सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला, बहोरीबंद जनपद पंचायत में संविदा कर्मी अखिलेश वर्मा पर गंभीर आरोप लखपतियों को मिला गरीबों का हक, नाम परिवर्तन में कथित मास्टरमाइंड की भूमिका उजागर, ‘अंगद के पांव’ बने प्रभारी, बहोरीबंद जनपद में पीएम आवास योजना सवालों के घेरे में

 प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला,  बहोरीबंद जनपद पंचायत में संविदा कर्मी अखिलेश वर्मा पर गंभीर आरोप

लखपतियों को मिला गरीबों का हक, नाम परिवर्तन में कथित मास्टरमाइंड की भूमिका उजागर, ‘अंगद के पांव’ बने प्रभारी, बहोरीबंद जनपद में पीएम आवास योजना सवालों के घेरे में



कटनी । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), जिसका उद्देश्य गरीब, बेघर और कच्चे मकानों में जीवन यापन कर रहे परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, वही योजना बहोरीबंद जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जनपद पंचायत बहोरीबंद में पदस्थ संविदा कर्मी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभारी अखिलेश वर्मा पर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनमें योजना के मूल उद्देश्य को तार-तार करने का आरोप लगाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बहोरीबंद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों को न देकर कथित रूप से आर्थिक रूप से संपन्न और लखपति वर्ग के लोगों को दिलाया गया, जबकि पात्र गरीब परिवार आज भी कच्चे मकानों या झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।

*“अंगद के पांव” की तरह जमे प्रभारी*

स्थानीय लोगों और पंचायत स्तर के कई जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अखिलेश वर्मा वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं और उनके हटने या स्थानांतरण को लेकर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि वे “अंगद के पांव” की तरह इस पद पर जमे हुए हैं और उनके बिना इच्छा के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित कोई भी कार्य चाहे वह सर्वे सूची हो, नाम जोड़ना हो, नाम काटना हो या स्वीकृति प्रक्रिया बिना कथित चढ़ोत्तरी के संभव नहीं है।

*बिना “लक्ष्मी” के नहीं मिलता आवास*

ग्रामीण अंचलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि यदि कोई पात्र हितग्राही बिना पैसे दिए आवेदन करता है, तो उसका नाम या तो सूची में शामिल नहीं किया जाता या फिर बाद में तकनीकी कारण बताकर हटा दिया जाता है। कई मामलों में तो एक ही परिवार के नाम से स्वीकृत आवास को बाद में किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिए जाने के आरोप भी लगे हैं।सूत्र बताते हैं कि कई ऐसे परिवार, जिनके पास पहले से पक्का मकान, कृषि भूमि, वाहन और पर्याप्त आय के साधन मौजूद हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया गया। वहीं, अनुसूचित जाति, जनजाति, विधवा, दिव्यांग और अत्यंत गरीब वर्ग के लोग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

*नाम परिवर्तन का खेल, मास्टरमाइंड की भूमिका*

सबसे गंभीर आरोप प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम परिवर्तन को लेकर सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि स्वीकृत आवासों में हितग्राही का नाम बदलने का एक पूरा तंत्र विकसित कर लिया गया है। पहले किसी गरीब के नाम आवास स्वीकृत कराया जाता है और बाद में दस्तावेजों में हेरफेर कर उसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया जाता है। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल के पीछे योजना प्रभारी अखिलेश वर्मा की कथित मास्टरमाइंड भूमिका रही है। बिना उनकी अनुमति के नाम परिवर्तन संभव नहीं बताया जा रहा। यही कारण है कि कई मामलों में शिकायतें होने के बावजूद फाइलें दबा दी गईं।

*पंचायत स्तर से लेकर जनपद तक मिलीभगत*

यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पंचायत स्तर से लेकर जनपद स्तर तक कुछ कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई शिकायत करता है तो उसे डराया-धमकाया जाता है या उसके कार्य जानबूझकर लंबित कर दिए जाते हैं। कुछ सरपंचों और रोजगार सहायकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार ऊपर से दबाव बनाकर सूची में बदलाव कराया गया।

*जांच की मांग तेज, होना चाहिए कार्यवाही*

अब जब यह मामला सार्वजनिक हो रहा है, तो क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और राज्य शासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के आवास घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। साथ ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजना, जिसे गरीबों के सपनों का घर कहा जाता है, यदि इसी तरह भ्रष्टाचार का शिकार होती रही तो शासन-प्रशासन की छवि पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे।केंद्र और राज्य सरकार लगातार पारदर्शिता की बात करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है।

टिप्पणियाँ

popular post

कल तक जो बच्चों को सपने सजाना सिखाती थीं, आज खुद खामोश होकर सबको रुला गईं उनकी मुस्कान, उनकी बातें रहेंगी सदा याद, ऐसे ही नहीं मिलता जीवन में उनका साथ अचानक हृदयगति रुकने से शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

 कल तक जो बच्चों को सपने सजाना सिखाती थीं, आज खुद खामोश होकर सबको रुला गईं उनकी मुस्कान, उनकी बातें रहेंगी सदा याद, ऐसे ही नहीं मिलता जीवन में उनका साथ अचानक हृदयगति रुकने से शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर कटनी | कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम सिमरिया की निवासी शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी का बीती रात्रि अचानक हृदयगति रुक जाने से दुखद निधन हो गया।उनके असामयिक निधन की खबर से पूरे क्षेत्र सहित शिक्षक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। विजय लक्ष्मी ज्योतिषी, देवेंद्र ज्योतिषी (गुड्डू मालगुजार) की धर्मपत्नी थीं। वे अपने सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनके निधन से शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार उनके निज ग्राम सिमरिया में संपन्न किया जाएगा। ढीमरखेड़ा एवं कटनी के शिक्षक समुदाय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति शांति शा...

सगौना डैम में दर्दनाक हादसा, 15 वर्षीय बालक की डूबने से मौत, एक की हालत गंभीर थी अब सुरक्षित

 सगौना डैम में दर्दनाक हादसा, 15 वर्षीय बालक की डूबने से मौत, एक की हालत गंभीर थी अब सुरक्षित ढीमरखेड़ा ।  ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सगौना डैम में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां मछली पकड़ने गए एक 15 वर्षीय बालक की पानी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक मोहित बैगा पिता कैलाश बैगा उम्र लगभग 15 वर्ष, निवासी ग्राम कोठी, थाना ढीमरखेड़ा, दिनांक 30 मार्च 2026 को दोपहर करीब 1 बजे अपने साथियों अजीत बैगा एवं अन्य गांव के लड़कों के साथ सगौना डैम के पुल पर मछली पकड़ने गया था। इसी दौरान पुल के भीतर तेज बहाव वाले पानी में वह फंसकर डूब गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद अजय बैगा और सुन्नू बैगा ने प्रयास कर मोहित को पानी से बाहर निकाला।परिजन भी मौके पर पहुंच गए। उस समय मोहित के कपड़े पूरी तरह भीगे हुए थे और वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। घायल अवस्था में तत्काल 108 एम्बुलेंस की सहायता से उसे शासकीय अस्पताल उमरियापान ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषि...

बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब सरपंच पुत्र चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग

 बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब  सरपंच पुत्र  चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग कटनी । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकल पिपरिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहां की निर्वाचित सरपंच पान बाई के नाम पर पंचायत का संचालन होने के बजाय उनके पुत्र राजेश पटेल उर्फ पिल्लू द्वारा कथित रूप से सभी निर्णय लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कामकाज में नियमों को दरकिनार कर प्रॉक्सी सिस्टम चलाया जा रहा है, जो न केवल पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है बल्कि कानून का भी उल्लंघन है। *सरपंच के अधिकारों का कथित दुरुपयोग* ग्रामीणों के अनुसार पंचायत बैठकों से लेकर निर्माण कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और योजनाओं के क्रियान्वयन तक अधिकांश फैसले सरपंच के बजाय उनके पुत्र द्वारा किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति “सरपंच पति” मॉडल से भी आगे बढ़कर अब “सरपंच पुत्र” मॉडल में बदल गई है, जहां वास्तविक जनप्रतिनिधि की भूमिका सीमित कर दी गई है। *कानून क्या कहता है* पंचायती राज व्यवस्था में स्पष्...