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जनपद पंचायत रीठी में सहायक यंत्री मनोज कौशल की कार्यप्रणाली पर सवाल बिना कमीशन के नहीं चलती साहब की कलम

 जनपद पंचायत रीठी में सहायक यंत्री मनोज कौशल की कार्यप्रणाली पर सवाल

बिना कमीशन के नहीं चलती साहब की कलम



कटनी ।  जनपद पंचायत रीठी इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा विवादों और आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृतियों को लेकर सहायक यंत्री मनोज कौशल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ठेकेदारों और पंचायत स्तर के कर्मचारियों का आरोप है कि बिना कमीशन दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती, और यदि कोई नियमों के तहत काम करवाना चाहता है तो उसे महीनों कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं।

*कागजों में विकास, जमीन पर सवाल*

जनपद पंचायत रीठी अंतर्गत सड़क, नाली, भवन निर्माण, सामुदायिक भवन, पुलिया, सीसी रोड जैसे कई कार्य स्वीकृत हुए हैं। कागजों में ये कार्य समय पर पूर्ण और गुणवत्ता युक्त दर्शाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कई गांवों में अधूरे निर्माण, घटिया सामग्री का उपयोग और निर्धारित मापदंडों की अनदेखी साफ नजर आती है। इसके बावजूद तकनीकी माप-जोख और पूर्णता प्रमाण पत्र आसानी से जारी हो जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन कार्यों में साहब की संतुष्टि हो जाती है, वही कार्य पास हो जाते हैं, चाहे गुणवत्ता कैसी भी हो।

*बिना कमीशन नहीं हिलती फाइल!*

सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत रीठी में सहायक यंत्री मनोज कौशल की कलम तभी चलती है जब संबंधित ठेकेदार या पंचायत प्रतिनिधि “कमीशन” की राशि देने को तैयार हो। बताया जाता है कि भुगतान से लेकर कार्य स्वीकृति और माप-पुस्तिका (एमबी) भरने तक हर स्तर पर अनौपचारिक लेन-देन की मांग की जाती है।एक स्थानीय ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, अगर नियम से काम करो और कमीशन न दो, तो फाइल महीनों पड़ी रहती है। कभी तकनीकी खामी निकाल दी जाती है, कभी माप गलत बता दी जाती है। लेकिन जैसे ही ‘समझौता’ हो जाए, वही फाइल चंद दिनों में पास हो जाती है।

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