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जनपद पंचायत बहोरीबंद में प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप, दैनिक वेतन भोगी को सौंपे गए अहम प्रभारों पर उठे गंभीर सवाल

 जनपद पंचायत बहोरीबंद में प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप, दैनिक वेतन भोगी को सौंपे गए अहम प्रभारों पर उठे गंभीर सवाल



कटनी । जनपद पंचायत बहोरीबंद इन दिनों एक बार फिर प्रशासनिक अनियमितताओं और कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं में है। ताजा मामला जनपद पंचायत में पदस्थ एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भावना राय से जुड़ा हुआ है, जिनके पास एक साथ तीन महत्वपूर्ण योजनाओं एवं कार्यों का प्रभार होने की बात सामने आ रही है। इन योजनाओं में सीएम हेल्पलाइन निराकरण, भवन निर्माण कार्ड संबंधी कार्य तथा संभल योजना का प्रभार शामिल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को इस प्रकार के संवेदनशील और जवाबदेही वाले कार्यों का प्रभार दिया जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। नियमों के मुताबिक, ऐसी योजनाएं जिनमें आम नागरिकों की शिकायतों का निराकरण, पात्रता का निर्धारण और सरकारी लाभों का वितरण शामिल हो, वहां नियमित एवं अधिकृत कर्मचारियों की तैनाती अपेक्षित मानी जाती है।

*बिना वास्तविक निराकरण के बंद हो रही शिकायतें*

सबसे गंभीर आरोप सीएम हेल्पलाइन 181 से जुड़े हुए हैं।आरोप है कि कई मामलों में शिकायतों का मैदानी स्तर पर वास्तविक निराकरण किए बिना ही उन्हें बंद (क्लोज) कर दिया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने समस्याएं दर्ज कराईं, लेकिन न तो संबंधित विभाग की ओर से संपर्क किया गया और न ही जमीनी स्तर पर किसी प्रकार की कार्यवाही हुई, इसके बावजूद पोर्टल पर शिकायत को “निराकृत” दिखा दिया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल शासन की मंशा के विपरीत है, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।सीएम हेल्पलाइन 181 को शासन ने जनता और प्रशासन के बीच सेतु के रूप में स्थापित किया है, ताकि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान हो सके।

*भवन निर्माण कार्ड और संभल योजना पर भी सवाल*

सूत्र बताते हैं कि भवन निर्माण कार्ड से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है। पात्र हितग्राहियों के आवेदन लंबित रहने, दस्तावेजों में अनावश्यक आपत्तियां लगाने और कुछ मामलों में नाम जोड़ने या हटाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी तरह संभल योजना, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है, उसमें भी लाभ वितरण और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर संदेह जताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना का लाभ सभी पात्र लोगों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।

*एक व्यक्ति के पास तीन-तीन प्रभार क्यों*

जनपद पंचायत में यह सवाल भी उठ रहा है कि एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पास एक साथ तीन महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रभार आखिर किस आधार पर सौंपा गया। क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति ली गई? क्या कार्य विभाजन के नियमों का पालन किया गया? और क्या नियमित कर्मचारियों की उपलब्धता के बावजूद यह जिम्मेदारी दी गई?

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह का कार्यभार वितरण न केवल नियमों के खिलाफ हो सकता है, बल्कि इससे जवाबदेही भी कमजोर होती है। जब जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती, तो भविष्य में किसी भी अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदार तय करना मुश्किल हो जाता है। स्मरण रहे कि जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि किस आदेश के तहत भावना राय को यह प्रभार सौंपे गए और क्या यह व्यवस्था नियमसम्मत है या नहीं।

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