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ढीमरखेड़ा सरपंच फोरम ने डॉक्टर अजीत सिंह परिहार के स्थानांतरण निरस्त करने को लेकर कलेक्टर को लिखा पत्र, अपने नायक के पक्ष में सरपंच फ़ोरम

 ढीमरखेड़ा सरपंच फोरम ने डॉक्टर अजीत सिंह परिहार के स्थानांतरण निरस्त करने को लेकर कलेक्टर को लिखा पत्र, अपने नायक के पक्ष में सरपंच फ़ोरम



ढीमरखेड़ा |  सरपंच फ़ोरम के अध्यक्ष महेश कुमार यादव, उपाध्यक्ष संकेत लोनी, सचिव दीनू सिंह ठाकुर एवं ढीमरखेड़ा जनपद के समस्त सरपंचों ने मिलकर कलेक्टर को पत्र प्रेषित किया, जिसमें डॉक्टर अजीत सिंह के स्थानांतरण को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। सरपंच फ़ोरम का मानना है कि डॉक्टर अजीत सिंह एक ईमानदार, जिम्मेदार और मिलनसार अधिकारी हैं जिन्होंने न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बरती है, बल्कि ग्रामीण जनता के साथ मिलकर उनकी समस्याओं को सुलझाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। फ़ोरम का कहना है कि डॉक्टर अजीत सिंह के स्थानांतरण से ढीमरखेड़ा क्षेत्र के विकास कार्यों में अवरोध पैदा हो सकता है, क्योंकि उन्होंने अनेक ऐसे प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की थी, जिन्हें पूरा करने में समय और प्रशासनिक अनुभव की आवश्यकता है। उनके स्थानांतरण से इन कार्यों की गति धीमी हो सकती है, और साथ ही, क्षेत्र की जनता को भी नुकसान हो सकता है, जो उनकी सेवाओं से काफी संतुष्ट थी। फ़ोरम ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और तत्काल स्थानांतरण के आदेश को निरस्त करें।

*डॉक्टर अजीत सिंह परिहार की कार्यशैली*

डॉक्टर अजीत सिंह परिहार की कार्यशैली हमेशा से ही पारदर्शिता और निष्पक्षता पर आधारित रही है। उन्होंने ढीमरखेड़ा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया, जिसमें ग्रामीण विकास, स्वच्छता अभियान, पेयजल आपूर्ति, और कृषि संबंधी योजनाओं का सफल कार्यान्वयन शामिल है। इसके साथ ही, उन्होंने ग्रामीण जनता के बीच विश्वास कायम किया और उनकी समस्याओं को सुनकर त्वरित समाधान प्रदान किए। इस वजह से उन्हें एक जनप्रिय अधिकारी के रूप में देखा जाता है, और उनके स्थानांतरण से जनता और सरपंच फ़ोरम के सदस्यों में गहरी असंतुष्टि है।डॉक्टर अजीत सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्होंने उन चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया। उनके नेतृत्व में ढीमरखेड़ा क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का सुचारू रूप से क्रियान्वयन हुआ, जिससे क्षेत्र की जनता को सीधा लाभ मिला। उनकी मिलनसारता और समस्याओं को गंभीरता से सुनने की प्रवृत्ति ने उन्हें ग्रामीणों के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया है।

*स्थानांतरण का हों रहा विरोध*

डॉक्टर अजीत सिंह के स्थानांतरण का विरोध केवल सरपंच फ़ोरम तक ही सीमित नहीं है। क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और ग्रामीण जनता ने भी उनके स्थानांतरण का विरोध किया है। इन संगठनों का मानना है कि ऐसे समय में जब ढीमरखेड़ा क्षेत्र विकास के पथ पर अग्रसर है, डॉक्टर अजीत सिंह का स्थानांतरण इस विकास को बाधित कर सकता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की थी, जिनके पूरा होने में अभी और समय लगेगा। यदि ऐसे समय में उनका स्थानांतरण किया जाता है, तो उन योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण जनता का कहना है कि डॉक्टर अजीत सिंह ने हमेशा उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी और उनके समाधान के लिए त्वरित कदम उठाए। उनका स्थानांतरण न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी क्षेत्र के लिए हानिकारक हो सकता है। डॉक्टर अजीत सिंह की कार्यशैली और उनकी प्रशासनिक नीतियों के कारण वे जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इस लोकप्रियता के चलते ग्रामीण लोग उनके स्थानांतरण को अनुचित मानते हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

*सरपंच फ़ोरम द्वारा उग्र प्रदर्शन की चेतावनी*

सरपंच फ़ोरम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्रता से विचार नहीं किया गया, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे। फ़ोरम का कहना है कि यदि कलेक्टर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉक्टर अजीत सिंह के स्थानांतरण को निरस्त करने की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा। यह चेतावनी प्रशासन के लिए गंभीर है, क्योंकि सरपंच फ़ोरम का ढीमरखेड़ा में महत्वपूर्ण प्रभाव है, और यदि वे आंदोलन करते हैं, तो इसका व्यापक प्रभाव क्षेत्र के विकास और शांति व्यवस्था पर पड़ सकता है। फ़ोरम का मानना है कि उग्र प्रदर्शन करना उनका अंतिम विकल्प होगा, लेकिन यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो उन्हें इस कदम पर मजबूर होना पड़ेगा। सरपंच फ़ोरम के सदस्यों ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन यदि उनकी आवाज़ अनसुनी की गई, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

*तत्काल होते हैं सबके कार्य*

जहां एक ओर सरपंच फ़ोरम और ग्रामीण जनता डॉक्टर अजीत सिंह के स्थानांतरण को अनुचित मान रही है, वहीं प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। कलेक्टर कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इस मामले में सरपंच फ़ोरम के विरोध को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं, और यह संभावना है कि जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा। सरपंच फ़ोरम के पत्र का प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा, यह तो भविष्य में ही देखा जा सकेगा, लेकिन वर्तमान में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले को नहीं सुलझाया, तो ढीमरखेड़ा में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।

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