सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अभी से निराशा भर गई आलाकमान की सरेंंडर-नीति से मैनेज जिला मानकर तीनों विधानसभाओं में अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के संकेत कटनी से प्रेम बत्रा, विजयराघवगढ़ से ध्रुवप्रताप सिंह और बहोरीबंद से निशीथ पटैल के नाम लीड कर रहे जनाक्रोश को विजयी मतों तक लाने में सक्षम विजेन्द्र मिश्रा, सौरभ सिंह पर बंटाढार की तलवार लटकी

 कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अभी से निराशा भर गई आलाकमान की सरेंंडर-नीति से

मैनेज जिला मानकर तीनों विधानसभाओं में अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के संकेत

कटनी से प्रेम बत्रा, विजयराघवगढ़ से ध्रुवप्रताप सिंह और बहोरीबंद से निशीथ पटैल के नाम लीड कर रहे

जनाक्रोश को विजयी मतों तक लाने में सक्षम विजेन्द्र मिश्रा, सौरभ सिंह पर बंटाढार की तलवार लटकी



ढीमरखेड़ा । जिले का कांग्रेस कार्यकर्ता चौथी बार हताशा में भर गया है, क्योंकि स्क्रीनिंग कमेटी में जिस तरह से नामों की वरीयता नजर  आ रही है उसमें कांग्रेस का रूख कटनी को मैनेज जिला मानकर सरेंडर जैसा कर देने की आहट अनुभवी पार्टी कार्यकर्ता देख, सुन,समझ रहा है।भोपाल दिल्ली तक दौडऩे वाले नेताओं के अनुसार उन्हें लगता है कि- कमलनाथ-दिग्गी ने कटनी में अपनी हार पहले से मान ली है और मैनेज नीति पर प्रत्याशी चुना जाने वाला है। जिसमें भाजपा से अयातित बुजुर्गवार ध्रुव प्रताप सिंह को विजयराघवगढ से, कटनी से नव-स्फुरित प्रेम बत्रा का प्रत्याशी बनना लगभग तय है। बहोरीबंद से उस प्रत्याशी का टिकट नहीं बल्कि हाथ पैर जैसा काटे जाने का संकेत मिल रहा है जो हार के बाद भी जनता के सतत संपर्क में रहा है यानि सौरभ सिंह सिसोदिया को सामंती नेता टिकट के योग्य नहीं मान रहे हैं उनके स्थान पर जबलपुर के निशीथ पटैल का नाम तय माना जा रहा है कारण जबलपुरिया कांग्रेस नेताओं की लॉबी हावी है। कार्यकर्ता इन हलचलों से अभी से हताश है l क्योंकि जिले में दो सीट ऐसी हैं - कटनी और बहोरीबंद जहां कांटे का मुकाबला किया जा सकता है,भाजपा से सीट वापस छीनी जा सकती है l लेकिन मैनेज सीट का गणित बंटाढार नीति के हावी होने को दर्शा रहा है।

अल्पसंख्यक प्रत्याशी हारते आए हैं फिर होंगे रिपीट

कटनी मुड़वारा से अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रत्याशियों को मतदाता ने स्वीकार नहीं किया है, बहुमत से वे काफी दूर रहे हैं, इसलिए अल्प संख्यक पर दाव लगाकर कांग्रेस आलाकमान अपने कार्यकर्ता को पहले ही मायूस करेंगे फिर उनसे आशा करेंगे की जीत का जादू दिखाओ। पिछड़ा वर्ग से किसी संघर्षशील नेता का नाम आगे लाने के लिए देर हो चुकी है अलबत्ता सामान्य वर्ग से अनुभवी विजेंन्द्र मिश्रा राजा भैया को टिकट मिलने की इस बार मजबूत उम्मीद कार्यकर्ताओं को थी l वे ऐसी मानसिकता भी बना चुके थे,  जिनका नाम अब बंटाढार नीति में ढकेल दिया गया है।

विपक्ष में युवा ही नजर आए

जिले में विपक्ष की भूमिका में सदैव युवा कांग्रेस आगे रही है बल्कि यह कहना ठीक होगा की कांग्रेस की विपक्षी भूमिका को युवाओं ने ही जिन्दा बनाकर रखा है l इनकी भूमिका के आधार पर दिव्यांशु मिश्रा की  अपनी दावेदारी उचित बनती है, लेकिन महापौर के चुनाव में एक योग्य प्रत्याशी श्रेहा रौनक खंडेलवाल को अप्रत्याशित रूप से मिली पराजय से जिले के मतदाता ने अपने चयन का एक मापदंड जनता और राजनैतिक दलों को बता दिया है। इसके बाद एक लंबी फेरहिस्त है जिनमें जिला बार एसो. के अध्यक्ष पं. अमित शुक्ला, प्रियदर्शन गौर, ट्रास्पोर्ट एसो. के अध्यक्ष बी.एम.तिवारी, पं. हरीशंकर शुक्ला के नाम आलाकमान की नीति में पीछे चले गए हैं। यह चर्चा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की है।

बहोरीबंद बाहरी प्रत्याशी को पसंद नहीं करेगा

पिछले कई साल से बहोरीबंद में नागरिकों की सभाएं होती रही हैं और उसमें साफ कहा जाता रहा कि स्थानीय प्रत्याशी चाहिए। इसके बाद  जो कांग्रेस की जनाक्रोश यात्रा या रैली हुई उनमें सौरभ सिंह सिसौदिया की लोकप्रियता साफ नजर आई। स्थानीय नेताओं में राकेश पटैल की प्रभावी छाप स्पष्ट है। किंतु बंटाढार लॉबी अब धनाढ्य प्रत्याशी को टिकट देकर मैनेज करती नजर आ रही है और कार्यकर्ता बेहद निराश हो रहा है । परोक्ष रूप से ऐसे टिकट वितरण करना एक तरह से भाजपा के सामने चुनाव पूर्व सरेंडर करना मानकर कांग्रेस कार्यकर्ता बुरी तरह हताश हो चला है।

अंतिम क्षण तक आशा तो बनी रहेगी

फिलहाल जब तक टिकिट की अधिकृत घोषणा नहीं होती कार्यकर्ता अपनी उम्मीद जिंदा किए है और जनाक्रोश को विजय मत में बदलने के लिए वह कमर कसे बैठा है, शेष भारी भरकम दिमाग वाले जानें पूर्व ननि अध्यक्ष संतोष शुक्ला के बगावती तेवर संजय-संदीप दोनों को बताया रोड़ा भाजपा प्रत्याशी संदीप जायसवाल का चयन एक दोषपूर्ण फैसला है और इससे पूर्व ननि अध्यक्ष तथा वर्तमान मेयर इन कौंसिल सदस्य पार्षद संतोष शुक्ला भी क्षुब्ध नजर आए, प्रत्याशी का विरोध उन्होंने एक प्रेसवार्ता में किया। वार्ता में संतोष शुक्ला ने संजय पाठक को भी विकास में रोड़ा बताया और स्मरण किया कि किस तरह उन्होंने नगर निगम अध्यक्ष पद चुनाव के लिए अपने चचरे भाई के सामने उनको समर्थन नहीं होने दिया। संतोष शुक्ला के आक्रोश की वजह यह रही कि संदीप जायसवाल ने मेयर के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के लिए निष्ठा से अपनी भूमिका नहीं निभाई और परोक्ष रूप से निर्दलीय प्रत्याशी को लाभ मिला। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उनका चयन किया जाना दोषपूर्ण निर्णय है और हर जमीनी कार्यकर्ता इससे नाराज है। वैसे संतोष शुक्ला ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से स्तीफा नहीं दिया है मगर यह जरूर कहा कि जरूरत समझूंगा तो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर सकता हूं।

टिप्पणियाँ

popular post

सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत

 सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत    कटनी ।  मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बहोरीबंद विकासखंड में संचालित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम स्लीमनाबाद स्थित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते क्रमांक 3790886493 से विभिन्न व्यक्तियों/अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन की जांच की मांग की है और तौफिक अहमद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आजीविका गतिविधियों के लिए उछऋ को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में लगभग 18.24 लाख के कथित ट्रांसफर का उल्लेख है। इसके अलावा एक अन्य बिंदु में उछऋ खाते से लगभग 1.15 करोड़ से अधिक राशि ट्...

पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता

 पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता ढीमरखेड़ा ।  कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। जानकारी के अनुसार, गांव में तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच स्थित ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ नजर आया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के बीच मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलते ही क्षेत्र में सतर्कता का माहौल बन गया।लोगों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्र या घाट के आसपास मौजूद रहता है, तो किसी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से घाट के आसपास आने-जाने वाले ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करे और मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की...

एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप

 एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप ढीमरखेड़ा ।  तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि सहकारिता एवं खाद्य विभाग से जुड़े जिम्मेदारों द्वारा एक ही विक्रेता पर दो, तीन यहां तक कि चार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण का कार्य संभालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक विक्रेता से कई दुकानों का संचालन किस नियम और किस आदेश के तहत कराया जा रहा है।बताया जा रहा है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में विक्रेताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति को एक से अधिक दुकानों का वितरण कार्य सौंपा जा रहा है तो इसके पीछे सक्षम अधिकारी का आदेश, निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन होना आवश्यक है। क्षेत्र में इसी बिंदु को लेकर चर्चाएं तेज हैं...