सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जिस व्यक्ति में सफलता के लिए आशा और आत्मविश्वास है, वहीं व्यक्ति उच्च शिखर पर पहुंचते हैं

 जिस व्यक्ति में सफलता के लिए आशा और आत्मविश्वास है, वहीं व्यक्ति उच्च शिखर पर पहुंचते हैं




ढीमरखेड़ा |  सफलता की यात्रा आसान नहीं होती। यह एक ऐसी राह है जो धैर्य, मेहनत, समर्पण, आशा और आत्मविश्वास की नींव पर टिकी होती है। जीवन में कोई भी व्यक्ति तभी ऊंचे शिखरों को छू सकता है, जब उसके भीतर आशा की किरणें और आत्मविश्वास की जड़ें मजबूत हों। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता और निरंतर प्रयास करता है, वही वास्तव में सफल कहलाने का अधिकारी बनता है।

*आशा, जीवन की दिशा*

आशा वह शक्ति है जो निराशा में भी संभावना तलाश लेती है। यह वह दीपक है जो अंधकार में भी रोशनी करता है। जब कोई व्यक्ति किसी कठिन समय से गुजरता है, तब आशा ही उसे सहारा देती है कि वह इस अंधेरे से बाहर निकल सकता है। उदाहरण के लिए, थॉमस एडीसन को ही लीजिए जब उन्होंने बिजली के बल्ब पर काम करना शुरू किया तो हजारों बार विफल हुए, लेकिन आशा ने उन्हें रोके रखा। उन्होंने कहा था "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने 10,000 ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते थे।" आशा यह विश्वास दिलाती है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, बदल सकती है। यही आशा किसान को सूखे में भी बीज बोने की हिम्मत देती है, विद्यार्थी को असफलता के बाद भी परीक्षा देने का साहस देती है, और एक आम व्यक्ति को असामान्य उपलब्धियाँ प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।

*आत्मविश्वास, सफलता की आत्मा*

आत्मविश्वास वह आंतरिक शक्ति है जो व्यक्ति को यह महसूस कराती है कि "मैं कर सकता हूँ।" यह न केवल लक्ष्य को स्पष्ट करता है बल्कि उसमें पहुंचने के लिए साहस भी प्रदान करता है। आत्मविश्वास बिना किसी बाहरी सहायता के भी व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह संदेह और भय को हराने का सबसे प्रभावशाली अस्त्र है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन उदाहरण है कि आत्मविश्वास से क्या कुछ संभव है। एक गरीब परिवार से निकलकर वे भारत के राष्ट्रपति बने और मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा अपने ऊपर विश्वास रखा।

*दोनों का संयोजन अजेय बनाता है*

यदि केवल आशा हो लेकिन आत्मविश्वास न हो, तो व्यक्ति केवल सपना देखता रह जाता है और कोई कदम नहीं उठाता। वहीं केवल आत्मविश्वास हो लेकिन आशा न हो, तो व्यक्ति जल्दी निराश हो सकता है। सफलता के लिए इन दोनों का संतुलित मेल आवश्यक है। जैसे नाव को दिशा देने के लिए पतवार और चलाने के लिए पतवार की जरूरत होती है, वैसे ही जीवन में आशा और आत्मविश्वास दोनों जरूरी हैं।

*मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण*

मनोविज्ञान के अनुसार, व्यक्ति का आत्म-संवाद यानी "Self-talk" उसकी कार्यक्षमता और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित करता है। यदि व्यक्ति खुद से सकारात्मक बात करता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह आशावादी दृष्टिकोण अपनाता है। यह मानसिक स्थिति उसे अधिक साहसी और प्रेरित बनाती है। अल्बर्ट बंदूरा जैसे मनोवैज्ञानिकों ने ‘Self-Efficacy’ यानी "आत्म-प्रभावकारिता" का सिद्धांत दिया, जिसमें बताया गया कि अगर व्यक्ति को खुद पर भरोसा होता है कि वह कोई कार्य कर सकता है, तो उसके सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 

*ऐतिहासिक और समकालीन उदाहरण*

महात्मा गांधी जब उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा का मार्ग चुना, तब उन्हें अनेक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उनकी आशा और आत्मविश्वास ने ही भारत को स्वतंत्रता दिलाने में भूमिका निभाई। हेलेन केलर दृष्टिहीन, श्रवणहीन और मूक होने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन को प्रेरणास्रोत बनाया। उनकी आत्मकथा "The Story of My Life" आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है। मैरी कॉम एक छोटे से गाँव की लड़की जिसने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में भारत का नाम रौशन किया। अगर वह खुद पर भरोसा न करती और हार मान लेती, तो कभी विश्व चैंपियन न बन पातीं। नरेंद्र मोदी एक चाय बेचने वाले से देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर आत्मविश्वास और आशा से ही संभव हो पाया। आज के समाज में कई लोग गरीबी, भेदभाव, शोषण और बेरोजगारी से जूझते हैं। इन परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति आशा और आत्मविश्वास बनाए रखते हैं, वे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। जैसे कई ग्रामीण विद्यार्थी जिन्होंने अभावों में भी UPSC पास किया, वे साबित करते हैं कि केवल संसाधन नहीं, आत्मबल भी जरूरी है। आशा और आत्मविश्वास सामाजिक रूप से भी लोगों को सशक्त बनाते हैं। जो व्यक्ति आत्मविश्वासी होते हैं, वे समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं और दूसरों को प्रेरित करते हैं। बचपन से ही अगर बच्चों को आशावादी दृष्टिकोण और आत्मविश्वास की शिक्षा दी जाए, तो वे बड़े होकर आत्मनिर्भर और सफल बन सकते हैं। माता-पिता और शिक्षक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की छोटी सफलताओं को सराहना, उन्हें चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना और असफलताओं से सीखने की प्रेरणा देना यह सब उनकी मानसिकता को आकार देता है।

टिप्पणियाँ

popular post

शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द

 शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द ढीमरखेड़ा |  ग्राम झिन्ना पिपरिया के प्रतिष्ठित कोपारिहा परिवार में जन्मे, जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री अवनीश कांत मिश्रा का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे श्री सीताराम जी मिश्रा के बड़े सुपुत्र थे और अपने सरल स्वभाव, कर्मठता व सेवा भावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। श्री मिश्रा बचपन से ही मेधावी रहे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रिपल एम.ए. तक की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिचय वर्ष 1994-95 में देखने को मिला,...

प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग

 प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग कटनी ।  ढीमरखेड़ा स्थित शासकीय महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर माननीय हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र, अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंच गया है। गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। *सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का विवाद* जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित तौर पर हाई कोर्ट के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वहीं ब्राह्मण समाज को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पोस्ट के सामने आते ही क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और सामाजिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। *जनसुनवाई में पहुंची शिकायत* ...

सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत

 सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत  कटनी  |  कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा के किसानों के सामने इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। खेती-किसानी पर निर्भर हजारों किसान इस समय गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।कारण है सिकमी नामा से जुड़े किसानों का पंजीयन पोर्टल पर फेल हो जाना, जिसके चलते वे समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा के किसानों की पीड़ा से अवगत कराया है।विधायक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सिकमी नामा पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन पोर्टल में अस्वीकार हो रहा है, जिसके कारण वे सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। बड़वारा विधान...