडी की तलहटी में होने की खबर आने लगती है l क्योंकि यहाँ से निशीथ पटैल भी परपार्टी भ्रमण के बाद वापस लौट आए हैं और उनका दावा मजबूती पकड़े हुए है तो उसकी वजह कांग्रेस की राजनीति में उनके परिवार की प्रतिष्ठित साझेदारी हमेशा बनी रही है और यह कांग्रेस समर्थक घराना रहा है l लेकिन ज़ब उनका नाम कटनी मुरवारा से बतौर प्रत्याशी लिया जाता है तो मतदाता दांतो तले ऊँगली पहले दबाता है , कांग्रेस कार्यकर्ता की घिग्गी बाद में बंधती है l  


ध्रुवप्रताप सिंह का पहली सूची में न आने पर भिन्न - भिन्न मत


मध्यप्रदेश की हारी हुई लगभग 66 विधानसभाओं पर पूर्व सी एम दिग्विजय सिंह की निर्णायक दृष्टि है l उस हिसाब से विजयराघवगढ़ से ठाकुर ध्रुवप्रताप सिंह की घोषणा पहली सूची में अवश्य हो जानी चाहिए थी l लेकिन उनका नाम ना आने पर विभिन्न चर्चाएं हैं l क्या इस सीट पर जातिगत हिसाब किताब वाला वोट गणित कहीं संशय उत्पन्न कर रहा है कि फलां जाति का वोटर जो बड़ी संख्या में है वह साधा जा सकेगा यदि नहीं सधा तो कांग्रेस सम्मानजनक संघर्ष की स्थिति में भी नहीं रह जाएगी वहीं भाजपा भी कहीं चिंतित होती है कि कुछ भी हो ध्रुवप्रताप सिंह भाजपाई विधायक चुने गए थे तो आज भी उनके पास जो टीम है उसमें भाजपाई ही अधिक होंगे l इस लिहाज से भाजपा किसी अन्य प्रत्याशी को बनते हुए देखना चाहती है l लेकिन पहली लिस्ट में नाम न आने से लग रहा है कि यहाँ से संदीप बाजपेई और नीरज सिंह बघेल के नाम अंतिम विचार मंथन चक्र तक चलेंगे l दिग्गी राजा और अजय सिंह राहुल भैया की नजदीकियों को देखते हुए ध्रुवप्रताप सिंह का प्रत्याशी बनाया जाना तय सा माना जाता है और वे अपने क्षेत्र में नियमित जन सम्पर्क भी कर रहे हैं l पहली सूची में उनके नाम ना आने के कारण थोड़ा सा शुबहा होता है कि शायद वहां भी कोई दूसरा नाम विचार मंथन में चल रहा है l क्योंकि इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रत्याशी संजय पाठक ब्राह्मण वर्ग से आते हैं उन्हें सजातीय समर्थन स्वाभाविक रूप से मिलता रहा है l ज़ब पदमा शुक्ला उनके सामने थीं तो चुनाव बेहद नजदीकी और टशन वाला हो जाता है l पार्टी उन्हें अन्य सम्माननीय पद पर मनोनयन करने का भरोसा दिलाकर ब्राह्मण वोटों को ध्रुवप्रताप सिंह के समर्थन में लाने का प्रयास करती नजर आ रही है l इस प्रयास में कहीं कमी सी थी शायद इसी के चलते पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं आ पाया लेकिन फाइनल की दौड़ में बना रहेगा l ब्राह्मणों तथा ठाकुर मतदाताओं के बीच इस विधानसभा में सिर्फ एक बार बंटवारा नहीं हुआ था और वह समय था भाजपा के कद्दावर नेता ठाकुर राजेंद्र सिंह बघेल का जिन्होने दो - दो बार ब्राह्मण मतदाता का समर्थन जीत लिया था और उन्हीं का प्रभाव था कि ध्रुवप्रताप सिंह को स्व. सतेन्द्र पाठक जैसे विराट स्वरूप वाले राजनेता को पराजय स्वीकार करनी पड़ी थी l आज श्री बघेल जैसा नेता यहाँ कोई नहीं हैं ,जो यहां के ब्राह्मणों को साध सके l कुल मिलाकर अगले दो दिनों में स्थिति सामने आ जाएगी और भाजपा के साथ कांग्रेस का असंतोष का आंकलन करके दोनों पारम्परिक प्रतिद्वंन्दी भाजपा - कांग्रेस अपनी विजय रचना की नीति बनाएंगे l

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