सिलौड़ी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, फूलों की वर्षा से गूंजा पंडाल
कटनी । भगवान श्रीकृष्ण के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर सिलौड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैसे ही व्यासपीठ से “खुल गए सारे ताले क्या बात हो गई, जब जन्मे कन्हैया वाह क्या बात हो गई”, “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों की गूंज उठी, पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालु झूम उठे और फूलों की वर्षा से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा व्यास दिव्य कृष्ण महाराज की मधुर वाणी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। बालकृष्ण की मनोहारी झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। जन्मोत्सव के विशेष अवसर पर कथा पंडाल को गुब्बारों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। नन्हें-मुन्ने बच्चे भी कृष्ण रूप में सजकर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
जैसे ही वासुदेव जी डलिया में बालकृष्ण को लेकर प्रकट हुए, उनकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह की होड़ मच गई। भक्ति संगीत की धुनों पर श्रद्धालु कृष्णभक्ति में लीन होकर नाचते-गाते नजर आए।
कथावाचक दिव्य कृष्ण महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन भर अहंकार में जीता है, किंतु अंत समय में ही उसे भगवान का स्मरण आता है। केवल अंतिम क्षण की गुहार से पाप कर्म समाप्त नहीं होते, इसलिए प्रतिपल भगवान का सुमिरन आवश्यक है, जिससे मनुष्य पाप मार्ग से दूर रहकर सत्कर्म की ओर अग्रसर होता है।
वामन अवतार की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म, अर्थ और काम—इन तीनों का समुचित निर्वहन होने पर मोक्ष की प्राप्ति संभव है। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने उन्हें ऐसा वरदान दिया कि स्वयं भगवान उनके द्वारपाल बन गए। यह दर्शाता है कि जब भगवान की कृपा होती है तो भक्त की झोली संसार के समस्त सुखों से भर जाती है। कथा के दौरान परम त्यागी संत श्री श्री 1008 गोविंद सरकार जी महाराज (भरभरा वाले) का शुभ आगमन हुआ। महाराज जी ने कथा पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया, जिससे भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय परिवार सहित उपस्थित रहीं और जन्मोत्सव को भव्य रूप से मनाते हुए नाच-गान एवं प्रसाद वितरण किया। कार्यक्रम में सरपंच पंचों संतोष कुमार, उपसरपंच राहुल राय, राजनारायण राय, सेवाराम साहू, रामलाल काछी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का यह आयोजन सिलौड़ी में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बनकर सभी के हृदय में अविस्मरणीय स्मृति छोड़ गया।

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