सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वन विभाग में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा होता एक और मामला, बल्लन तिवारी, डिप्टी रेंजर बी. डी. त्रिपाठी और रेंजर अजय मिश्रा की संदिग्ध सांठगांठ, अवैध तरीके से चल रहा हैं सागौन कटाई का कार्य, चंद नोटों के कारण बिक गया पूरा विभाग

 वन विभाग में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा होता एक और मामला, बल्लन तिवारी, डिप्टी रेंजर बी. डी. त्रिपाठी और रेंजर अजय मिश्रा की संदिग्ध सांठगांठ, अवैध तरीके से चल रहा हैं सागौन कटाई का कार्य, चंद नोटों के कारण बिक गया पूरा विभाग 



ढीमरखेड़ा |  मध्यप्रदेश के वन विभाग की गरिमा और जिम्मेदारी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग, जो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और वन्य जीव संरक्षण के लिए जाना जाता है, आज भ्रष्टाचार और मिलीभगत की दलदल में फंसा हुआ प्रतीत हो रहा है। हाल ही में सामने आई एक गंभीर घटना में यह आरोप लग रहा है कि एक जिला बदर अपराधी बल्लन तिवारी, जो कई मामलों में संदिग्ध है, उसे विभाग के डिप्टी रेंजर बी. डी. त्रिपाठी का संरक्षण प्राप्त है। इतना ही नहीं, इस मामले में रेंजर अजय मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

*बल्लन तिवारी, एक जिला बदर अपराधी की चालबाजियां*

बल्लन तिवारी पर जिले से निष्कासन के बावजूद विभागीय गतिविधियों में गुप्त रूप से शामिल होने के आरोप हैं। तिवारी पर न केवल अवैध लकड़ी कटाई में लिप्त रहने के आरोप हैं, बल्कि विभाग की गोपनीय जानकारियां हासिल कर उन्हें अपने लाभ के लिए उपयोग करने का भी संदेह है। यह संभव हो पाया है डिप्टी रेंजर बी. डी. त्रिपाठी के कथित सहयोग से, जो चंद रुपयों की लालच में विभागीय नीतियों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

*डिप्टी रेंजर बी. डी. त्रिपाठी की भूमिका*

त्रिपाठी को बल्लन तिवारी का रिश्तेदार बताया जा रहा है, और यही रिश्ता इस पूरे भ्रष्टाचार की जड़ मानी जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, त्रिपाठी न केवल बल्लन तिवारी को वन विभाग की अंदरूनी जानकारियां दे रहे हैं, बल्कि जब भी विभागीय टीम लकड़ी तस्करी की सूचना पर निकलती है, पहले ही इन सूचनाओं को लीक कर दिया जाता है, जिससे बल्लन तिवारी और उसके गिरोह को बचने का मौका मिल जाता है।

*गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और लीक*

यह भी सामने आया है कि डिप्टी रेंजर ने विभाग के कुछ अत्यंत गोपनीय दस्तावेज, जिनमें आगामी छापेमारी की जानकारी, अधिकारियों की ड्यूटी चार्ट, और लकड़ी की गश्त की योजनाएं शामिल हैं, उन्हें भी तिवारी तक पहुंचाया है। इसके पीछे बड़ा कारण रिश्वत और निजी हितों को बताया जा रहा है।

*रेंजर अजय मिश्रा की संदिग्ध चुप्पी*

इस पूरे प्रकरण में रेंजर अजय मिश्रा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मिश्रा पर यह आरोप लग रहे हैं कि वह सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें इस गोरखधंधे का हिस्सा बनाकर आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। जब कोई व्यक्ति जिम्मेदार पद पर बैठकर इस प्रकार के भ्रष्टाचार में संलिप्त होता है, तो यह पूरे तंत्र को खोखला कर देता है।

*मौके पर खुली अवैध आरा मशीन और सगौन की कटाई*

सूत्रों के अनुसार, विभागीय गश्ती टीम जब मौके पर पहुंची, तब वहां खुलेआम आरा मशीन लगी थी, और सगौन की कीमती लकड़ियां काटी जा रही थीं। आश्चर्य की बात यह रही कि वहां विभाग के ही कुछ कर्मचारी जांच करने गए थे, जो इस कटाई को सामान्य गतिविधि बता रहे थे। स्पष्ट रूप से यह कटाई त्रिपाठी और मिश्रा की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी।

*सवालों के घेरे में वन विभाग की निष्पक्षता*

यह स्थिति एक बड़े प्रशासनिक संकट की ओर संकेत करती है। जब वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही माफियाओं से मिल जाएं, तो पर्यावरण की रक्षा का प्रश्न ही समाप्त हो जाता है। यह न केवल संसाधनों की लूट है, बल्कि कानून और व्यवस्था की सीधी अवहेलना है।

*प्रशासन की चुप्पी या सहमति?*

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह घटनाएं सार्वजनिक हो चुकी हैं, तो प्रशासन और संबंधित अधिकारी चुप क्यों हैं? क्या यह चुप्पी भी किसी बड़ी मिलीभगत का हिस्सा है? यदि तत्काल प्रभाव से जांच प्रारंभ नहीं की गई, तो यह मामला पूरे जिले की साख को धूमिल कर देगा।

*लोकायुक्त और सतर्कता विभाग की भूमिका*

इस तरह के मामलों में लोकायुक्त और सतर्कता विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और स्वतंत्र जांच की जाए, तो न केवल दोषी अधिकारियों को सजा मिल सकती है, बल्कि भविष्य के लिए एक उदाहरण भी स्थापित हो सकता है।

टिप्पणियाँ

popular post

चलते-चलते राह में, मोड़ अचानक आ गया, हंसता हुआ चेहरा भी पल में ख़ामोश हो गया, ना दस्तक, ना इशारा, ना कोई पैग़ाम आया, मौत ने चुपके से आकर अपना फ़र्ज़ निभाया सड़क दुर्घटना में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा भागीरथ पटेल का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

 चलते-चलते राह में, मोड़ अचानक आ गया, हंसता हुआ चेहरा भी पल में ख़ामोश हो गया, ना दस्तक, ना इशारा, ना कोई पैग़ाम आया, मौत ने चुपके से आकर अपना फ़र्ज़ निभाया सड़क दुर्घटना में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा भागीरथ पटेल का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर कटनी  |  जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में पदस्थ एवं वर्तमान में रीठी में कार्यरत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) भागीरथ पटेल के असामयिक निधन की दुखद खबर से पूरा प्रशासनिक अमला और क्षेत्र स्तब्ध है। कर्तव्यपथ से घर लौटते समय हुए एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया।इस हृदयविदारक घटना ने न केवल उनके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि जनपद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भी शोकाकुल कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भागीरथ पटेल अपने नियमित शासकीय कार्यों का निर्वहन कर कार्यालय से घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान मार्ग में उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि उन्हें गंभीर चोटें आईं । भागीरथ पटेल लंबे समय से मनरेगा योजना के अंतर्गत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी के रूप ...

कटनी बिग ब्रेकिंग जिला पंचायत में लोकायुक्त का छापा, रिश्वत लेते लेखापाल रंगे हाथों गिरफ्तार

 कटनी बिग ब्रेकिंग जिला पंचायत में लोकायुक्त का छापा, रिश्वत लेते लेखापाल रंगे हाथों गिरफ्तार कटनी ।  भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को जारी रखते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने आज कटनी जिला पंचायत कार्यालय में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने जिला पंचायत में पदस्थ लेखापाल (Accountant) सतेंद्र सोनी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। *क्या है पूरा मामला?* मिली जानकारी के अनुसार, एक ग्राम पंचायत सचिव को सेवा से निलंबित या पृथक किया गया था। उसकी बहाली (Reinstatement) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और कागजी कार्रवाई के एवज में लेखापाल सतेंद्र सोनी ने 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। सचिव ने इसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त विभाग से की। *लोकायुक्त की योजनाबद्ध कार्रवाई* शिकायत की पुष्टि होने के बाद, लोकायुक्त की 5 सदस्यीय टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही सचिव ने जिला पंचायत कार्यालय में लेखापाल को केमिकल लगे हुए नोट सौंपे, पहले से ही मुस्तैद टीम ने उन्हें धर दबोचा। *आरोपी*: सतेंद्र सोनी (लेखापाल, जिला पंचायत कटनी) *रिश्वत की राशि*: 5,000 रुपये *...

ढीमरखेड़ा में तहसीलदार रहते हुए जमकर बटोरी सुर्खियां अब पहुंच गई रीठी, रीठी तहसील में प्रभारी तहसीलदार की पुनर्नियुक्ति पर विवाद, ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च अधिकारियों तक पहुंच हैं लगता हैं मैडम की, जहां लगी थी शिकायत की झड़ी वही पहुंच गई मैडम, चाई - माई घुमा रहा प्रशासन

 ढीमरखेड़ा में तहसीलदार रहते हुए जमकर बटोरी सुर्खियां अब पहुंच गई रीठी, रीठी तहसील में प्रभारी तहसीलदार की पुनर्नियुक्ति पर विवाद, ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च अधिकारियों तक पहुंच हैं लगता हैं मैडम की, जहां लगी थी शिकायत की झड़ी वही पहुंच गई मैडम, चाई - माई घुमा रहा प्रशासन  कटनी  |  कटनी जिले की रीठी तहसील एक बार फिर प्रशासनिक फैसले को लेकर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। लंबे समय तक यहां पदस्थ रहीं तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया को पूर्व में ग्रामीणों की शिकायतों के बाद हटाया गया था, लेकिन अब जिला प्रशासन द्वारा उन्हें पुनः रीठी का प्रभारी तहसीलदार बनाए जाने के आदेश ने क्षेत्र में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। शनिवार को आशीष तिवारी, कलेक्टर, कटनी द्वारा जारी आदेश में प्रशासकीय एवं कार्यालयीन कार्य सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान में ढीमरखेड़ा की प्रभारी तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया को रीठी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। आदेश के सार्वजनिक होते ही क्षेत्र में चर्चाओं और विरोध का दौर शुरू हो गया। *पहले शिकायतें, फिर तबादला, अब दोबारा जिम्मेदारी* ग्रामीणों का कहना है ...