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सत्ता जब अंधी हो जाती हैं तब कानून सिर्फ़ कमजोरों पर चलता है, कटनी में रेत माफियाओं का आतंक, प्रशासनिक व्यवस्था ढेर, ग्रामीणों में तीखा आक्रोश कटनी जिला रेत माफिया के कब्जे में, प्रशासन मौन, रेत माफियाओं का तांडव, प्रशासन नाकाम, अवैध रेत खनन चरम पर, व्यवस्था लाचार, रेत माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस, रेत माफिया बेलगाम, कानून व्यवस्था सवालों में, अवैध रेत खनन से त्रस्त कटनी, प्रशासन की खामोशी पर ग्रामीणों की नाराज़गी

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कटनी ।  कटनी जिले में रेत का अवैध उत्खनन कोई नई बात नहीं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह समस्या भयावह रूप ले चुकी है। कानून, नियम और प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए रेत माफिया दिन-दहाड़े नदियों को छलनी कर रहे हैं। ग्रामवासियों की शिकायतें, विरोध और बार-बार की गई मांगों के बावजूद खनिज विभाग व स्थानीय प्रशासन की चुप्पी ने इस अवैध कारोबार को और हवा दी है।

*टोकन के नाम पर ग्रामीणों से वसूली*

ग्रामीणों के अनुसार माफिया कंपनी द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिकों से 2000 से 2500 रुपये प्रति ट्रॉली वसूले जा रहे हैं।टोकन की व्यवस्था लंबे समय से विवाद का विषय है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि कटनी जिले में अब कानून नहीं बल्कि माफियाओं का राज चल रहा है।

*रेत महंगी, जनता परेशान*

ग्रामवासियों का कहना है कि जिस रेत को पहले तीन हजार रुपये प्रति ट्रॉली में मिल जाती थी, वह अब दो से तीन गुना महंगी हो चुकी है। निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, गरीब और मजदूर वर्ग सबसे अधिक परेशान है। मनरेगा, पीएम आवास, शौचालय निर्माण और अन्य सरकारी कार्य रुकने की कगार पर हैं।

*अवैध रेत खनन का नेटवर्क गाँव-गाँव फैला*

हर दिन 50 से 60 ट्रॉलियों में अवैध रेत क्षेत्र से बाहर भेजी जा रही है। कई नदियाँ अस्तित्व खोने की कगार पर हैं, जिससे पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है । शिकायतों के बावजूद न खनिज विभाग और न ही पुलिस कार्रवाई कर रही है और न ही खनिज विभाग कोई ठोस कदम उठा रहा है।

*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*

ग्रामीणों का सवाल है आखिर प्रशासन क्यों मौन है? क्या मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं हो रही? कई बार दिए गए आवेदन, शिकायतें और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दे अब तक ‘शून्य’ साबित हुए हैं।

*जनता का सीधा आरोप रेत माफिया संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध धंधा*

कटनी जिले में रेत माफिया खुलेआम शासन-प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। अवैध रूप से हो रहे इस खनन से सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, वहीं गांवों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे।

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