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ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी मोहम्मद शाहिद खान का स्थानांतरण, विदाई समारोह में छलकते जज़्बात

 ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी मोहम्मद शाहिद खान का स्थानांतरण, विदाई समारोह में छलकते जज़्बात



कटनी |  ढीमरखेड़ा पुलिस थाने का वह दिन बेहद भावुक कर देने वाला था, जब थाना प्रभारी मोहम्मद शाहिद खान का स्थानांतरण रीठी के लिए हो गया और उनके सम्मान में एक विदाई समारोह आयोजित किया गया। पूरे थाना प्रांगण से लेकर क्षेत्रीय जनता तक में निराशा और उदासी का माहौल था, क्योंकि शाहिद खान न केवल एक कुशल अधिकारी थे बल्कि अपनी हंसमुख प्रवृत्ति, मिलनसार स्वभाव और भाईचारे की भावना के कारण सबके दिलों में एक खास जगह बना चुके थे।

*हंसमुख और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व*

मोहम्मद शाहिद खान का व्यक्तित्व हमेशा से ही उनकी पहचान रहा है। वे हर परिस्थिति में हंसी-खुशी और सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करते थे। यही कारण था कि थाने का हर कर्मचारी उन्हें केवल एक अधिकारी नहीं बल्कि भाई जैसा साथी मानता था। उनकी यह शैली पुलिस महकमे में बहुत कम दिखाई देती है, जहाँ अनुशासन और कठोरता आमतौर पर छवि को परिभाषित करते हैं।

*हीरा जहाँ भी जाएगा, चमकेगा*

विदाई समारोह में बार-बार यह भाव सुनाई दिया कि शाहिद खान वास्तव में एक हीरे की तरह हैं। हीरा चाहे जहाँ भी हो, अपनी चमक से पहचाना जाता है। उनकी प्रतिभा और कार्यकुशलता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। यही कारण है कि ढीमरखेड़ा से रीठी के स्थानांतरण की खबर मिलते ही हर किसी ने यही कहा कि वे वहाँ भी अपनी कार्यशैली और इंसानियत से नया नाम कमाएँगे और लोगों का दिल जीतेंगे।

*पुलिस स्टाफ की भावनाएँ*

समस्त पुलिस स्टाफ ने विदाई समारोह में खुलकर कहा कि उन्होंने शाहिद खान को केवल वरिष्ठ अधिकारी की तरह नहीं देखा, बल्कि उन्हें भाई और साथी की तरह अनुभव किया। उनकी सादगी और मिलनसार व्यवहार ने माहौल को हमेशा हल्का और अपनापन भरा बनाए रखा। यही कारण था कि विदाई के क्षण में कई कर्मचारियों की आँखें भर आईं।

*जनता की प्रतिक्रिया*

केवल पुलिस स्टाफ ही नहीं, बल्कि ढीमरखेड़ा की आम जनता भी उनके स्थानांतरण से निराश नज़र आई। लोग कहते दिखे कि “हमारे थाना प्रभारी साहब हमेशा जनता से जुड़े रहे, हर समस्या को अपनी समस्या समझा और बिना भेदभाव के न्याय दिलाने की कोशिश की।” उनकी यह छवि उन्हें साधारण अधिकारियों से अलग बनाती है।

*विदाई समारोह का माहौल*

समारोह के दौरान माहौल भावनाओं से भरा हुआ था। लोग उनकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। भाषणों में, छोटे-छोटे अनुभवों में और आपसी चर्चाओं में हर किसी ने यह स्वीकार किया कि शाहिद खान ने ढीमरखेड़ा को एक नई पहचान दी। उनकी हंसी, अपनापन और निष्पक्ष कार्यशैली हमेशा याद की जाएगी।

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