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समदडिय़ा कालोनीवासी भयभीत हो उठे है शंख प्राप्ति के धार्मिक प्रपंच से, अविकसित कालोनी की कीमतें बढ़ाने के लिए अंधविश्वास का प्रचार-पाखंड, सेवाधारियों ने कहा-यह साहिबान के कृपा आदेश का पालन है, कोई प्रपंच नहीं

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ढीमरखेड़ा । समदडिय़ा कालोनी के पीछे की अविकसित और बरसात के समय छह-सात फीट गहरे तालाब के रूप में तीन माह के लिए परिवर्तित होने वाली निजी भूमि के विशेष प्लाट पर एक नए अन्ध विश्वास की स्थापना गुरूवार से कर दी गई है, जहां कुछ कथित सेवादारोंं ने झाडिय़ां साफ करके चार छोटे शंख प्राप्त किए हैं और  इन्हें साहिबान के आदेश से मिला हुआ चमत्कारिक प्रसाद मानकर चार चबूतरों का निर्माण कर दिया गया है। शंख को रखकर पुष्पार्पण किया गया, पूजन किया गया, लेकिन समदडिय़ा कालोनी के लोग इसे प्रेत-पूजा मानकर भयभीत है और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस पूरे कांड की जांच की जाए। जिस भूमि पर शंख मिले है, वह किसकी है, उसका धार्मिक संस्था के प्रमुख से क्या रिश्ता है और इस प्रपंच के पीछे उसकी मंशा क्या है। अविकसित निजी भूमि की कीमत कई गुना करने का हथकंडा तो नहीं है। सूत्रों की मानें तो समदडिय़ा कालोनी के पीछे की निजी जमीन गहरी ढलान पर है। यहां बरसात के समय आदमी के डूबने लायक पानी (नाले का) महीनों इकठ्ठा रहता है। थोड़ा स्मरण करा दें कि समदडिय़ा सिटी के नाले में टोपनानी परिवार के एक सदस्य वर्षाकाल में गिरे थे और दुर्भाग्यवश शव के रूप में बहकर इसी ढलान में आ गए थे। बरसात के बाद जब पानी सूखता है तभी इस जमीन पर पांव रखा जा सकता है। अपनी भौगोलिक विषमता के कारण ये जमीनें अपेक्षाकृत सस्ती कीमत की हैं। यदि इस जमीन को चमत्कारिक स्वरूप मिल जाए तो इसके दामों में आसमानी उछाल आ जाएगा और चमत्कार को नमस्कार करने वालों के दान से तीन एकड़ जमीन को समतल करने का विकास कार्य करने का रास्ता मुफ्त में खुल जाएगा। इस चर्चा के साथ समदडिय़ा कालोनी वासियों ने शंख प्राप्त होने के चमत्कार को सोचा समझा प्रोपेगेंडा करार देकर प्रशासनिक जांच की मांग कर रहे हैं।

*अवैध प्लाटिंग की जांच हो*

नागरिकों की मांग है कि तीन एकड़ की तालाबनुमा जमीन पर अवैध प्लाटिंग स्पष्ट रूप से दिखती है। इस रकबे के डायवर्सन-प्लाटिंग की विधिवत अनुमति आदि की सूक्ष्म जांच कराने की अनिवार्यता जनहित में है। बताया गया कि इस जमीन को समतल कराकर यदि कोई मकान बनाना चाहे तो उसकी नींव-दीवारें सपोर्ट के अभाव में गिर जाती हैं। जमीन से लगी हुई समदडिय़ा कालोनी के दो तीन मकानों की नींव और दीवारें ढह चुकी हैं।

*बरसाती पानी में शंख का कीड़ा बनना स्वाभाविक*

इस जमीन पर शंख पाए जाने को चमत्कार की संज्ञा देना सिर्फ अंधविश्वास का कारोबार फैलाने का प्रयास माना जा रहा है। पानी के पोखर में जोंक-शंख कीड़ों का पनपना एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है और ये अपने अंडे झाडिय़ों के किनारे रखते हैं। इसे चमत्कार बताकर एक अविकसित अवैध कालोनी को मूल्यवान बनाने के प्रयास के तहत यह प्रपंच रचना की जा रही है।

*जमीन संत साहिब के परिवारजनों की*

नागरिकों का कहना है कि सांसारिक भौतिक पदार्थों से विरक्त हो चुके संत के परिवारजन का प्लाट होने की वजह से इसे प्रपंच माना जा रहा है। नागरिकों ने कहा कि यह जांच का विषय है कि बैरागी संत के परिवार जनों की संपत्ति एकाएक सैकड़ों करोड तक पहुंचने की जांच होनी चाहिए।

*साहिबान के आदेश से सेवाधारी कर रहे तपस्या*

मौके पर मौजूद सेवाधारियों का इस संबंध में कहना था कि साहिबान की प्रेरणा से इस स्थान की सफाई पिछले दस दिनों से सैकड़ों सेवाधारी कर रहे हैं। जिसमें झाडिय़ों की जड़ की मिट्टी हाथों से हटाई गई तो तीन वनस्पति की जड़ों में शंख प्राप्त हुए। यह गुरुकृपा है, अत: दैवीय शंखों को एक चबूतरे पर स्थापित कर उसे जालीदार सुरक्षा में रखकर उनका पूजन-अर्चन किया गया है। यह प्लाट किन्हीं संगतमल जी का है। सूत्र कहते हैं कि वर्तमान में इस प्लाट की रजिस्ट्री संत साहिब के परिजनों के नाम पर है।

*धार्मिक निर्माण के लिए अनुमति आवश्यक*

कानूनी स्थिति यह है कि नगरीय निकाय में किसी भी तरह के धार्मिक स्थल का निर्माण करने के लिए प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य है।फिलहाल यहां लघु चबूतरे बन गए हैं, वृहद निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति चाहिए। समदडिय़ा कालोनी हेमू कालाणी वार्डवासियों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन स्वयं आगे आकर संज्ञान लेवे अन्यथा हम कानूनी कार्यवाही करेंगे।

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