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समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में गड़बड़ी का मामला गोदामों के बाहर पड़ा लाखों क्विंटल गेहूं, ठेके के जांचकर्ताओं के हवाले किसानों की कमाई

 समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में गड़बड़ी का मामला गोदामों के बाहर पड़ा लाखों क्विंटल गेहूं, ठेके के जांचकर्ताओं के हवाले किसानों की कमाई



 मध्यप्रदेश | भोपाल ठेके के जांचकर्ता किसानों की मेहनत की कमाई पर पानी फेर रहे हैं। हाल यह है कि समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 4.80 लाख क्विंटल गेहू गोदामों के बाहर धूल खा रहा है। जिसके चलते किसानों का भुगतान नहीं हुआ है। असल में गेहूं खरीदी एफएक्यू गाइडलाइन के आधार पर की जाती है।

खरीदी समितियों से लेकर गोदाम संचालक तक को इसी का पालन करना होता है लेकिन हो यूं रहा है कि किसानों के जिस गेहूं को सहकारी समितियों द्वारा पास करके खरीदा जा रहा है, जब वही गेहूं गोदामों में जमा

करने के लिए भेजा रहा है तो वह एफएक्यू मापदंड पर खरा नहीं उतर रहा है, जबकि एफएक्यू की जो गाइडलाइन खरीदी समितियों के लिए लागू है वही गाइडलाइन गोदामों के लिए भी लागू है। खरीदी के लिए नोडल एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम है। इनके पास प्रशिक्षित अधिकारी, कर्मचारी की भारी कमी है। क्वालिटी जांचने का काम ठेके के कर्मचारियों से कराया जा रहा है। उधर, वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन में अनाज की जांच करने का काम भी आउटसोर्स कर्मचारियों के जिम्मे है। इसकी पूरी जवाबदारी नोडल एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम व समितियों की है।

*इनका कहना है*

समिति, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयर हाउसिंग के पास प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी है। अनाज की जांच आउटसोर्स के किसानों के साथ मजाक है, इनके भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। 

 *अरुण वर्मा, रिटायर्ड मैनेजर*

 किसान अव्यवस्था से परेशान हैं, इनके पास प्रशिक्षित कर्मचारी है नहीं और ये सरकार से कमीशन के चक्कर में खरीदी करने निकले हैं। यदि खरीदी से जुड़ी सभी एजेंसियों ने सुधार नहीं किया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन करेंगे। 

*रविदत्त सिंह, महामंत्री, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ*

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