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कैलेण्डर वर्ष 2022 एवं कैलेण्डर वर्ष 2023 के पाण्डुलिपि अनुदान के तहत विजयराघवगढ़ की प्रियंका मिश्रा का साहित्य संग्रह में हुआ चयन, प्रियंका मिश्रा शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी की बेटी हैं पढ़ने लिखने में पहले से रही होनहार

 कैलेण्डर वर्ष 2022 एवं कैलेण्डर वर्ष 2023 के पाण्डुलिपि अनुदान के तहत विजयराघवगढ़ की प्रियंका मिश्रा का साहित्य संग्रह में हुआ चयन, प्रियंका मिश्रा शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी की बेटी हैं पढ़ने लिखने में पहले से रही होनहार



ढीमरखेड़ा | साहित्यिक क्षेत्र में नए लेखकों को प्रोत्साहन और उनके कार्यों को प्रकाशित करने के लिए साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल, ने कैलेण्डर वर्ष 2022 एवं 2023 के लिए कुल 80 पांडुलिपियों का चयन किया है। इस महत्वपूर्ण योजना के तहत विजयराघवगढ़ की प्रियंका मिश्रा का नाम भी सम्मिलित हुआ है। प्रियंका, जो शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी की बेटी हैं, ने अपनी पहली कृति के रूप में काव्य संग्रह प्रस्तुत किया, जिसे 20,000 रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रियंका मिश्रा साहित्य जगत में एक नई लेकिन होनहार प्रतिभा हैं। शिक्षक परिवार से आने वाली प्रियंका को पढ़ने और लिखने का शौक बचपन से ही था। उनके पिता सूर्यकांत त्रिपाठी ने हमेशा उनकी शिक्षा और रचनात्मकता को बढ़ावा दिया। उनकी लेखनी में ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाएं, और समाज की वास्तविकताएं झलकती हैं। प्रियंका का यह चयन यह दर्शाता है कि मेहनत और लगन से युवा लेखकों के लिए नए दरवाजे खुल सकते हैं।

*कैलेण्डर वर्ष 2022 और 2023 की योजना*

मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के लेखकों की प्रथम कृतियों को प्रोत्साहित करना और उनके साहित्यिक कार्यों को पाठकों तक पहुँचाना है। इस योजना के अंतर्गत हर साल 40 पांडुलिपियों को अनुदान दिया जाता है। साहित्य अकादमी के निदेशक, डॉ. विकास दवे ने योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल उन लेखकों के लिए एक अवसर है, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उनकी रचनाएं प्रकाशित नहीं हो पातीं। यह योजना लेखकों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ साहित्यिक मंच भी प्रदान करती है।

*प्रियंका मिश्रा का काव्य संग्रह*

प्रियंका मिश्रा की पांडुलिपि, जो एक काव्य संग्रह है, उनकी भावनाओं और विचारों का एक अद्भुत संकलन है। उनके काव्य में प्रेम, प्रकृति, सामाजिक विषय और मानवीय संबंधों की गहराई दिखाई देती है। इस संग्रह के माध्यम से प्रियंका ने समाज की बदलती परिस्थितियों और जीवन की जटिलताओं को सरल और मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत किया है।उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है, जो पाठकों को अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं और अनुभवों को नए दृष्टिकोण से समझने का मौका देती है।

*एक छोटे से गांव से प्रियंका ने भरी उड़ान*

20,000 रुपये का अनुदान न केवल आर्थिक सहयोग है, बल्कि यह नए लेखकों के लिए आत्मविश्वास का एक बड़ा स्रोत भी है। प्रियंका ने इस अनुदान को अपनी साहित्यिक यात्रा का पहला कदम मानते हुए कहा कि वह भविष्य में भी लेखन के क्षेत्र में नए प्रयोग करना चाहती हैं। उनकी योजना है कि वह अपने काव्य संग्रह को एक बड़े पाठक वर्ग तक पहुँचाएं और साथ ही अन्य साहित्यिक विधाओं जैसे उपन्यास और कहानी लेखन में भी कदम रखें। प्रियंका का मानना है कि साहित्य एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए समाज को जागरूक किया जा सकता है।

*निर्णायक मंडल का योगदान और चयन प्रक्रिया*

साहित्य अकादमी ने सभी निर्णायक गण का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में प्राप्त पांडुलिपियों का सूक्ष्म अध्ययन किया और उनमें से श्रेष्ठ 80 पांडुलिपियों का चयन किया। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रही। निर्देशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि निर्णायक मंडल में साहित्य के विद्वान और अनुभवी व्यक्तित्व शामिल थे। उन्होंने सभी चयनित लेखकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

*प्रतिभा का उदय कभी भी हों सकता है*

साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर काम कर रही है। इस तरह की योजनाएं न केवल साहित्य को प्रोत्साहन देती हैं, बल्कि समाज में रचनात्मकता और जागरूकता भी बढ़ाती हैं। प्रियंका मिश्रा जैसी युवा लेखकों का चयन यह साबित करता है कि भारत के छोटे कस्बों और गांवों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यदि उन्हें सही दिशा और संसाधन मिलें, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। प्रियंका मिश्रा का चयन साहित्य अकादमी की प्रथम कृति प्रकाशन योजना के अंतर्गत विजयराघवगढ़ और पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह सफलता न केवल उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह सभी युवा लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। यह पहल साहित्य जगत में नए आयाम जोड़ रही है और यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में और भी नए लेखक इस योजना का लाभ उठाकर साहित्य की दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे। प्रियंका मिश्रा और उनके जैसे सभी चयनित लेखकों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

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