सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ग्राम घुघरी की शासकीय तालाब की मेड़ पर अतिक्रमण, शासन प्रशासन की चुप्पी , किसके दबाव में नहीं हों रही कार्यवाही, कानून से बढ़के किसके हाथ

 ग्राम घुघरी की शासकीय तालाब की मेड़ पर अतिक्रमण, शासन प्रशासन की चुप्पी , किसके दबाव में नहीं हों रही कार्यवाही, कानून से बढ़के किसके हाथ 



ढीमरखेड़ा | तहसील क्षेत्र ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम घुघरी के अंतर्गत स्थित शासकीय तालाब की मेड़ पर अवैध कब्जे की यह घटना ग्रामवासियों द्वारा 10 सितंबर 2024 को हुई जनसुनवाई में सामने आई। ग्रामवासियों ने शिकायत की कि ग्राम के ही दो व्यक्ति, जगतसिंह और श्याम सिंह जोगी, ने शासकीय तालाब की मेड़ पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण कर लिया है। यह कब्जा न केवल तालाब की भूमि पर हुआ, बल्कि ग्रामवासियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सार्वजनिक नाली और सार्वजनिक बाथरूम के स्थान पर भी मकान बना दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामवासियों ने यह आरोप भी लगाया है कि तालाब की भूमि का कुछ हिस्सा भी अवैध रूप से विकसित किया गया है, जिससे तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और लोगों का निस्तार (पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए तालाब से पानी लेना) भी प्रभावित हो गया है। इस स्थिति ने न केवल ग्रामवासियों को परेशान किया है, बल्कि ग्राम पंचायत के अन्य बुनियादी ढांचे पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामवासियों द्वारा प्रस्तुत आवेदन में इस अवैध कब्जे को हटाने की मांग की गई थी। ग्रामवासियों ने इस बात की सूचना प्रशासन को दी थी, और प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच के आदेश दिए गए।अनुविभागीय अधिकारी ने हल्का पटवारी को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया। पटवारी द्वारा की गई जांच में अवैध कब्जा और अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। पटवारी ने पंचनामा तैयार करके एस.डी.एम. को रिपोर्ट प्रस्तुत की, और इस मामले की सुनवाई नायब तहसीलदार उमरियापान के न्यायालय में की गई। इस मामले को न्यायालय में पेश किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस स्थिति ने ग्रामवासियों के बीच असंतोष और निराशा की भावना पैदा कर दी है, क्योंकि दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी शासन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

 *शासन - प्रशासन के जि़म्मेदार अधिकारी नही दे रहे ध्यान*

इस मामले में शासन प्रशासन की निष्क्रियता और अवहेलना से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामवासियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराए जाने के बावजूद, कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी और अपर्याप्त रही है। जब तक मामले की गंभीरता को समझा नहीं जाता, तब तक अतिक्रमण की स्थिति स्थिर हो जाती है, और इससे पीड़ित लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगते हैं। यह भी देखा जा रहा है कि न्यायालय की ओर से कोई प्रभावी आदेश नहीं दिया गया है, जिसके कारण अतिक्रमणकर्ता अभी भी अवैध कब्जे के बाद भी स्वतंत्र रूप से अपने निर्माण में लगे हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप ग्रामवासियों का जीवन कठिन हो गया है, और उनकी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं।

 *अतिक्रमण पर होना चाहिए कार्यवाही*

शासकीय भूमि पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या है, जो न केवल भूमि की वैधता को प्रभावित करती है, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को भी चुनौती देती है। अतिक्रमण के कारण सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जैसे तालाब, नालियां, बाथरूम आदि, निजी स्वामित्व में चली जाती है, जिससे सामूहिक उपयोग का अधिकार बाधित होता है। इससे ग्रामवासियों की मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति में रुकावट आती है, और समाज में असंतोष फैलता है। इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब शासन और प्रशासन इसे गंभीरता से लें और त्वरित कार्रवाई करें। प्रशासन को अतिक्रमण की स्थिति को तत्काल पहचानना चाहिए और अवैध निर्माण को हटाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही, प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों और ग्रामवासियों को सुरक्षित और न्यायपूर्ण माहौल मिले।

 *जनसुनवाई केवल एक दिखावा*

जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन को ग्रामवासियों की समस्याओं से अवगत कराया जाता है, लेकिन प्रशासन की तत्परता और पारदर्शिता की आवश्यकता है। ग्रामवासियों द्वारा दी गई शिकायतों पर उचित कार्रवाई न करना शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। प्रशासन को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और अवैध कब्जे को तुरंत हटाने के आदेश देने चाहिए। न्यायालय को मामले की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र निर्णय देना चाहिए ताकि अतिक्रमणकर्ता पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।ग्रामवासियों को अतिक्रमण की गंभीरता के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए और उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी दी जानी चाहिए। प्रशासन को अन्य ग्राम पंचायतों और क्षेत्रों में भी अतिक्रमण की स्थिति की जांच करनी चाहिए और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ग्राम घुघरी में शासकीय तालाब की मेड़ पर अतिक्रमण की घटना एक स्पष्ट उदाहरण है कि शासन और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण स्थानीय समुदाय की बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से ग्रामवासियों में असंतोष का वातावरण बन गया है। इस मुद्दे पर शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि अतिक्रमण की समस्या को हल किया जा सके और ग्रामवासियों को उनके अधिकार और सुविधाएं वापस मिल सकें।

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर प्रकाशन होता है आपका । कृपया ठिर्री की खबर प्रकाशित करे , वहाँ तो हटाने का आदेश भी हो चुका है फिर भी कब्जा अभी तक नहीं हटा ।माननीय न्यालय के आदेश की कॉपी में आपको दे दूँगा ।।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

popular post

शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द

 शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द ढीमरखेड़ा |  ग्राम झिन्ना पिपरिया के प्रतिष्ठित कोपारिहा परिवार में जन्मे, जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री अवनीश कांत मिश्रा का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे श्री सीताराम जी मिश्रा के बड़े सुपुत्र थे और अपने सरल स्वभाव, कर्मठता व सेवा भावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। श्री मिश्रा बचपन से ही मेधावी रहे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रिपल एम.ए. तक की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिचय वर्ष 1994-95 में देखने को मिला,...

प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग

 प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग कटनी ।  ढीमरखेड़ा स्थित शासकीय महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर माननीय हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र, अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंच गया है। गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। *सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का विवाद* जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित तौर पर हाई कोर्ट के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वहीं ब्राह्मण समाज को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पोस्ट के सामने आते ही क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और सामाजिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। *जनसुनवाई में पहुंची शिकायत* ...

सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत

 सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत  कटनी  |  कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा के किसानों के सामने इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। खेती-किसानी पर निर्भर हजारों किसान इस समय गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।कारण है सिकमी नामा से जुड़े किसानों का पंजीयन पोर्टल पर फेल हो जाना, जिसके चलते वे समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा के किसानों की पीड़ा से अवगत कराया है।विधायक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सिकमी नामा पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन पोर्टल में अस्वीकार हो रहा है, जिसके कारण वे सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। बड़वारा विधान...