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ढीमरखेड़ा महात्मा गांधी खेल मैदान में जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बड़वारा विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह का उद्बोधन शिक्षा से ही संभव है वास्तविक परिवर्तन

 ढीमरखेड़ा महात्मा गांधी खेल मैदान में जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बड़वारा विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह का उद्बोधन शिक्षा से ही संभव है वास्तविक परिवर्तन



ढीमरखेड़ा ।  महात्मा गांधी खेल मैदान ढीमरखेड़ा में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के समापन वर्ष पर आयोजित जिला स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान को याद किया गया। पूरे मैदान में सुबह से ही उत्साह का वातावरण था। जनजातीय समुदाय की युवतियों और युवाओं ने पारंपरिक पोशाकों में स्वागत गीत प्रस्तुत किए, वहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज पूरे आयोजन को गरिमामय बना रही थी । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल जनजातीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्तंभ हैं। उनके संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान ने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को नई दिशा दी। बिरसा मुंडा ने दिखाया कि जब समाज एकजुट होकर अपने हक और सम्मान के लिए खड़ा होता है, तब अन्याय और अत्याचार किसी भी कीमत पर टिक नहीं सकता।

*शिक्षा ही बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह*

अपने ओजस्वी संबोधन में विधायक सिंह ने कहा समाज में वास्तविक बदलाव केवल शिक्षा के माध्यम से ही लाया जा सकता है। जो बदलाव हम दूसरों में देखना चाहते हैं, वह पहले हमें अपने अंदर लाना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि व्यक्ति स्वयं को सुधारने की शुरुआत करता है, तो परिवार बदलेगा, परिवार बदलेगा तो समाज बदलेगा, और समाज बदलेगा तो पूरा राष्ट्र विकास की राह पर अग्रसर होगा। उनका यह विचार उपस्थित जनसमूह के बीच जोरदार तालियों से स्वागत प्राप्त करता रहा। उन्होंने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज के समय में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है, लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है।विधायक सिंह ने यह भी कहा कि आजादी के बाद देश ने कई क्षेत्रों में विकास किया, लेकिन जनजातीय समुदाय की भागीदारी और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में अभी भी काम बाकी है। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों से जोड़ना ही वास्तविक सम्मान है।

*बिरसा मुंडा साहस, स्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक*

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ वह क्रांति खड़ी की, जिसने पूरे ब्रिटिश प्रशासन को हिला दिया था। उन्होंने ‘उलगुलान’ नामक जनआंदोलन के माध्यम से यह संदेश दिया कि जंगल, जमीन और जल पर आदिवासियों का नैसर्गिक अधिकार है। उनकी विचारधारा आज भी जनजातीय समाज को प्रेरणा देती है कि आत्मसम्मान और स्वाभिमान किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

*ढीमरखेड़ा में संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम*

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर ढीमरखेड़ा महात्मा गांधी मैदान का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। विभिन्न जनजातीय समूहों ने परंपरागत नृत्य प्रस्तुत किए। महिलाएँ सिर पर धाती, चाँदी के आभूषण और रंगीन परिधान पहने थीं, वहीं पुरुष पारंपरिक धोतियों और पगड़ियों में ढोल की थाप पर नृत्य कर रहे थे। स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने भी भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय नायकों पर नाट्य प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंच पर ‘जनजातीय गौरव यात्रा’ से जुड़े प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें जनजातीय कला, हथकरघा, हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य पदार्थों की झलक देखने को मिली ।

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