अतरिया में शासकीय राशन दुकान पर अनियमितताओं का आरोप रिटायर होने के बाद भी राजेश श्रीवास्तव दुकान का कर रहे हैं, हितग्राहियों को अनाज के बदले पैसे देने की शिकायत, खमतरा समिति प्रबंधक कलम पाण्डेय की मिलीभगत से चल रहा हैं कार्य
अतरिया में शासकीय राशन दुकान पर अनियमितताओं का आरोप रिटायर होने के बाद भी राजेश श्रीवास्तव दुकान का कर रहे हैं, हितग्राहियों को अनाज के बदले पैसे देने की शिकायत, खमतरा समिति प्रबंधक कलम पाण्डेय की मिलीभगत से चल रहा हैं कार्य
कटनी | ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अतरिया में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्रामीणों द्वारा लगातार यह शिकायत की जा रही है कि दुकान का संचालन नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है। आरोप है कि दुकान का संचालन एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, जो सेवानिवृत्त हो चुका है, इसके बावजूद वह अब भी दुकान पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।इतना ही नहीं, हितग्राहियों को मिलने वाले खाद्यान्न वितरण में भी भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दुकान से जुड़े राजेश श्रीवास्तव, जो कि पहले इस व्यवस्था से जुड़े हुए थे, अब रिटायर हो चुके हैं। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी वे दुकान के संचालन में हस्तक्षेप कर रहे हैं और व्यवस्थाओं को अपने हिसाब से चला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है, क्योंकि शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों और समितियों को ही संचालन का अधिकार दिया जाता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अति गरीब वर्ग के लिए बनाए गए पीले राशन कार्ड धारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं दिया जा रहा है। नियमों के अनुसार, पीले कार्ड धारकों को सरकार द्वारा बेहद रियायती दरों पर गेहूं, चावल एवं अन्य आवश्यक खाद्यान्न प्रदान किया जाता है, ताकि उनकी आजीविका सुचारू रूप से चल सके। लेकिन अतरिया की इस दुकान में, हितग्राहियों को अनाज देने के बजाय नकद पैसे थमा दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्हें कहा जाता है कि “अभी अनाज नहीं आया है, पैसे ले लो और बाद में देखेंगे।” लेकिन बाद में भी उन्हें अनाज नहीं मिल पाता। इस तरह की व्यवस्था न केवल गरीबों के हक पर डाका डाल रही है, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की मंशा को भी विफल कर रही है।इस पूरे मामले में खमतरा समिति के प्रबंधक कलम पाण्डेय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना समिति प्रबंधक की जानकारी और सहमति के इस तरह की अनियमितताएं संभव नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रबंधक की मिलीभगत से ही यह पूरा खेल चल रहा है और नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। गौरतलब है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गरीबों के लिए एक जीवनरेखा के समान है। सरकार द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के कमजोर वर्गों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। लेकिन जब इसी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितता घुस जाती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन गरीब परिवारों को होता है, जो इस पर पूरी तरह निर्भर होते हैं। यदि किसी उचित मूल्य दुकान में अनाज के स्थान पर पैसे दिए जा रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, इस तरह के मामलों में जिला प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच करानी चाहिए, ताकि दोषियों को चिन्हित कर उचित दंड दिया जा सके।

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