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मरही आसमानी माता मंदिर में 22 से 28 फरवरी तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, प्रख्यात कथा वाचक पं. प्रदीप गर्ग पिपरिया वाले करेंगे अमृतवर्षा, पं. अमित त्रिपाठी तिलमन वाले रहेंगे सहायक

 मरही आसमानी माता मंदिर में 22 से 28 फरवरी तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, प्रख्यात कथा वाचक पं. प्रदीप गर्ग पिपरिया वाले करेंगे अमृतवर्षा, पं. अमित त्रिपाठी तिलमन वाले रहेंगे सहायक



कटनी ।  ग्राम परसवारा में स्थित मरही आसमानी माता मंदिर परिसर एक बार फिर भक्तिमय वातावरण से सराबोर होने जा रहा है ।  22 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से “प्रभु इच्छा तक” श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है ।  इस सात दिवसीय धार्मिक आयोजन में प्रसिद्ध कथा वाचक पं. प्रदीप गर्ग पिपरिया वाले अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और ज्ञान का संदेश देंगे। आयोजन स्थल तालाब के पास स्थित मरही आसमानी माता मंदिर परिसर रहेगा, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस पावन आयोजन के मुख्य यजमान एवं आयोजक बसंत पटेल एवं समस्त पटेल परिवार हैं, जिन्होंने पूरे ग्राम और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को इस कथा में सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया है। धार्मिक वातावरण, भक्ति संगीत और कथा प्रवचन के माध्यम से ग्राम में आध्यात्मिक चेतना का संचार होगा।

*सात दिनों तक बहेगी भक्ति की गंगा*

आयोजन समिति के अनुसार, कथा का शुभारंभ 22 फरवरी को मंगलाचरण और कलश यात्रा के साथ होगा । इसके पश्चात प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से कथा प्रारंभ होकर प्रभु इच्छा तक चलेगी। कथा के दौरान श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र, गोवर्धन लीला, रास पंचाध्यायी, उद्धव-गोपि संवाद और भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र जैसे प्रेरणादायक प्रसंग शामिल रहेंगे। पं. प्रदीप गर्ग पिपरिया वाले की कथा शैली अत्यंत प्रभावशाली और भावपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु बताते हैं कि उनके कंठ में स्वयं भगवती का वास है और जब वे कथा का वाचन करते हैं तो श्रोतागण भाव-विभोर हो उठते हैं। उनकी ओजस्वी वाणी और सरल व्याख्या शैली के कारण जटिल आध्यात्मिक विषय भी सहज रूप में समझ में आ जाते हैं। इस आयोजन में पं. अमित त्रिपाठी तिलमन वाले सहायक कथा वाचक के रूप में उपस्थित रहेंगे। वे भी अपनी विद्वता और मधुर वाणी से कथा को और अधिक प्रभावशाली बनाएंगे।

*मंदिर परिसर में तैयारियां जोरों पर*

मरही आसमानी माता मंदिर तालाब के पास स्थित एक प्राचीन और श्रद्धा का केंद्र रहा है। इस आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की जा रही है। रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्प सज्जा, भव्य पंडाल और बैठने की समुचित व्यवस्था की जा रही है ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोजन समिति ने पेयजल, प्रसाद वितरण, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही प्रतिदिन भजन-कीर्तन की प्रस्तुतियाँ भी होंगी, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

*सामाजिक समरसता का संदेश*

बसंत पटेल एवं समस्त पटेल परिवार ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक भी है। कथा के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों से गुजर रहा है, तब ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। कथा श्रवण से मन को शांति मिलती है, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होता है।

*श्रद्धालुओं में उत्साह*

कथा की घोषणा के साथ ही ग्राम परसवारा एवं आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है। ग्रामीणों ने बताया कि वे परिवार सहित कथा में भाग लेंगे और प्रतिदिन नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया कि उन्हें इतने विद्वान कथा वाचकों के सान्निध्य में सात दिनों तक भागवत कथा श्रवण का अवसर मिलेगा।स्थानीय युवाओं ने भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया है। वे व्यवस्था, पार्किंग, प्रसाद वितरण और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। महिलाओं ने भी भजन मंडली के माध्यम से अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है।

*आध्यात्मिक लाभ और सांस्कृतिक संरक्षण*

श्रीमद्भागवत कथा को सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा श्रवण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन में वैराग्य एवं ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होता है। कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का माध्यम भी है। इस प्रकार के आयोजन से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है। बच्चों और युवाओं को धर्म, नैतिकता और संस्कारों का पाठ सहज रूप में प्राप्त होता है।

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