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मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है , वह जो सोचता है वही बन जाता है,विचारों से बनती है इंसान की पहचान, सकारात्मक सोच बदल सकती है जीवन, मनुष्य अपने विचारों का प्रतिबिंब सोच ही तय करती है उसकी दिशा और दशा,जो सोचते हैं, वही बनते हैं मानव जीवन पर विचारों की ताकत का खुलासा, विचारों का चमत्कार कैसे बदलती है इंसान की तकदीर, सकारात्मक सोच से सफलता तक विशेषज्ञों ने बताया विचारों का प्रभाव

 मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है , वह जो सोचता है वही बन जाता है,विचारों से बनती है इंसान की पहचान, सकारात्मक सोच बदल सकती है जीवन, मनुष्य अपने विचारों का प्रतिबिंब सोच ही तय करती है उसकी दिशा और दशा,जो सोचते हैं, वही बनते हैं मानव जीवन पर विचारों की ताकत का खुलासा, विचारों का चमत्कार कैसे बदलती है इंसान की तकदीर, सकारात्मक सोच से सफलता तक विशेषज्ञों ने बताया विचारों का प्रभाव



कटनी  |  मनुष्य के अस्तित्व का सबसे अद्भुत पहलू उसका विचार - शक्ति है । संसार के सभी जीवों में मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसके भीतर सोचने, समझने, कल्पना करने और स्वयं को बदलने की अद्वितीय क्षमता विद्यमान है। यही कारण है कि कहा गया है “मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है, वही बन जाता है।” यह कथन मात्र कोई दार्शनिक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का गहनतम सत्य है। मनुष्य का पूरा व्यक्तित्व उसका व्यवहार, उसकी आदतें, उसका भविष्य, उसका संसार सब कुछ उसकी सोच के ताने-बाने से निर्मित होता है।

*विचारों का प्रत्यक्ष प्रभाव*

विचार मनुष्य के जीवन का बीज हैं। जैसे बीज के स्वभाव के अनुसार वृक्ष का निर्माण होता है, उसी प्रकार मन में बोए गए विचार व्यक्ति के चरित्र, कर्म और भाग्य का निर्माण करते हैं। यदि विचार सकारात्मक हों आत्मविश्वास, साहस, परिश्रम और दृढ़ता से भरे हों तो जीवन में आने वाली बाधाएँ मनुष्य को रोक नहीं पातीं । लेकिन यदि विचार नकारात्मक हों भय, संदेह, आलस्य, निराशा से भरे हों तो मनुष्य अपनी वास्तविक क्षमता तक कभी पहुँच ही नहीं पाता। विचारों के प्रभाव को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि मनुष्य का मस्तिष्क लगातार वही बनाता है, जैसा हम बार-बार सोचते हैं। नियमित नकारात्मक सोच मन में नकारात्मक भावनाओं का ढेर लगाती है और धीरे-धीरे जीवन उसी दिशा में ढल जाता है। इसके उलट, सकारात्मक और रचनात्मक सोच व्यक्ति को हर परिस्थिति में आशावान बनाए रखती है और वही आशा उसकी शक्ति बन जाती है।

*विचार और चरित्र निर्माण*

मनुष्य का चरित्र उसके विचारों का ही स्थायी रूप है। कोई व्यक्ति ईमानदार, परिश्रमी, दयालु या साहसी इसलिए नहीं होता कि वह जन्म से ऐसा होता है, बल्कि इसलिए कि उसके विचारों ने उसे ऐसा बनाए रखा है। विचार ही मनुष्य के अंदर नैतिक मूल्यों का निर्माण करते हैं। इतिहास में जितने भी महान व्यक्तित्व हुए चाहे वह महात्मा गांधी हों, बुद्ध हों, अब्राहम लिंकन हों या स्वामी विवेकानंद उन सबके जीवन का आधार उनके ऊँचे विचार ही थे। इन विचारों ने उनके भीतर ऐसी ऊर्जा उत्पन्न की जिसने समाज और राष्ट्र का स्वरूप बदल दिया।यदि कोई लगातार यह सोचता रहे कि वह कुछ नहीं कर सकता, वह कमजोर है, उसका भाग्य खराब है, तो वह सचमुच असफलता की ओर बढ़ने लगता है। किंतु जो व्यक्ति अपने मन में यह दृढ़ कर ले कि वह अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेगा, वही कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदल देता है।

*विचार और कर्म का संबंध*

विचार मन में जन्म लेते हैं और कर्म के रूप में जीवन में उतरते हैं। यह एक ऐसा चक्र है जिसमें विचार बीज हैं और कर्म उसका फल। किसी भी महान उपलब्धि के पीछे सबसे पहले एक छोटा-सा विचार ही जन्म लेता है। उदाहरण के लिए थॉमस एडिसन ने जब बल्ब का आविष्कार किया, उसके पीछे एक विचार था “अंधकार को रोशन करना।” राइट ब्रदर्स के मन में उड़ने का विचार आया, और उसी विचार ने उन्हें विमान निर्माण की दिशा में प्रेरित किया।स्वतंत्रता सेनानियों के मन में आज़ादी का विचार आया, और उसी ने देश की नियति बदल दी।इसलिए जो व्यक्ति यह समझ लेता है कि वह जो सोचता है वही उसके कर्मों का मार्ग बनता है, वही महान कार्यों को जन्म देता है।

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